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पार्श्व एकादशी on 09 Sep 2019 (Monday)

हिन्दु धर्म में एकादशी व्रत का बहुत खास और विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन व्रत से जुड़े देवी-देवताओं की पूजा बहुत ही श्रद्धा के साथ की जाती है। इस दिन पूरे विधि और विधान से साथ व्रत रखा जाता है ताकि विशेष फल की प्राप्ति हो सके।

एकादशी का योग –

यूं तो हिंदी कैलेंडर के अनुसार एक साल में कुल 24 एकादशी का योग होता है और भक्त इस दिन व्रत रखते हैं। सभी अपनी श्रद्धा के अनुसार इस दिन व्रत रखते है। कुछ लोग अपनी मनोकामना को सफल होने हेतु किसी विशेष एकादशी के योग के दिन ही व्रत रखते हैं और पार्श्व एकादशी उन्हीं में से एक बहुत ही खास एकादशी है।

पार्श्व एकादशी और इसका महत्तव –

पार्श्व एकादशी को वामन एकादशी भी कहा जाता है। इस दिन श्रीहरि के अवतार वामन जी की पूजा की जाती है ताकि ईश्वर का आशीर्वाद प्राप्त हो सके। ऐसा माना जाता है कि वामन जी भगवान विष्णु जी  के दस अवतारों में से एक माने जाते हैं और इनकी पूजा करने से सभी प्रकार की मनोकामना पूरी हो जाती है। यह वामन एकादशी भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी है। 

कैसे करें पार्श्व एकादशी की पूजा –

ऐसा कहा जाता है कि इस दिन वामन देव की पूजा करने से आपके सभी पापों का नाश हो जाता है। आपके सभी बुरे कर्म समाप्त हो जाते है। इसीलिये इसका बहुत ही खास महत्व है। भगवान विष्णु ने वामन जी के रुप में धरती पर अवतार बुराईयों का नाश करने के लिये ही लिया था।

वामन देव की मह्त्ता-

त्रेतायुग में बलि नाम का एक दानव हुआ करता था। किन्तु दानव होते हुये भी वह हमेशा सत्यवादी और ब्राहम्णों की सेवा किया करता था। इसके अलावा हमेशा से ही यज्ञ और तप में खुद को तल्लीन भी रखता था। उसकी आस्था देखकर देवता भी उसके मुरीद हो चुके थे। अपनी तप शक्ति के आधार पर वह इन्द्र देवता के स्थान को हासिल करने की कोशिश करने लगा। किन्तु यह देवाताओं को कदाचित स्वीकार्य नहीं था। और इसीलिये सभी ने विष्णु भगवान से प्रार्थना की। इस पर भगवान विष्णु ने वामन जी के स्वरुप धारण किया और राजा बालि से तीन पग भूमि मांगी। और उसने उनकी मांग मान ली। किन्तु जब वामन जी ने अपने शरीर का आकार बढाया तो जगह कम पड़ गयी। और राजा बलि ने अपने सिर पर भगवान विष्णु का पैर ले लिया। और इस तरह से स्वर्ग पर राजा बलि के आधिपत्य ना हो सका ।

पार्श्व जंयती को मनाने के लिये कोई कठोर नियम नहीं है। भक्त अपनी श्रद्धा अनुसार रख सकते हैं। इस दिन खास तौर चावल और दही को दान करना सही माना जाता है । इसके अलावा आप तांबा या फिर इससे बनी किसी भी दातु को दान कर सकते है। ध्यान रहें की किसी भी जरुरत मंद को ही दान करें ताकि आपको विशेष फल की प्राप्ति हो सके।

और अंत में-

पार्श्व एकादशी एक बहुत ही महत्वपूर्ण त्यौहार है। इसको बहुत ही सच्चे दिल और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। पार्श्व एकादशी को ही वामन जयंती भी कहा जाता है।