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जानिए क्या है विजया एकादशी की महिमा और पूजा विधि on 02 Mar 2019 (Saturday)

फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष एकादशी के दिन विजया एकादशी का व्रत किया जाता है. ऐसा माना जाता है कि इस दिन भगवान राम ने लंका पर विजय पाने के लिए समुद्र के किनारे बैठकर भगवान  की पूजा की थी. विजया एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है. विजया एकादशी के दिन श्रद्धा पूर्वक भगवान विष्णु की पूजा करने से सभी कार्यों में सफलता मिलती है और सभी प्रकार के दोषों का नाश हो जाता है. विजय एकादशी का व्रत करने से मनुष्य को मनचाहा वरदान मिलता है. भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी के पत्तों का इस्तेमाल जरूर करें. 

विजया एकादशी पूजा विधि :-

1- विजया एकादशी व्रत करने के लिए दशमी तिथि को कलश स्थापना करें. आप सोने, चांदी, तांबे या मिट्टी के कलश की स्थापना कर सकते हैं.

2- कलश में जल  के साथ-साथ अक्षत सुपारी और पंच पल्लव रखें. अब इसके ऊपर एक बर्तन में अक्षत भरकर भगवान विष्णु की स्थापना करें.

3- अब एकादशी के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें. स्नान करने के बाद माला, चंदन, सुपारी, नारियल, गंध और नैवेद्य से कलश की पूजा करें.

4- पूरा दिन कलश के सामने बैठकर भगवान का ध्यान करें. भगवान के सामने घी का दीपक जलाएं, पूरा दिन व्रत करने के बाद अगले दिन द्वादशी को सूर्योदय होने पर उस कलश को किसी नदी या तालाब के तट पर स्थापित कर दें और षोडशोपचार से कलश की पूजा करें.

5- अब देव प्रतिमा को किसी ब्राह्मण को दान में दे.

6- श्रीराम ने  इसी विधि से विजया एकादशी का व्रत किया और व्रत के प्रभाव से उन्होंने रावण को हराकर लंका पर विजय प्राप्त की और माता सीता को उनकी कैद से आजाद कराया. इस व्रत को करने से मनुष्य के जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं और मृत्यु के पश्चात उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है.

विजया एकादशी व्रत कथा :-

• पुराने समय में जब भगवान राम अपने पिता दशरथ की आज्ञा का पालन करने के लिए 14 वर्षो के वनवास के लिए गए थे तब वह वहां पर एक वन में सीता और लक्ष्मण के साथ रहने लगे . 

• वन में रहने के दौरान रावण ने श्री राम की पत्नी सीता का हरण किया था. उस समय अपनी पत्नी के हरण से दुखी होकर श्री राम बहुत परेशान हो गए थे.  श्री राम अपनी पत्नी सीता को जगह-जगह ढूंढ रहे थे. 

•  माता सीता को ढूंढते ढूंढते थोड़ी दूर पर श्री राम को जटायु मिले. तब श्री राम ने उनका अंतिम संस्कार किया और कमल नामक असुर का संघार किया. इसके पश्चात श्री राम की मित्रता सुग्रीव से हुई. 

• तब श्री राम ने लंका पर आक्रमण करने के लिए वानर सेना इकट्ठा की और हनुमान को माता सीता की खोज खबर लाने के लिए लंका भेजा. 

• तब हनुमान जी अशोक वाटिका गए और वहां जाकर उन्होंने माता सीता का दर्शन किया और श्रीराम की दी हुई मुद्रिका उन्हें दी. अशोक वाटिका से लौटने के पश्चात हनुमान जी ने सभी कथा श्री राम को कह सुनाया. 

• तब श्री राम लंका की ओर प्रस्थान करने के लिए तैयार हुए और समुद्र के किनारे पहुंचकर उन्होंने लक्ष्मण से पूछा कि इस समुद्र को कैसे पार किया जा सकता है. 
 
• तब लक्ष्मण जी ने कहा कि भगवान आप तो सर्वोपरि हैं. आपसे कोई भी बात छुपी नहीं है. यहां से थोड़ी दूर पर बकलाधभ्य नामक ऋषि रहते हैं वह समुद्र को पार करने का उपाय बता सकते हैं. 

• लक्ष्मण की यह बात सुनकर श्री राम ऋषि बकलाधभ्य से मिलने गए और उन्हें प्रणाम करके उनसे समुद्र पार करने का रास्ता पूछा. 

• तब ऋषि बकलाधभ्य ने कहा की हे श्रीराम फाल्गुन के कृष्ण पक्ष में विजया एकादशी आती है. इस एकादशी का व्रत करने से आपके रास्ते की समस्त बाधाएं दूर हो जाएंगी और आपको युद्ध में विजय प्राप्त होगी. 

• तब श्री राम ने ऋषि से इस व्रत को करने का विधान पूछा.  ऋषि बकलाधभ्य ने कहा श्रीराम को विजया एकादशी की पूजन विधि के बारे में विस्तार से बताया.

• तब भगवान् श्रीराम ने श्रद्धा और विधि पूर्वक विजया एकदशी का व्रत किया और व्रत के फलस्वरूप लंका पर विजय प्राप्त की.

विजया एकादशी का महत्व :-

• एक बार धर्मराज युधिष्ठिर ने कृष्ण भगवान से प्रश्न किया कि फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष में की जाने वाली विजया एकादशी को करने का क्या नियम है. 

• तब भगवान श्रीकृष्ण बोले कि  एकादशी का व्रत करने के लिए नवमी के दिन ही व्रत करने का संकल्प लेकर दशमी के दिन संयम पूर्वक रहना चाहिए और फिर एकादशी के दिन निर्जला उपवास करना चाहिए यदि आप निर्जला व्रत करने में सक्षम नहीं तो जल ग्रहण करके भी उपवास कर सकते हैं..

• विजया एकादशी व्रत सभी व्रतों में सबसे ऊपर माना जाता है. विजया एकादशी के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर भगवान विष्णु का स्मरण करके संयम और नियम धारण करके रहना चाहिए. भगवान श्री कृष्ण ने कहा कि विजया नाम वाली एकादशी सभी राजाओं को युद्ध में विजय दिलाती है.