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इस तरह से करें भगवान चित्रगुप्त की पूजा on 29 Oct 2019 (Tuesday)

  • भगवान चित्रगुप्त के पास सभी मनुष्यों के कर्मों का लेखा जोखा रहता है. कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीयतिथि के दिन भगवान चित्रगुप्त की खास पूजा की जाती है. हिंदू धर्म में चित्रगुप्त पूजा का बहुत ही विशेष महत्व है.
  • भगवान चित्रगुप्त कायस्थों के आराध्य देव माने जाते हैं. भगवान चित्रगुप्त कायस्थों के प्रमुख भगवान माने जाते हैं. भगवान चित्रगुप्त यमराज के सहायक भी हैं| कायस्थ समाज में भगवान चित्रगुप्त की पूजा का उत्सव बहुत ही धूमधाम और उल्लास के साथ मनाया जाता है.
  • भगवान चित्रगुप्त ब्रह्म देव के पुत्र हैं. इन्हें ज्ञान का देवता भी माना जाता है. यमलोक के राजा यमराज मनुष्य को उसके कर्मों के आधार पर दंड या मुक्ति देते हैं. यमराज की सहायता करने के लिए भगवान चित्रगुप्त सभी मनुष्यों के कर्मों का लेखा जोखा लिखकर यम देव के काम में मदद करते हैं.
  • चित्रगुप्त भगवान का जन्म ब्रह्म देव के अंश से ना होकर उनकी संपूर्ण काया से हुआ था. इसीलिए भगवान चित्रगुप्त को कायस्थ कहा जाता है. उनके उपनाम के आधार पर समाज में इनका गोत्र चला और कायस्थ वर्ग की भागीदारी शुरू हुई.
  • भगवान चित्रगुप्त ने 2 शादियां की थी उनकी एक पत्नी ब्राह्मण थी और दूसरी क्षत्रिय. भगवान चित्रगुप्त जी की पहली पत्नी का नाम इरावती था और इनकी दूसरी पत्नी का नाम नंदिनी था.
  • भगवान चित्रगुप्त का जन्म यम द्वितीया के दिन हुआ था. इसलिए कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि के दिन चित्रगुप्त जी का जन्म दिन मनाया जाता है और चित्रगुप्त पूजा की जाती है.
  • शास्त्रों में बताया गया है कि जो भी मनुष्य भगवान चित्रगुप्त की पूजा सच्चे मन और आस्था के साथ करता है उसे मृत्यु के बाद बैकुंठ धाम की प्राप्ति होती है. 
चित्रगुप्त जी के जन्म के विषय में एक कथा बहुत ही मशहूर है:
जब यमराज ने ब्रह्मा जी से अपने लिए सहयोगी की मांग की तब ब्रह्माजी यमराज की बात सुनकर ज्ञान ध्यान में चले गए. 1000 साल तक तपस्या करने के बाद ब्रह्मा जी के शरीर से एक पुरुष की उत्पत्ति हुई. इस पुरुष का जन्म ब्रह्मा जी के शरीर से हुआ था इसीलिए  यह कायस्थ कहलाए और इनका नाम चित्रगुप्त पड़ा.
 
चित्र गुप्त जी का स्वरुप:
  • भगवान चित्रगुप्त के हाथों में कर्म की किताब कलम दवात रहती है. भगवान चित्रगुप्त एक बहुत ही कुशल लेखक हैं और इनकी लेखनी के अनुसार मनुष्य और जीवो को उनके कर्मों के अनुसार न्याय दिया जाता है.
  • भगवान चित्रगुप्त का जन्म कार्तिक शुक्ल द्वितीया तिथि के दिन हुआ था. इसलिए इस दिन इनकी पूजा का विधान है. यमराज और चित्रगुप्त की पूजा करने से और उनसे अपने बुरे कर्म और पापों के लिए क्षमा मांगने से नरकका कष्ट नहीं भोगना पड़ता है.
  • कायस्थ समाज में चित्रगुप्त पूजा के दिन कलम और बही खाते की भी पूजा की जाती है. कलम और बहीखाता दोनों ही भगवान चित्रगुप्त को बहुत प्रिय है.
  • इसके अलावा इस दिन कायस्थ अपनी आयव्यय का ब्योरा और घर परिवार के बच्चों के बारे में पूरी जानकारी लिखकर भगवान चित्रगुप्त के सामने रखते हैं.
  • चित्रगुप्त पूजा के दिन एक प्लेन पेपर पर अपनी मनोकामना लिखकर पूजा के बाद भगवान विष्णु चित्रगुप्त के चरणों में चढ़ाई जाती है. चित्रगुप्त पूजा की रस्में केवल पुरुष ही निभाते हैं और पूजा में पूरा परिवार साथ देता है.
 
