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सूर्यग्रहण on 03 Jul 2019 (Wednesday)

 

इस बात से कतई इंकार नही किया जा सकता कि मनुष्य जीवन पर उसके आस -पास घटने वाली सभी छोटी-बड़ी घटनाओं का बहुत ही गहरा प्रभाव पड़ता है। सूर्यग्रहण एक ऐसी ही घटना है जिससे मानव प्रभावित हुए बिना नही रह पाता।

सूर्यग्रहण का अर्थ
ज्ैासा कि हम सभी जानते है कि हमारी प्ृाथ्वी सूरज के चारों ओर घूमती है जबकि चन्द्रमा प्ृाथ्वी के चारों ओर चक्कर लगाता है। एक दूसरे की परिक्र्रमा करने के दौरान जब प्ृाथ्वी सूर्य और चन्द्रमा पंक्तिबद्ध हो जाते है और चन्द्रमा सूर्य एवं प्ृाथ्वी के बीचांेबीच स्थित होता है तो सूर्यग्रहण की स्थिति होती है। सूर्यग्रहण अमावस्या की तिथि को ही होता है।

सूर्यग्रहण के प्रकार
सूर्यग्रहण तीन प्रकार से लगता है
प्ूार्ण सूर्यग्रहण - जब चन्द्रमा प्ृाथ्वी को पूरी तरह से ढक लेता है और प्ृाथ्वी पर कुछ समय के लिए रात की तरह अंधेरा छा जाता है तो उसे पूर्ण सूर्यग्रहण कहा जाता है।
आंशिक सूर्यग्रहण - जब चन्द्रमा सूर्य के कुछ भाग को ढक लेता है तो आंशिक तौर पर सूर्यग्रहण लगता है।
वलयकार  सूर्यग्रहण - कई बार चन्द्रमा प्ृाथ्वी से काफी दूर रहते हुए प्ृाथ्वी और सूर्य के बीच में आ जाता है और धरती से देखने पर उसके आस-पास एक खुबसूरत सी रिंग बनी हुई दिखती है तो उसे वलय सूर्यग्रहण कहा जाता है।  यह नजारा ठीक वैसा ही प्रतीत होता है जैसे कि किसी सुन्दर से हीरे जड़ित कंगन को आकाश में सजा दिया गया हो।

सूर्यग्रहण का शास्त्रों की दृष्टि से महत्व
इतिहास के पन्नो में झांक कर देखें तो सूर्यग्रहण की घटना आदिकाल से ही मनुष्य के लिए चर्चा का विषय बनी रही है। प्राचीन ग्रन्थ ऋग्वेद में यह बताया गया है कि उन दिनों अचि मुनि के परिवार के पास सूर्यग्रहण की पूर्वसूचना देने का ज्ञान उपलब्ध था। रामायण और महाभारत में भी सूर्यग्रहण का उल्लेख करते स्पष्ट कहा गया है कि कई महत्वपूर्ण घटनाएं (दानवों और देवों के बीच अमृत के लिए संमुद्र मंथन, खर और दूषण का वध, जयद्रथ का वध और द्वारिका का संमुद्र में समाना आदि) जब घटी तो सूर्यग्रहण लगा हुआ था।

सूर्ययग्रहण का ज्योतिषीय महत्व
ज्योतिष विज्ञान भी सूर्यग्रहण को एक महत्वपूर्ण  घटना मानता है। ग्रह नक्षत्रों की पल-पल बदलती चाल ही व्यक्ति के भाग्य को प्रभावित नही करती अपितु सूर्य चन्द्रमा भी कुण्डली में विशेष स्थान पर विराजमान होते है। सूर्य के कमजोर या बलवान होने से जातक के जीवन पर अच्छे बुरे परिणामों का सामने आना सामान्य है। 
 
