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जानिये क्यों मनाई जाती है यशोदा जयंती on 14 Feb 2020 (Friday)


जानिये क्यों मनाई जाती है यशोदा जयंती, क्या है इसका महत्व 

हिन्दू धर्म में यशोदा जयंती को बहुत ही महत्वपूर्ण माना गया है। यशोदा जंयती का पर्व भगवान श्री कृष्ण की माँ यशोदा के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है। ये बात तो सभी को पता है की भगवान श्री कृष्ण ने माता देवकी के गर्भ से जन्म लिया था पर इनका पालन पोषण माता यशोदा ने अपनी छत्रछाया में किया था। शास्त्रो में बताया गया है की अगर कोई स्त्री इस दिन पूरी श्रद्धा के साथ माता यशोदा और भगवान श्री कृष्ण का पूजन करती है तो उसे भगवान श्री कृष्ण के बाल रूप के दर्शन प्राप्त होते हैं। आज हम आपको इस आर्टिक्ल के माध्यम से बताने जा रहे है की इस साल यशोदा जयंती कब मनाई जाएगी और यशोदा जयंती का शुभ मुहूर्त क्या है। इस साल यशोदा जयंती का पर्व 14 फरवरी को मनाया जायेगा। 

यशोदा जयंती का महत्व-

• यशोदा जयंती का पर्व फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि के दिन मनाया जाता है। 

• यशोदा जयंती के दिन माता यशोदा की गोद  में विराजमान श्रीकृष्ण के बाल रूप और मां यशोदा की पूजा की जाती है।

• शास्त्रों में बताया गया है की इस दिन माता यशोदा और श्री कृष्ण की पूजा करने से सभी प्रकार की संतान संबंधी परेशानियां दूर हो जाती है। 

• जो भी व्यक्ति इस दिन माँ यशोदा और श्री कृष्ण की पूजा करता है उसकी सभी मनोकामना पूर्ण हो जाती है। 

• पौराणिक मान्यताओं के अनुसार अगर कोई स्त्री सच्चे मन और पूरी श्रद्धा के साथ यशोदा जयंती के दिन भगवान श्री कृष्ण और यशोदा जी की करती है तो उसे भगवान श्री कृष्ण के बाल रूप के दर्शन प्राप्त होते हैं और उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती है।

यशोदा जंयती की पूजा विधि

• यशोदा जंयती के दिन पूजा करने करने के लिए सुबह प्रातःकाल में उठकर नित्यक्रियाओं से निवृत होकर किसी पवित्र नदी में स्नान करे। 

• अगर आपके घर के आस पास कोई नदी नहीं है तो आप अपने नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर भी स्नान कर सकती है।

• स्नान करने के पश्चात् स्वच्छ और शुद्ध वस्त्र धारण करें। 

• अब एक साफ लकड़ी की चौकी लें और अब इस चौकी पर थोड़ा सा गंगाजल छिड़कर कर इसे पवित्र कर लें। 

• अब लकड़ी की चौकी पर लाल रंग का कपड़ा बिछाएं।

• अब इसके ऊपर एक कलश की स्थापना करें। 

• कलश को स्थापित करने के पश्चात् यशोदा जी की गोद में विराजमान लड्डू गोपाल की तस्वीर या मूर्ति की स्थापना करें। 

• अब मां यशोदा को लाल रंग चुनरी चढ़ाएं। अब माता यशोदा को कुमकुम, फल,फूल,मीठा रोठ, पंजीरी, माखन आदि सभी चीजें चढ़ाएं। 

• इन सभी चीजों को चढाने के पश्चात् माता यशोदा के समक्ष धूप दीप जलाएं और यशोदा माता और भगवान श्री कृष्ण की विधि विधान के साथ पूजा करें। 

• अब श्रद्धा पूर्वक यशोदा जंयती की कथा सुने और माता यशोदा और लड्डू गोपाल की आरती करें। 

• आरती करने के पश्चात् माता यशोदा को भगवान् कृष्ण को मीठे रोठ का भोग लगाएं और भगवान श्री कृष्ण को पंजीरी और माखन का भोग अर्पित करें।

• पूजा करने के पश्चात् अपने दोनों हाथ जोड़कर माता यशोदा और लड्डू गोपाल से पूजा के दौरान हुई किसी भी गलती के लिए क्षमा याचना करें। 

• माता यशोदा और लड्डू गोपाल से क्षमा याचना करने के पश्चात् स्वयं पंजीरी का प्रसाद ग्रहण करें और परिवार के सभी लोगों को प्रसाद वितरित करें।

• पूजा संपन्न करने के पश्चात् गाय को भोजन कराएं। क्योंकि शाश्त्रो के अनुसार भगवान श्री कृष्ण को गाय बहुत प्रिय हैं।

• गाय को भोजन करवाने से भगवान् कृष्ण प्रसन्न होते है और आपकी सभी मनोकामनाओं को पूरा करते हैं।

यशोदा जंयती की कथा -

पौराणिक कथा के अनुसार माता यशोदा ने भगवान विष्णु की कठोर तपस्या की थी। जिससे प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उन्हें वरदान मांगने के लिए कहा तब माता यशोदा ने कहा कि मेरी इच्छा तब ही पूर्ण होगी जब आप मुझे पुत्र रूप में मेरे घर आएंगे। इसके बाद भगवान विष्णु ने कहा कि आने वाले समय में वासुदेव और देवकी मां के घर में जन्म लूंगा। लेकिन मेरा लालन पालन आप ही करेंगी। समय बीतता गया और ऐसा ही हुआ। 

भगवान श्री कृष्ण ने देवकी और वासुदेव के यहां आठवीं संतान के रूप में पुत्र का जन्म लिया और इसके बाद वासुदेव उन्हें नदं और यशोदा के यहां छोड़ आए। जिससे उन्हें कंस के क्रोध से बचाया जा सके और उनका लालन पालन अच्छी प्रकार से हो सके। इसके बाद माता यशोदा ने कृष्ण जी का लालन पालन किया। जिसका तुलना भी नहीं की जा सकती है। माता यशोदा के विषय में श्रीमद्भागवत में कहा गया है- 'मुक्तिदाता भगवान से जो कृपाप्रसाद नन्दरानी यशोदा को मिला, वैसा ब्रह्माजी को, शंकर को, उनकी अर्धांगिनी लक्ष्मीजी को कभी प्राप्त हुआ।