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पापांकुशा एकादशी on 09 Oct 2019 (Wednesday)

सबव्रतों में सर्वश्रेष्ठ व्रत है एकादशी काव्रत| एक साल मेंकुल चौबीस एकादशी होतीं हैं परन्तु अधिक मॉस में दो एकादशी औरअजाने से कुल छबीसएकादशियाँ होजाती हैं|एकादशी एक मात्र ऐसाव्रत है जो मनुष्यके सब पापो कानाश कर उसकी बुद्धिको सत्मार्ग पर चलने केलिए दिशा देता है| मनुष्य को एकादशी केव्रत से मोक्ष कीभी प्राप्ति होती है| एकादशी एक मात्र ऐसाव्रत है जिस सेमनुष्य सभी देवी देवताओं को प्रसन्न करउनकी कृपा पा लेता है|

आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को पड़ने वाली एकादशी को "पापांकुशा एकादशी" कहते है| ऐसी मान्यता है की इस एकादशी का व्रत करने से मनुष्य के जीवन में किये गए जाने अनजाने सारे पाप नष्ट होजाते है|

पापांकुशाएकादशी का महत्‍वमान्‍यताओं के अनुसार हजारोंअश्वमेघ यज्ञों और सैकड़ों सूर्ययज्ञों के बाद भीइस व्रत का 16वां भाग जितना फल भी नहींमिलता. मान्यताओं के अनुसार पुण्यकी प्राप्ति होती है| इस एकादशी काव्रत करने से मैं व्आत्मा दोनों की शुद्धि होतीहै|ऐसा कहा जाता है की एकादशीव्रत के सामान अन्यकोई व्रत नहीं है|एकादशी कीरात्रि की जागरण करनेसे मनुष्य को स्वर्ग कीप्राप्ति होती है|इस एकादशीपर विष्णु भगवान् के पद्मनाभ स्वरुपकी पूजा की जाती है|

पापांकुशा व्रतव्पूजनविधि|

  • एकादशीके दिन सूर्य उदय के पूर्व उठेऔर स्नान आदि कर खुद कोशुद्ध करें|
  • सबसे पहले भगवान् सूर्य को जल अर्पित करें|
  • अब भगवान् के आगे हाथ जोड़ कर व्रत का संकल्प लें|
  • अब एक चौकी लें उसपे पीला वस्त्र बिछाएं|
  • चौकी पर भगवान् विष्णु जी की मूर्ति या चित्र इस्थापित करें|
  • साथ में माँ लक्ष्मी जी की मूर्ति भी रखें|
  • अब भगवान् को जल का छींटा दें|
  • भगवान् को पीले वस्त्र अर्पित करें|
  • उनको तिलक करें व् पीले फूल भी अर्पित करें|
  • अब भगवान् की पूजा अर्चना करें|
  • भगवान् के आगे धुप दीप भी लगाएं|
  • संभव हो तो विष्णु सहस्त्र नाम का पाठ करें अन्यथा बहगवां विष्णु के मन्त्र ॐ नमो भगवते वासुदेवाय का क्षमता अनुसार जाप करें|
  • पापांकुशा एकादशी की व्रत कथा भी अवश्य पढ़े|
  • अब पूरा दिन व्रत करें इस व्रत की निर्जल व् फलाहार खा कर भी किया जा सकता है|

पापांकुशा व्रत कथा|

धर्मराज युधिष्ठिर कहने लगे कि हे भगवान! आश्विन शुक्ल एकादशी का क्या नाम है? अब आप कृपा करके इसकी विधि तथा फल कहिए। भगवान श्रीकृष्ण कहने लगे कि हे युधिष्ठिर! पापों का नाश करने वाली इस एकादशी का नाम पापांकुशा एकादशी है। हे राजन! इस दिन मनुष्य को विधिपूर्वक भगवान पद्‍मनाभ की पूजा करनी चाहिए। यह एकादशी मनुष्य को मनवांछित फल देकर स्वर्ग को प्राप्त कराने वाली है।

