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मोक्षदा एकादशी on 08 Dec 2019 (Sunday)

महत्व :-
  • मोक्षदा एकादशी शुभ मुहूर्त, महत्व, पूजा विधि और कथा जानने से मनुष्य के सभी पापों का शमन होता है। 
  • मोक्षदा एकादशी के दिन भगवान श्री कृष्ण की भी पूजा की जाती है। इस दिन गीता का पाठ करना काफी शुभ रहता है। इसलिए इस एकादशी को गीता एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। 
  • मोक्षदा एकादशी का व्रत करने से मनुष्य के लिए स्वर्ग के द्वार भी खुल जाते हैं। मोक्षदा एकादशी का व्रत करने से पित्तरों को भी मुक्ति मिलती है। इसी के साथ इस एकादशी का फल मनुष्य के मरने के बाद तक रहता है।
  • शास्त्रों के अनुसार मोक्षदा एकादशी का महत्व बहुत अधिक बताया गया है। 
  • मोक्षदा एकादशी के दिन भगवान विष्णु की तुलसी की मंजरी, धूप और दीप से पूजा की जाती है। भगवान विष्णु की इस प्रकार पूजा करने से सभी सुखों की प्राप्ति है। 
  • मोक्षदा एकादशी का व्रत करने से मनुष्य को गंगा स्नान के समान फल प्राप्त होता है।
  • इस व्रत को करने से पूर्वजों को भी मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसी के साथ उनके लिए स्वर्ग के द्वार भी खुल भी जाते हैं। 
  • मोक्षदा एकादशी के दिन ही भगवान श्रीकृष्ण के मुख से श्रीमदभगवद् गीता के वचन निकले थे। इसी कारण मोक्षदा एकादशी को गीता एकादशी के नाम से भी जाना जाता है।

कब और क्यों मनाई जाती है:-
हिंदू कैलेंडर के मुताबिक चंद्र मार्गशीर्ष के महीने में चांद शुक्ल पक्ष के ११ वें दिन मोक्षदा एकादशी मनाई जाती है। वहीं, अंग्रेजी या ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार मोक्षदा एकादशी नवंबर या दिसंबर के महीने में आती है। यह व्रत मार्गशीर्ष माह के की शुक्ल पक्ष एकादशी को मनाया जाता है। इसी दिन भगवान कृष्ण ने अर्जुन को गीता का ज्ञान दिया था। इस दिन पूजा उपासना से व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति सम्भव होती है। इस दिन दान का फल अनंत गुना मात्र में प्राप्त होता है। मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी के दिन ही कुरुक्षेत्र में भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को श्रीमद्भगवद्गीता का उपदेश दिया था।

मान्यताए:-
पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक मोक्षदा एकादशी का व्रत बहुत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु की पूजा-पाठ और कीर्तन करने से पाप का नाश होता है। इसीलिए इस दिन पापों को नष्ट करने और पितरों के लिए मोक्ष के द्वार खोलने के लिए श्री हरि की तुलसी की मंजरी और धूप-दीप से पूजा की जाती है।

विधि:-
  • मोक्षदा एकादशी के लिए दशमी की रात्रि के प्रारंभ से द्वादशी की सुबह तक व्रत रखें।
  • सुबह स्नान के बाद धूप, दीप और तुलसी से भगवान विष्णु के साथ कृष्ण जी की भी पूजा करें।
  • इस दिन उपवास करने से पितरों का आशीर्वाद मिलता है। इस दिन व्रत करना सर्वोत्तम फल प्रदान करनेवाला होता है।
  • मोक्षदा एकादशी के दिन भगवान विष्णु के साथ- साथ भगवान श्री कृष्ण की भी पूजा की जाती है। 
  • मोक्षदा एकादशी के दिन भगवान विष्णु की विधिवत पूजा करें और कथा पढ़ें। 
  • सभी पूजा विधि संपन्न करने के बाद भगवान विष्णु की आरती उतारें
  • फिर आरती कर प्रसाद बांटें।  
  • पूजा के दौरान भगवान को फलाहार चढ़ाएं।
  • पूजा करने से पहले और स्नान करने के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण कर पूरे घर में गंगाजल छिड़कें।
  • भगवद्गीता का पाठ करना बेहद शुभ माना जाता| इस दिन गीता के पाठ से मुक्ति मोक्ष और शान्ति का वरदान मिलता है | गीता के पाठ से जीवन की ज्ञात अज्ञात समस्याओं से मुक्ति मिल जाती है। पूजा पाठ करने के बाद व्रत-कथा सुननी चाहिए।

कथा:-
मोक्षदा एकादशी की प्रचलित कथा के अनुसार चंपा नगरी में चारों वेदों के ज्ञाता राजा वैखानस रहा करते थे। वे बहुत ही प्रतापी और धार्मिक थे। उनकी प्रजा भी खुशहाल थी। लेकिन एक दिन राजा ने सपना देखा कि उनके पिता नरक की यातनाएं झेल रहे हैं। ये सपना देख राजा अचानक उठ गए और सपने के बारे में पत्नी को बताया। इस पर पत्नी ने राजा को आश्रम जाने की सलाह दी।

राजा आश्रम गए और वहां कई सिद्ध गुरुओं से मिले। सभी गुरु तपस्या में लीन थे। उन्हें देख राजा गुरुओं के समीप जाकर बैठ गए। राजा को देख पर्वत मुनि मुस्कुराए और आने का कारण पूछा। राजा ने बहुत ही दुखी मन से अपने सपने के बारे में उन्हें बताया। इस पर पर्वत मुनि राजा के सिर पर हाथ रखकर बोले। 'तुम एक पुण्य आत्मा हो, जो अपने पिता के दुख से इतने दुखी हो। तुम्हारे पिता को उनके कर्मों का फल मिल रहा है। उन्होंने तुम्हारी माता को तुम्हारी सौतेली माता के कारण बहुत यातनाएं दीं। इसी कारण वे पाप के भागी बने और अब नरक भोग रहे हैं।

इस बात को जान राजा ने पर्वत मुनि से इस समस्या का हल पूछा। इस पर मुनि ने उन्हें मोक्षदा एकादशी के व्रत का पालन करने को कहा। राजा ने विधि पूर्वक व्रत किया और व्रत का पुण्य अपने पिता को अर्पण कर दिया। व्रत के प्रभाव से राजा के सभी कष्ट दूर हो गए और उनके पिता को नरक से मुक्ति मिल गई।