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विनायक चतुर्थी on 06 Jun 2019 (Thursday)

विनायक या गणेश चतुर्थी एक हिंदू त्योहार है जिसे पूरे भारत में बड़े खुशी और हर्षौल्लास के साथ मनाया जाता है। गणेश चतुर्थी पूरी तरह से भगवान गणेश को समर्पित है क्यूँकि वह ज्ञान, सौभाग्य और समृद्धि का प्रतीक होने के कारण सभी देवी देवताओं सबसे महत्वपूर्ण माने जाते है। यह हिंदू माह भाद्र के शुक्ल चतुर्थी पर मनाया जाता है जो अगस्त और सितंबर के महीने के बीच आता है।
 

कैसे मनाया जाता है यह त्यौहार -

इस शुभ दिन पर, लोग अपने घर और कार्यालय में भगवान गणेश की मूर्तियों को लाते हैं। सभी तरह की प्रक्रिया का पालन करते हुए भक्त उनकी पूजा करते हैं ताकि उनके आशीर्वाद सदैव उनके साथ रहे। इस त्यौहार की अवधि 11 दिन है लेकिन इसके साथ ही यह स्थान और परंपरा के अनुसार बदलता भी रहता है। गणेश चतुर्थी के अंतिम दिन भगवान गणेश की मूर्ति को एक रंगीन और संगीतमय जुलूस के साथ निकाल जाता है।

क्या है पूजा के तरीके

भगवान गणेश का आशीर्वाद पाने के लिए सही तरह से सभी प्रकार की पूजा विधियों का पालन करना बहुत महत्वपूर्ण है। इस दिन आपको क्या करना चाहिए?  आइये पता करते हैं -

पूरे दिन भक्त उपवास करते हैं और भगवान का ध्यान करते है। यह व्रत चंद्रमा को देखने के बाद समाप्त होत हैं। गणेश चतुर्थी के दौरान केवल फलों और सब्जियों का ही सेवन करना होता है। लेकिन यदि आप सिर्फ फलाहार पर नही रह सकते है तो इसके अलावा, मूंगफली और आलू के साथ साबूदाना खिचड़ी को भी शामिल कर सकत है। 14 दिनों के उपवास के दौरान, भक्तों को खुद को नकारात्मक चीजों से दूर रखना चाहियै और अच्छी चीजों पर ध्यान देने की जरूरत है।

क्या है विनायक पूजा के लाभ:

सभी प्रकार की इच्छाओं को पूर्ति-  

यह व्रत-त्यौहार आपकी सभी प्रकार की इच्छाओं को पूरा करने में मदद करता है। आपको सिर्फ बस अपना दिल साफ रखना है। साथ ही साथ यह भी सुनिश्चित करें कि आप स्वयं को किसी भी प्रकार की नकारात्मकता से दूर रखे

मन को शांति –

यह आपके मन को शांति देता है क्योंकि आप अपने आप को अवांछित चीजों से दूर रखते है और खुद को आध्यात्मिकता में तल्लीन रखते हैं। भगवान गणेश की पूजा करने से आपकी सारी प्रकार की चिंताएं दूर हो जाती हैं। इसके अतिरिक्त आप सकारात्मकता से भर जाएंगे।

गणेश चतुर्थी कहां कहां मनाई जाती है

यह त्योहार पूरे देश में काफी लोकप्रिय है। उन प्रमुख स्थानों के बारे में बात कर रहे हैं जहां इसे मनाया जाता है जैसे - महाराष्ट्र, तमिलनाडु, कर्नाटक, केरल, गोवा, आंध्र प्रदेश आदि। महाराष्ट्र में तो इसे बड़े ही पैमाने और बड़े ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है।

गणेश चतुर्थी की उत्पत्ति क्या है -

एक बार देवी पार्वती ने भगवान शिव से "चोपड़" नामक एक खेल खेलने के लिए कहा, लेकिन वे दोनों इस उलझन में पड़ गए कि उन्हें खेल के विजेता के बारे में कौन बताएगा। भगवान शिव ने खेल का न्याय करने के लिए एक मूर्ति बनाई। खेल तीन बार खेला गया और देवी पार्वती ने हर बार खेल जीता। जब मूर्ति को विजेता की घोषणा करने के लिए कहा गया, तो उन्होंने कहा कि भगवान शिव खेल के विजेता हैं। इस परिणाम से देवी क्रोधित हो गईं और उन्होंने उन्हें पक्षपाती होने का शाप दिया। मूर्ति ने अपने व्यवहार के लिए माफी मांगी और उसे इस अभिशाप से मुक्त करने के लिए कहा। उसने कहा कि वह तभी मुक्त हो पाएगी जब "नागकन्या" द्वारा सुझाई गई गणेश चतुर्थी पूजा का पालन करें। फिर वह भगवान शिव से मिलने के लिए कैलाश पर्वत पर चला गया और उनसे इस कथा का महत्व कहा। भगवान शिव ने भी इसका पालन किया ताकी देवी पार्वती का क्रौध शांत हो क्योंकि वह भी उन पर क्रोधित थीं। उस समय से, गणेश चतुर्थी को खुशी, शांति और समस्याओं से दूर होने के लिए मनाया जाता है।

क्यों मनायें गणेश चतुर्थी -

        यह आपके घर और कार्यालय में सफलता, सुख, खुशी और समृद्धि लाता है

        इसके अलावा, यह आपको अविश्वसनीय ज्ञान और बुद्धि के साथ धन्य बनाता है।

        भगवान गणेश की पूजा के 14 दिनों करने से आप ख़ुशी और शांति पाते हैं।

        पौराणिक कथाओं के अनुसार, यह भी कहा जाता है कि यदि आप भगवान गणेश की पूजा करते हैं तो आपकी सभी समस्याएं दूर हो जाएंगी।