चित्रगुप्त भगवान की पूजा के लिए सामग्री -
 
चंदन ,रोली ,मौली, धूप, रुई, पान का पत्ता, सुपारी, अबीर, पीली, सरसों, गंगाजल, चावल पीले रंग का,  तिल, जौ, दूध, दही, शहद, शक्कर, अदरक, घी, तांबे का कटोरा, जनेऊ, मिट्टी का बर्तन, कपूर, ऋतु फल, पंच पात्र, कलम, दवात, स्याही, माला, फूल, लाल वस्त्र, पीला वस्त्र, चौकी, नैवेद्य, तुलसी का पत्ता, दीप, आम का पत्ता, लौंग, इलायची, सादा कागज
 
पूजा की तैयारी -
  • चित्रगुप्त भगवान की पूजा करने के लिए सबसे पहले पूजा के स्थान को गंगा जल से शुद्ध करें. पूजा करने के लिए परिवार के सभी लोग स्नान करने के बाद शुद्ध होकर साफसुथरे वस्त्र धारण करें.
  • अब लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर भगवान चित्रगुप्त की तस्वीर स्थापित करें. भगवान चित्रगुप्त की तस्वीर के साथ साथ भगवान गणेश जी की मूर्ति या तस्वीर रखें.
  • अगर आपके पास भगवान गणेश की तस्वीर नहीं है तो सुपारी पर मौली बांधकर गणेश जी का स्वरूप बनाकर चौकी पर स्थापित करें.
  • चित्रगुप्त भगवान की पूजा करने से पहले गणेश जी का ध्यान करें हाथों में पीला चावल और फूल लेकर नीचे दिए हुए मंत्र का जाप करें.
सुमुखश्चैकदंतश्च कपिलो गज कनकः 
लम्बोदरश्च विकटो विघ्ननाशो विनायकः 
धूम्रकेतुगणाध्यक्षो भालचन्द्रो गजाननः गजाननः 
द्वादशैतानि नामानि यै पठेच्छ्रयादपि विद्यारम्भे विवाहे च प्रवेशे निर्गमे तथा संग्रामे संकटै चैव विघ्नस्तस्य ना जयते 
अगर आप यह मन्त्र न जप सकें तो आप इस मन्त्र का जाप भी कर सकतें हैं| 
ॐ गं गणपतय नमः|

इस मंत्र का जाप करने के बाद गणेश जी का पूजन करें. 
  • सबसे पहले पंच पात्र से जल भरकर गणेश जी को स्नान कराएं.
  • अब गणेश जी को वस्त्र अर्पित करें.
  • गणेश जी को वस्त्र चढ़ाने के बाद उन पर मौली चढ़ाएं.
  • अब गणेश जी को जनेऊ अर्पित करके चंदन और रोली लगाएं.
  • अब इसके बाद गणेश जी पर चावल और फूल अर्पित करके भोग के लिए फल चढ़ाएं.
  • अब धूप समर्पित करके गणेश जी के सामने हाथ जोड़कर प्रार्थना करें.
 गणेशजी की पूजा करने के बाद 
  • कलश में शुद्ध जल भरकर आम के पत्तों को इसमें रखें.
  • सभी फलों को धोकर भगवान के सामने चढ़ाएं.
  • अब दूध, दही, घी, शहद और शक्कर को मिलाकर पंचामृत बनाएं.
  • अदरक का रस और गुड़ मिलाकर प्रसाद तैयार करें.
  • पंच पात्र में जल भरकर उसमें थोड़ा सा गंगाजल मिलाएं.
  • अब मिट्टी के एक कटोरे में शक्कर भर कर रखें. अब पूजा की थाल में रोली, अक्षत, फूल, हल्दी, चंदन, गुड, दही, इत्र, कलावा, गाय के गोबर का कंडा, हवन सामग्री, कपूर, मिठाई आदि पूजन सामग्री रखें.
  • अब भगवान की तस्वीर के सामने गंगाजल छिड़ककर दीपक और कपूर जलाएं.
  • अब नीचे बताए गए मंत्र के द्वारा भगवान चित्रगुप्त का ध्यान करें.
ताक्षरी रामहाबाहु श्याम कमल लोचनः कम्बु ग्रीवोगूढ़ शिरः पूर्ण चंद्र निभाननः,
काल दन्डोस्तवोवासो हस्ते लेखनी पात्र संयुतः निहत्य दार्षनेतास्थाओ
ब्रम्हानेतवयक्ति जन्मनः लेखनीखेडाघास्ते च मसि भाजन पुस्तकः
कायस्थ कुल उत्पन्न चित्रगुप्त नमो नमः
मसि भाजन संयुक्तश्चरोसी त्वम् महीतले लेखनी
कठिन हस्ते चित्रगुप्त नमोस्तुते चित्रगुप्त नमस्तुभ्यं
लेखकाक्षर दायक कायस्थ जाती मासाद्य चित्रगुप्त मनोस्तुते
योषात्वया लेखनस्य जीविकाएँ निर्मित तेषा च पलको यासभतरत शांति प्रयच्छ में  