मनुष्यको बहुत दिनों तक कठोर तपस्यासे जो फल मिलताहै, वह फल भगवानगरुड़ध्वज को नमस्कार करनेसे प्राप्त हो जाता है।जो मनुष्य अज्ञानवश अनेक पाप करते हैं परंतु हरि को नमस्कार करतेहैं, वे नरक मेंनहीं जाते। विष्णु के नाम केकीर्तन मात्र से संसार केसब तीर्थों के पुण्य काफल मिल जाता है। जो मनुष्य शार्ङ्‍ग धनुषधारी भगवानविष्णु की शरण मेंजाते हैं, उन्हें कभी भी यम यातनाभोगनी नहीं पड़ती।

जोमनुष्य वैष्णव होकर शिव की और शैवहोकर विष्णु की निंदा करतेहैं, वे अवश्य नरकवासीहोते हैं। सहस्रों वाजपेय और अश्वमेध यज्ञोंसे जो फल प्राप्तहोता है, वह एकादशी केव्रत के सोलहवें भागके बराबर भी नहीं होताहै। संसार में एकादशी के बराबर कोईपुण्य नहीं। इसके बराबर पवित्र तीनों लोकों में कुछ भी नहीं। इसएकादशी के बराबर कोईव्रत नहीं। जब तक मनुष्यपद्‍मनाभ की एकादशी काव्रत नहीं करते हैं, तब तक उनकीदेह में पाप वास कर सकते हैं।

हेराजेन्द्र! यह एकादशी स्वर्ग,मोक्ष, आरोग्यता, सुंदर स्त्री तथा अन्न और धन कीदेने वाली है। एकादशी के व्रत केबराबर गंगा, गया, काशी, कुरुक्षेत्र और पुष्कर भीपुण्यवान नहीं हैं। हरिवासर तथा एकादशी का व्रत करनेऔर जागरण करने से सहज हीमें मनुष्य विष्णु पद को प्राप्तहोता है। हे युधिष्ठिर! इसव्रत के करने वालेदस पीढ़ी मातृ पक्ष, दस पीढ़ी पितृपक्ष, दस पीढ़ी स्त्रीपक्ष तथा दस पीढ़ी मित्रपक्ष का उद्धार करदेते हैं। वे दिव्य देहधारण कर चतुर्भुज रूपहो, पीतांबर पहने और हाथ मेंमाला लेकर गरुड़ पर चढ़कर विष्णुलोकको जाते हैं।

हेनृपोत्तम! बाल्यावस्था, युवावस्था और वृद्धावस्था मेंइस व्रत को करने सेपापी मनुष्य भी दुर्गति कोप्राप्त न होकर सद्‍गति को प्राप्त होताहै। आश्विन मास की शुक्ल पक्षकी इस पापांकुशा एकादशीका व्रत जो मनुष्य करतेहैं, वे अंत समयमें हरिलोक को प्राप्त होतेहैं तथा समस्त पापों से मुक्त होजाते हैं। सोना, तिल, भूमि, गौ, अन्न, जल, छतरी तथा जूती दान करने से मनुष्य यमराजको नहीं देखता।

जोमनुष्य किसी प्रकार के पुण्य कर्मकिए बिना जीवन के दिन व्यतीतकरता है, वह लोहार कीभट्टी की तरह साँसलेता हुआ निर्जीव के समान हीहै। निर्धन मनुष्यों को भी अपनीशक्ति के अनुसार दानकरना चाहिए तथा धनवालों को सरोवर, बाग,मकान आदि बनवाकर दान करना चाहिए। ऐसे मनुष्यों को यम काद्वार नहीं देखना पड़ता तथा संसार में दीर्घायु होकर धनाढ्‍य, कुलीन औररोगरहित रहते हैं।

भगवानश्रीकृष्ण ने कहा- हेराजन! जो आपने मुझसेमुझसे पूछा वह सब मैंनेआपको बतलाया। अब आपकी औरक्या सुनने की इच्छा है?