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परिवार में खुशहाली लाता है गोवत्स द्वादशी का त्योहार on 25 Oct 2019 (Friday)

हिन्दू धर्म में कईप्रकार के व्रतऔर त्यौहार मनाये जाते हैं जिनका हमारे रोज़मर्रा केजीवन पर बहुतप्रभाव पड़ता है.आज हम आपकोएक बहुत हीमहत्वपूर्ण ,प्रमुख औरपूजनीय व्रत केबारे में बताने जा रहे हैंजिसे करने सेआपके जीवन केसभी संकट दूरहो जायेंगे, आपकेजीवन में कभीभी धन कीकमी नहीं होगीऔर आपके घरमें हमेशा खुशहाली बनी रहेगी. आजहम आपको गोवत्स द्वादशी पर्व  के बारे मेंबताने जा रहेहै.

क्याहै गोवत्सद्वादशी?

  • गोवत्स द्वादशी कापर्व भाद्रपद महीने में कृष्ण पक्षकी द्वादशी तिथिको मनाया जाताहै.
  • गोवत्स द्वादशी कोबछ बारस केनाम से भीजाना जाता है.
  • गोवत्स द्वादशी मेंगाय और बछड़े की पूजा करनेका नियम है.
  • भाद्रपद महीने मेंमनाए जाने वालेइस त्यौहार कोगोवत्स द्वादशी याबछ बारस कहतेहैं.
  • ऐसा कहा जाताहै कि सालमें दूसरी बारयह त्योहार कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष में भीमनाया जाता है.
  • हमारे धर्म पुराणों में बताया गयाहै कि गौमाता में सभीतीर्थ स्थान मौजूद होते हैं.
  • हिंदू धर्म मेंगौ माता कोपूजनीय माना जाताहै.
  • हमारे धर्म पुराणों में लिखा हैकि गौ माताकी बराबरी कोईभी देवी देवता और तीर्थ नहींकर सकते हैं.
  • गौ माता कादर्शन करने सेबड़े बड़े यज्ञदान और कर्मो के बारबर पुण्य प्राप्त होता है.
  • धर्म पुराणों मेंबताया गया हैकि जब भगवान श्री कृष्ण काजन्म हुआ तबमाता यशोदा नेगौ माता कादर्शन करके उनकीपूजा की थी.
  • तभी से गोत्सव का पर्व मनाने की प्रथा चली रही है.गौ माता कोभगवान श्री कृष्ण स्वयं नंगे पांवजंगलों में जाकरचलाते थे औरउन्होंने गौ माताके नाम परही अपना नामगोपाल रखा था.
  • गौ माता कीरक्षा करने केलिए श्रीकृष्ण नेगोकुल में अवतार लिया था. इसलिए गौ माता कीरक्षा करना औरउनकी पूजा करनासभी भारतीयों काका परम कर्तव्य है.

सर्वश्रेष्ठयोनि कौनसी?

  • शास्त्रों में बताया गया है किमनुष्य योनि सभीयोनियों में श्रेष्ठ होती है. ऐसाइसलिए माना जाताहै कि गौमाता की निर्मल छाया में अपनेमनुष्य जीवन कोधन्य किया जासके.
  • गौ माता केशरीर के हररोम में देवीदेवताओं और तीर्थ स्थानों का वासहोता है.
  • इसलिए धर्म पुराणों में बताया गयाहै कि अगरआप देवी देवताओं और पितरों कोएक साथ प्रसन्न करना चाहते हैंतो गौ भक्ति, गौ सेवा सेबढ़कर कोई रास्ता नहीं है.
  • गौ माता कोएक निवाला खिलाने से वह सभीदेवी देवताओं तकस्वयं पहुंच जाताहै.
  • भविष्य पुराण मेंबताया गया हैकि गौ माताके पिछले हिस्से में ब्रह्मा जीका वास होताहै, गौ माताके गले मेंविष्णु का, मुखमें शिव जीका और मध्यस्थान में सभीदेवी देवता निवास करते हैं.
  • गौ माता केरोम कूपों मेंमहर्षि गण पूछमें अनंतनाग खुरोमें सभी पर्वत और गोमूत्र मेंपवित्र नदियां निवास करती हैं. इसीलिए बछ बारस, गोवत्स द्वादशी के दिनसभी महिलाएं अपनेपुत्रों की लंबीउम्र सलामती औरपरिवार की खुशहाली के लिए व्रतकरती हैं.
  • गोवत्स द्वादशी केदिन सभी घरोंमें बाजरे कीरोटी बनाई जातीहै. बाजरे कीरोटी के साथअंकुरित अनाज कीसब्जी बनाई जातीहै. इस दिनगाय के दूधकी जगह भैंसया बकरी केदूध का इस्तेमाल किया जाता है.