अगर आप यह मन्त्र न जप सकें तो आप इस मन्त्र का जाप भी कर सकतें हैं| 
 '‎ॐ श्री चित्रगुप्ताय नमः' 
अब मन्त्र का जाप करने के बाद चित्रगुप्त जी को रोली और अक्षत का टीका लगाएं और फिर भोग लगाकर गणेश वंदना करें. 
अब दवात लेखनी मंत्र का जाप करे.
 
लेखनी निर्मिता पूर्व ब्रम्ह्राण परमेष्ठिनाम लोकानां च हितार्थाय
तस्मातं पूज्यामिआम पुस्तके चर्चित देवी सर्व विद्यान्दा भवः
मद्गृहे धन धान्यादि समृद्धि कुरु सदा लेखाये ते नमस्तेतु
लाभकतरै नमो नमः सर्व विद्या प्रकाशिन्ये शुभदाये नमो नमः
 
अब एक प्लेन पेपर पर रोली से स्वास्तिक बनाएं. 
स्वास्तिक के नीचे एक तरफ अपना नाम पता और तारीख लिखें. 
स्वास्तिक के दूसरी तरफ अपनी आय व्यय का पूरा विवरण लिखें. 
अब अपनी मनोकामना बताते हुए अगले साल के लिए आवश्यक धन हेतु भगवान चित्रगुप्त से प्रार्थना करें और सबसे अंत में अपना नाम लिखें. 
अब इस कागज और अपनी कलम की हल्दी, रोली, अक्षत और मिठाई अर्पित करके विधिपूर्वक पूजन करें. 
अब भगवान चित्रगुप्त का ध्यान करते हुए भगवान चित्रगुप्त मंत्र का जाप 5, 7 या 11 बार करें
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे चित्रगुप्ताय
धीमहि तन्नो चित्रगुप्त प्रचोदयात
 
इस मंत्र का जाप करने के बाद परिवार के सभी लोग मिलकर भगवान् चित्रगुप्त जी की आरती गाएं.
 
जय चित्रगुप्त यमेश तववाह शरणागतम  शरणागतम
जय पूज्य पद पद्मेश तव शरणागतम शरणागतम
 
जय देव देव दयानिधे जय दीनबन्दु कृपानिधे
कर्मेश तव धर्मेश तव शरणागतम शरणागतम 

 जय चित्र अवतारी प्रभो  जय लेखनी धारी प्रभो
जय श्याम तन चित्रेश तव शरणागतम शरणागतम
 
पुरुषादि भगवत अंश जय कायस्थ कुल अवतंश
जय जय शक्ति बुद्धि विशेष तव   शरणागतम शरणागतम
 
जय विज्ञ मंत्री धर्म के ज्ञाता शुभाशुभ कर्म के जय
शांतिमय न्यायश तव  शरणागतम शरणागतम
 
तव नाथ नाम प्रताप से छूट जाए भय
त्रय ताप से हों दूर सर्व कलेश तव शरणागतम शरणागतम
 
हों दीन अनुरागी हरी चाहे दया दृष्टि तेरी
कीजै कृपा करुणेश तव  शरणागतम शरणागत

भगवान चित्रगुप्त की आरती गाने के बाद श्रद्धा पूर्वक श्री चित्रगुप्त जी महाराज और गणेश जी महाराज से अपने और अपने परिवार के लिए मंगल आशीर्वाद की कामना करें. इसके बाद भगवान को प्रणाम करके प्रसाद का वितरण करें.