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कोजागर व्रत on 13 Oct 2019 (Sunday)

कोजागर व्रत आश्विन मॉस के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को किया जाता है| यह व्रत माँ लक्ष्मी की कृपा पाने व् उनको प्रसन्न करने के लिए किया जाता है| ऐसी मान्यता है की इस दिन माँ लक्ष्मी अपने भक्तों की झोलियाँ सुख व् समृद्धि से भर देती है| इस दिन को माँ लक्ष्मी जी के जन्मोत्सव के रूप में भी मनाया जाता है| ऐसी मान्यता है की सागर मंथन के दौरान ही माँ लक्ष्मी समुद्र से, शरद या कोजागर पूर्णिमा के दिन ही उत्पन हुई थी|

मिथिला व् बंगाल में कोजागर पूजा का अधिक महत्व है| बंगाल में कोजागर पूजन का दिन लक्ष्मी पूजन का डिओन मन जाट यही| जबकि दीपावली का दिन बंगाल में काली माता का पूजन का दिन मन जाता है|बिहार में कोजागर व्रत नवविवाहित जोड़े के लिए बहुत महत्वपूर्ण मन जाता है इस दिन नवविवाहित जोड़े के दोनों परिवारों के बीच उत्सव का माहौल होता है|

कोजागर पूजा की रात का बहुत अधिक महत्व है| ऐसी मान्यता है की इस रात माँ लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण के लिए आतीं है| इसीलिए इस रात किये जाने वाली पूजा व् जागरण का बहुत अधिक महत्व है|

कोजागर व्रत पूजन विधि:

  • इस दिन सूर्य उदय के पूर्व उठे व् स्नान आदि कर खुद को शुद्ध करलें|
  • इसके बाद व्रत का संकल्प करें|
  • भगवान विष्णु व् माँ लक्ष्मी के सयुंक्त पूजन के लिए उनकी मूर्ति व् चित्र की स्थापना करें|
  • विष्णु जी व् माँ लक्ष्मी को जल का छींटा दें तथा उनके चरण धोये|
  • भगवान् विष्णु को पीले वस्त्र अर्पित करें व् माँ लक्ष्मी को लाल वस्त्र अर्पित करें|
  • अब उनको लाल पीले फूलों की माला अर्पित करें|
  • उनके आगे घी का दीपक भी लगाएं|
  • उन्हें मिष्ठान आदि का भोग लगाएं|
  • उनकी स्तुति कर आरती कर सुबह की पूजा समाप्त करें|
  • अब शाम के समय चन्द्रमा को अर्घ्य दें|
  • अब माँ लक्ष्मी व् विष्णु जी के आगे घी का दीपक भी लगाएं|
  • अब रात्रि जागरण व् पूजा उपासना की तयारी करें|
  • पूरी रात जागरण कर सुबह के समय आरती कर पूजा का समापन करें|
  • अब प्रसाद का वितरण भी करें|