गौवत्सद्वादशी परबरसेगा धन :-

  • हमारे शास्त्रों मेंबताया गया हैकि बछ बारसके दिन जोभी महिला गौमाता की पूजा-अर्चना करती हैऔर उन्हें रोटीया हरी घासखिलाती है उनकेघर में हमेशा माँ लक्ष्मी निवास करतीं हैं औरउनके परिवार मेंकभी भी किसीव्यक्ति की अकालमृत्यु नहीं होतीहै.
  • गोवत्स द्वादशी काव्रत करने सेपरिवार पर आनेवाले सभी प्रकार के संकट टलजाते हैं.
  • कार्तिक माह कीकृष्ण पक्ष कीद्वादशी को मनाया जाने वाला गोवत्स द्वादशी का व्रतगाय और उनकेबछड़ों की सेवाका पर्व होताहै.
  • इस दिन सुबहहै के समयनित्य कर्म सेनिवृत्त होकर स्नान करने के बादगाय और उसकेबछड़े की पूजाकी जाती है.
  • इस व्रत मेंप्रदोष व्यापनी तिथिको ग्रहण करनेका नियम है.
  • अगर आपको घरके आस पासगाय या बछड़ा नहीं मिलते हैंतब आप गीलीमिट्टी से गायऔर बछड़े कीमूर्ति बनाकर उनकीपूजा कर सकतेहैं
  • गोवत्स द्वादशी केव्रत में गायके दूध यागाय के दूधसे बने बनेखाद्य पदार्थों कासेवन वर्जित होताहै.
  • गौ माता श्रीकृष्ण को सर्वाधिक प्रिय है.
  • गाय को पृथ्वी का प्रतीक मानाजाता है. गौमाता में सभीदेवी देवता निवास करते हैं.
  • गौ माता सेमिलने वाले खाद्य पदार्थ जैसे- दूधघी दही सभीचीजों का इस्तेमाल भगवान की पूजाऔर हवन मेंकिया जाता है.
  • पंचामृत में भीगाय माता केदूध, गाय केदूध से  बना दही औरगाय के घीआदि का इस्तेमाल किया जाता है|

गौवत्सद्वादशी केनियम :-

  • गोवत्स द्वादशी केदिन ब्रह्मचर्य व्रत कापालन करते हुएपृथ्वी पर सोनाचाहिए.
  • इस दिन पूरेमन से भगवान विष्णु और भगवान शिव की पूजाअर्चना करनी चाहिए.
  • जो भी व्यक्ति पूरी श्रद्धा औरआस्था के साथगोवत्स द्वादशी काव्रत करता हैउसे सभी प्रकार के सुखों कीप्राप्ति होती हैऔर उसके जीवनमें कभी भीकोई कमी नहींहोती है.
  • गोवत्स द्वादशी केदिन सुबह सूर्योदय से पहले उठकरकिसी पवित्र नदीया तालाब मेंस्नान करने केबाद साफ-सुथरे वस्त्र धारण करनेचाहिए.
  • इसके बाद पूरेसच्चे हृदय सेव्रत का संकल्प लेना चाहिए.गोवत्स द्वादशी केव्रत में सिर्फ एक समय भोजनकरने का नियमहै.
  • इस दिन गायऔर उसके बछड़े को किसी नदीया सरोवर मेंस्नान कराने केबाद नए वस्त्र पहनाए जाते हैं.
  • गाय और उसकेबछड़े के गलेमें फूलों कीमाला पहनाने केबाद चंदन सेतिलक करते हैं.
  • इसके बाद तांबे के बर्तन मेंसुगंध, अक्षत, तिल,जल और फूलों को मिलाकर नीचेबताए गए मंत्र का उच्चारण करतेहुए गाय कीपूजा करते हैं.

क्षीरोदार्णवसम्भूते सुरासुरनमस्कृते

  • इस मंत्र कोपढ़ने के बादगाय को उड़दकी दाल सेबना भोजन खिलाएं और नीचे दिएगए मंत्र कोपढ़ते हुए गौमाता से प्रार्थना करें

सुरभि त्वम् जगन्मातर्देवी विष्णुपदे स्थिता सर्वदेवमये ग्रासंमय दत्तमिमं ग्रस ततः सर्वमये देवी सरदेवैरलङ्कृते मातमरमाभिलाषितम सफलम कुरु नंदिनी

  • इस मंत्र काजाप करके पूजाकरने के बादगोवत्स की कथासुनी जाती है.
  • पूरा दिन व्रतकरने के बादरात के समयअपने इष्ट देवऔर गौ माताकी आरती करनेके बाद भोजनकिया जाता है.

गौवत्सद्वादशी कीकथा :-

गोवत्स द्वादशी के विषयमें हमारे धर्मपुराणों में कईप्रकार की बातें बताई गई हैं.गोवत्स द्वादशी कीएक कथा बहुतही प्रचलित है.इस कथा केअनुसार सबसे पहलेराजा उत्तानपाद नेपृथ्वी पर इसव्रत करने कोकरने की शुरुआत की थी. उत्तानपाद की पत्नी सुनीति ने जब इसव्रत को कियाथा तब उन्हें इस व्रत केप्रभाव से पुत्र के रूप मेंध्रुव की प्राप्ति हुई थी. इसलिए जो भी दंपत्ति संतान प्राप्ति कीइच्छा रखते हैंउन्हें गोवत्स द्वादशी का व्रत जरूरकरना चाहिए. संतान प्राप्ति की कामना रखने वाले लोगों के लिए यहफल बहुत बहुतही शुभ होताहै. जो लोगगोवत्स द्वादशी काव्रत करते हैंउन्हें इस दिनसात्विक गुणों कापालन जरूर करनाचाहिए. गोवत्स द्वादशी के दिन गौमाता के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करनेके लिए गायमाता का विधिपूर्वक पूजा पूजनकिया जाता है.जो व्यक्ति सच्चे ह्रदय और सेवाभाव से गौमाता का पूजनकरता है उसकेऊपर भगवान विष्णु की कृपा सदैवबनी रहती है.अगर आप भीसंतान प्राप्ति कीकामना रखते हैंया अपने घरमें सुख शांति और धन लानाचाहते हैं तोपुरे विधि विधान से गोवत्स द्वादशी का व्रत करें.