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पद्मनाभ द्वादशी on 10 Oct 2019 (Thursday)

पद्मनाभ द्वादशी पापांकुशा एकादशी के अगले दिन मनाई जाती है|यह आश्विन मॉस के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को मनाई जाती है|इस दिन भगवान् विष्णु जी के अनंथा पदमनाभ स्वरुप की पूजा की जाती है|ऐसी मान्यता है जो भी व्यक्ति पद्मनाभ द्वादशी का व्रत करता है उसे ज़िन्दगी में सुख समृद्धि व् मोक्ष की प्राप्ति होती है|

पद्मनाभ द्वादशी का महत्व:

पद्मनाभ द्वादशी का व्रत करने से मनुष्य मुक्ति के मार्ग पर चलता है| भगवान विष्णु के भक्तो के अनुसार एकादशी व् द्वादशी के दिन व्रत करने व् भगवान पद्मनाभ का पूजन करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है| भगवान् विष्णु हीसमस्त देवो के देव है इन्ही के पूजन मात्र से मनुष्य को सांसारिक सुखो की प्राप्ति होती है| सभी भक्त एक खुशाल , स्वस्थ व् समृद्ध जीवन जीने के बाद स्वर्ग की प्राप्ति की इच्छा करते है और भगवान् विष्णु की पूजा उपासना करते है|

 पद्मनाभ द्वादशी पूजन विधि:

  • पद्मनाभ द्वादशी व्रत का वर्णन वराह पुराण में किया गया है| सभी श्रद्धालु द्वादशी के दिन सूर्य उदय से ही व्रत करते हैं|
  • इस दिन सूर्य उदय के पूर्व उठ लोग किसी पवित्र नदी या सरोवर में स्नान करते हैं| परन्तु अगर वह संभव हो तोआप घर में ही स्नान के पानी में गंगाजल मिलकर स्नान कर सकते हैं|
  • इसके पश्चात मंदिर जाएँ या घर में ही मंदिर के आगे बैठे भगवान् विष्णु जी की स्थापना करें|
  • भगवान् को जल का छींटा दें|
  • उन्हें वस्त्र व् फूल अर्पित करें|
  • उनके समक्ष धुप व् दीप भी लगाएं|
  • इस दिन लोग मंदिर जाकर भगवान् की स्तुति व् दर्शन करतीं है|
  • बहुत से मंदिरों में अलग अलग तरह के कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाता है|
  • द्वादशी तिथि की रात्रि को भजन कीर्तन व् जागरण का बहुत महत्व है|
  • इस दिन सभी लोगो को दान अवश्य करना चाहिए|

पद्मनाभ द्वादशी का व्रत करने से एक हज़ार गौ दान बराबर पुण्य मिलता है|