Banner 1
Banner 2

प्रदोष व्रत भौम on 02 Apr 2019 (Tuesday)

भौम प्रदोष व्रत से होंगे सभी कष्ट दूर, जानिए कैसे और क्यों किया जाता है ये व्रत

हिंदू धर्म में समय-समय पर विभिन्न प्रकार के कई व्रत किए जाते है। हर महीने शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी के दिन किए जाने वाले व्रत को प्रदोष व्रत कहा जाता है। इस दिन विशेष रुप से भगवान शिव की पूजा की जाती है। लेकिन अगर यह व्रत मंगलवार के दिन आ जाता है तो इसका अपने आप में ही विशेष महत्व होता है। मंगल को भौम के नाम से भी जाना जाता है, इसलिए इस दिन आने वाले प्रदोष व्रत को भौम प्रदोष व्रत भी कहते है।

क्यों रखा जाता है ये व्रत

भौम प्रदोष व्रत मूलरुप से संकट दूर करने के लिए किया जाता है। इस दिन मंगल देव, संकटमोचन हनुमान और भगवान शिव की आराधना की जाती है। कहा जाता है कि जो कोई सच्चे मन से इस दिन व्रत करता है उसके सभी कष्ट दूर हो जाते है, रोगों से मुक्ति मिलती है, पुराने सभी कर्ज माफ हो जाते है एवं कोर्ट-कचहरी जैसे मामलों से भी छुटकारा मिलता है।

भौम प्रदोष व्रत की कथा

भौम प्रदोष व्रत के पीछे एक पुरानी कथा का विवरण सुनने को मिलता है। एक गांव में एक वृद्ध महिला अपने इकलौते पुत्र के साथ छोटी-सी कुटियां में रहती थी। वह हनुमान की बहुत बड़ी भक्त थी और हर मंगलवार को व्रत भी रखती थी। एक बार हनुमान जी ने स्वयं उस महिला की परीक्षा लेने का मन बनाया। वह एक साधु का वेश धारण कर वृद्ध महिला के घर पहुंच गए।

उन्होंने वृद्ध महिला से जमीन लीपने के लिए कहा। इस पर महिला ने कहा यह काम छोड़कर वह कोई भी काम करने के लिए तैयार है। साधु ने महिला की प्रतिज्ञा सुन कहा कि वह अपने बेटे को बुलाए, आज वह उसकी पीठ पर अग्नि जलाकर भोजन बनाएंगे। वृद्ध महिला ने दुखी होकर अपने बेटे को बुलाया और पीठ पर आग लगा दी। साधु जैसे ही भोजन बनाने लगा, वह महिला अंदर घर में चली गई।

कुछ देर बाद जब वह महिला बाहर आई तो साधु ने कहा अपने बेटे को भी भोजन के लिए बुला लो। महिला ने जैसे ही अपने बेटे का नाम पुकारा वह जीवित होकर सामने उपस्थित हो गया। वृद्ध महिला की भक्ति देख हनुमान जी अपने असली रुप में प्रकट हो गए और उस महिला को सदा सुखी रहने का आशीर्वाद प्रदान किया। उसी समय से भौम प्रदोष व्रत की मान्यता बनी हुई है।

कैसे करें भौम प्रदोष व्रत पर पूजा

भौम प्रदोष व्रत के दिन सुबह के समय स्वच्छ श्वेत वस्त्र धारण कर शिव मंदिर में भोले बाबा को जल अर्पित किया जाता है। इसके बाद घर के ईशान कोण में गंगा जल से शुद्धि कर भगवान शिव की पूजा की जाती है। पूजा में चावल, सफेद पुष्प, नारियल, धतुरा, लोंग, भांग आदि सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है।

इस दिन व्रती लोग पूरे दिन उपवास रखते है। शाम को प्रदोष काल में मंगल देव और महाबली हनुमान की पूजा होती है। घर में लोग सुंदरकाण्ड के पाठ का आयोजन भी करते है। ऐसा करने से जीवन के सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है। पूजा के पश्चात ब्राह्मणों को भोजन कराया जाता है। इस तरह से पूरे विधि-विधान के साथ भौम प्रदोष व्रत संपन्न होता है।