सूर्यग्रहण के समय क्या करें
शास्त्रों पुराणों में सूर्यग्रहण  के समय मनुष्य को क्या-क्या करना चाहिए इस पर विस्तार से चर्चा करते हुए बताया गया है कि ग्रहण के व्यक्ति को दान करना चाहिए, पवित्र नदियों में स्नान करना चाहिए और संभव हो तो व्रत भी रखना  चाहिए।  ग्रहण के समय विशेष रूप से शिवजी, भगवान कृष्ण और सूर्य देवता की पूजा करनी चाहिए। कृष्ण भगवान की उपासना के लिए श्री कृष्ण शरणं मम मंत्र का जाप करना चाहिए। इसी तरह शिवजी की उपासना महामृत्युजंय मंत्र से करनी चाहिए। सूर्यग्रहण के समय सूर्य की स्तुति के लिए गायत्री मंत्र का जाप अत्यधिक फलदायी होता है। ग्रहण के समय गायत्री मंत्र का जाप सभी राषि के जातकों के लिए लाभकारी है। सूर्यग्रहण के पूर्व और पश्चात यदि संभव हो तो स्नान अवश्य करना चाहिए। ग्रहण के समय पवित्र नदियों में स्नान को इसलिए महत्वपूर्ण माना गया है क्योकि हमारे शास्त्रों में ऐसा उल्लेख आता है कि भारत की इन नदियों में देवत्व की उपस्थिति आदिकाल से बनी हुई है। भगवान श्रीकृष्ण ने गीता में उपदेश देते हुए कहा कि नदियों में गंगा नदी मेरा ही स्वरूप है। यही कारण है कि सूर्यग्रहण के अवसर पर गंगा के आंचल में श्रद्धालु लाखेंा की संख्या में जमा होकर उसमें डुबकी लगाते है।  इसी प्रकार ग्रहण के समय कुरूक्षेत्र के ब्रह्य सरोवर में स्नान का भी बहुत महत्व है । ऐसा माना जाता है कि सूर्यग्रहण के दौरान यहाॅं स्नान करने से और अपने पूर्वजों का पिण्डदान करने से उन्हे मुक्ति मिलती है। भारतीय शास्त्रों में ऐसा कहा गया है कि यदि सूर्यग्रहण के वक्त ब्रह्यसरोवर में नहाया जाए तो उस स्नान से अष्वमेघ यज्ञ जितना फल प्राप्त होता है।

शास्त्रों में इस बात की पुष्टि की गई है कि  ग्रहण काल के दौरान वायुमंडल में कई प्रकार की विकृतियां विचरण करने लगती है, ये विकृतियां किसी न किसी रूप से हमारे जल व अन्न को भी प्रभावित करती है। अतः इस समय अन्न और जल में दूर्वा घास अथवा तुलसी के पत्ते रखने का विधान है। ऐसी मान्यता है कि दूर्वा घास में सभी प्रकार की विकृतियों को सोख लेने की क्षमता होती है।

सूर्यग्रहण में क्या न करें
ऐसी धार्मिक मान्यता है कि ग्रहण के समय  षयन, धािर्मक पुस्तकों को हाथ में लेना, माला जपना, नाखून काटना, भोजन बनाना या करना, बाल काटना आदि क्रियाएं नही करनी चाहिए। देष भर में ग्रहण के समय सभी मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते है और ग्रहण समाप्ति पर विषेष पूजा पाठ का आयोजन किया जाता है। ग्रहण के दौरान गर्भवती स्त्रियों को खास ध्यान रखना चाहिए उन्हे सूर्य की सीधी किरणों से बचना चाहिए। इस समय होने वाली माता को संतान गोपाल मंत्र का जाप करना चाहिए।
 
सूर्यग्रहण से जुड़़़े मिथक
जन साधारण में सूर्यग्रहण को लेकर ऐसी मान्यता है कि सूर्य ग्रहण सदा ही अमंगलकारी होता है परन्तु यह धारणा  निराधार है सूर्यग्रहण का प्रभाव अलग अलग राषियों पर भिन्न भिन्न प्रकार से पड़़ता है। राषियों पर इसके प्रभाव की बात करें ग्रहण लगने के समय ग्रह नक्षत्रों की चाल से ही इस बात का पता लगाया जा सकता है कि किस राषि पर प्रभाव अच्छा है और किसपर बुरा।