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जानिए क्या है संधि पूजा का महत्त्व और पूजन विधि on 02 Feb 2020 (Sunday)

जानिए क्या है संधि पूजा का महत्त्व और पूजन विधि

संधि पूजा का महत्व-

हिन्दू धर्म में संधि पूजा को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। संधि पूजा नवरात्रि उत्सव के दौरान मनाई जाती है। इस पूजा को एक विशेष समय पर किया जाता है, अर्थात संधि पूजा उस समय के दौरान की जाती है जब अष्टमी तिथि समाप्त होकर नवमी तिथि आरम्भ होती है।अष्टमी तिथि खतम होने के दौरान आखिरी 24 मिनट और नवमी तिथि के दौरान प्रथम 24 मिनट एक साथ मिलकर संधिक्षण बनाते हैं, अर्थात ये वो समय होता है जब माँ दुर्गा ने देवी चामुंडा का अवतार धारण किया था और असुर चंड और मुंड का संघार किया था।

कब मनाई जाती है संधि पूजा-

हिंदू कैलेंडर के मुताबिक़ चैत्र नवरात्री संधि पूजा चैत्र महीने की शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को और शरद नवरात्री संधि पूजा आश्विन महीने की शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती हैं।

क्यों मनाई जाती है संधि पूजा-

मान्यताओं के अनुसार संधि पूजा का विशेष महत्व होता है। हिंदू पौराणिक कथाओं में बताया गया है की जब माँ दुर्गा असुर महिषासुर के साथ युद्ध कर रही थी, तब महिषासुर के सहयोगी चंड और मुंड ने माँ दुर्गा पर पीछे से वार किया था, पीछे से प्रहार करने के कारन माँ दुर्गा को बहुत क्रोध आया और क्रोध के कारण उनके चेहरे का रंग नीला हो गया। तब देवी ने क्रोधित होकर अपना तीसरा नेत्र खोला और चामुंडा अवतार धारण किया। माँ दुर्गा ने चामुंडा अवतार लेकर दोनों दुष्ट राक्षसों का संघार किया। तभी से इस दिन माँ दुर्गा के भयंकर अवतार, चामुंडा के सम्मान के रूप में संधि पूजा की जाती है।

संधि पूजा विधि

• संधि पूजा को बहुत ही धूम धाम और भव्य तरीके से किया जाता है। 

• संधि पूजा के दिन माँ दुर्गा के सम्मुख 108 दीये प्रज्वलित किये जाते हैं।

• इस दिन माँ दुर्गा को 108 कमल के फूल, 108 बिल्वपत्र, आभूषण, पारंपरिक वस्त्र, गुड़हल के फूल, कच्चे चावल और अनाज, एक लाल रंग का फल और माला अर्पित की जाती है। 

• संधि पूजा मन्त्र का जप करते हुए इन सभी चीजों को माँ दुर्गा के सामने अर्पित किया जाता है।

• कुछ लोग संधि पूजा के दिन माँ दुर्गा के सामने कद्दु और ककड़ी की बलि भी चढ़ाते हैं। इसके बाद मां दुर्गा के मंत्रों का जाप करके उनकी आरती की जाती है।

• वैसे सभी जगहों पर अलग अलग तरीके से संधि पूजा की जाती है। 

• संधि पूजा करते समय इस बात का हमेशा ध्यान रखे की यह पूजा तभी आरम्भ हो जब जब संधिक्षण शुरू होता है। 

• संधि पूजा का मुहूर्त किसी भी परीस्थिति और किसी भी वक़्त पर सकता है। और यह पूजा सिर्फ उसी समय की जनि चाहिए।

• कई जगहों पर संधि पूजा पर बड़े बड़े पंडाल सजाये जाते है और ढोल, नगाड़ों के साथ माँ दुर्गा की पूजा की जाती है।

• संधि पूजा को बहुत ही सम्मानित पर्व माना जाता है क्योंकि यह पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है।

  मां चामुंडा के मंत्र

ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे

क्लीं ह्रीं ऐं चामुण्डायै विच्चे

ओंम ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे 

क्लीं ऐं ह्रीं चामुण्डायै विच्चे