Indian Festivals

भाई दूज/ भ्रातृ द्वितीय on 09 Mar 2023 (Thursday)

जानिए क्यों मनाया जाता है भाई दूज का त्यौहार 

 भ्रातृ द्वितीया का महत्व-

चैत्र कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि के दिन होली भ्रातृ द्वितीया का पर्व मनाया जाता है। हिंदू धर्म में हर साल दीपावली और होली के त्यौहार के 2 दिन के पश्चात भ्रातृ द्वितीया का पर्व मनाया जाता है। भ्रात द्वितीय का पर्व भाई और बहन के प्रेम को दर्शाता है। भ्रातृ द्वितीया तिथि पर भाई अपने घर में भोजन ग्रहण नहीं करते हैं। भाई अपनी बहन के घर जाकर उनके हाथों से बना भोजन प्रेम पूर्वक ग्रहण करते हैं। इस दिन सभी बहनें अपने भाइयों की पूजा करती है। और भाई अपनी बहनों को उपहार स्वरूप वस्त्र आभूषण इत्यादि देते हैं। यदि आपकी कोई सगी बहन नहीं है तो आप अपनी किसी भी बहन के हाथों भोजन ग्रहण कर सकते हैं। भ्रातृ द्वितीय के दिन यमराज के पूजन का भी नियम है। शास्त्रों में बताया गया है की भ्रातृ द्वितीया के दिन यमराज का पूजन करने से मृत्यु का भय समाप्त हो जाता है। 

भ्रातृ द्वितीया पूजन विधि

• शास्त्रों में बताया गया है कि यमुना अर्थात यमी यमराज की बहन थी। 

• यमी के अनुसार इस दिन सभी भाई बहनो को यमुना नदी में स्नान करना चाहिए। ऐसा करने से यमराज भी उनका कोई नुकसान नहीं कर पाते हैं। 

• भ्रातृ द्वितीया के दिन सभी बहनें अपने भाइयों के हाथो का पूजन करती हैं। 

• बहन अपने भाई के हाथों में चावल का लेप लगाकर उसके ऊपर सिंदूर लगाती हैं। 

• इसके पश्चात् बहन अपने भाई के हाथों में कद्दू के फूल, पान, सुपारी सिक्का आदि रखकर ऊपर से पानी की धार डालती है और एक विशेष श्लोक का जाप करती हैं। 

• अब बहन अपने भाई के माथे पर तिलक लगाकर उनकी आरती उतारती हैं और उनके हाथों में मौली बांधती हैं। 

• भ्रातृ द्वितीया के दिन भाइयों की पूजा करने से भाइयों की रक्षा होती है। और उन्हें लम्बी उम्र की प्राप्ति होती है। 

• भ्रातृ द्वितीय की पूजा करने से भाइयों के ऊपर यमराज का भय नहीं रहता है। 

• भ्रातृ द्वितीया के दिन शाम को यम और यमी के नाम से चौमुखी दीपक जला कर घर के बाहर रखा जाता है और यमराज का खास पूजन किया जाता है। 

• भाई दूज के दिन यमराज का विशेष पूजन करने से भाई और बहन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं और उन्हें हर कार्य में सफलता प्राप्त होती है। 

• भ्रातृ द्वितीया के दिन यमराज का का पूजन करने से सुख सुविधाओं में वृद्धि होती है। 

भ्रातृ द्वितीय के दिन करें यमराज का विशेष पूजन

• भ्रातृ द्वितीया के दिन यमराज का पूजन करने के लिए दक्षिण दिशा की ओर मुख कर बैठ जाए। 

• अब दशोपचार द्वारा यमराज का पूजन करें। 

• अब सरसों के तेल का दीपक जलाएं। 

• लोबान की धूप करें, अब यमराज को सूरमा, तेजपत्ता, लौंग,नारियल, काली मिर्च, बादाम अर्पित करें। 

• अब यमराज को रेवड़ियों का भोग लगाएं। 

• अब नीचे दिए गए मंत्र का 108 बार जाप करें।

मंत्र

ओम सूर्यपुत्राय विद्महे महाकालाय धीमहि तन्नो यमहा प्रचोदयात्

• इसके बाद यमराज को भोग में लगाई गई रेवड़ियों को प्रसाद के रूप में किसी कुंवारी कन्या को बांट दें।

भ्रातृ द्वितीया के दिन करें ये उपाय

• मृत्यु के भय से मुक्ति पाने के लिए भ्रातृ द्वितीया के दिन संध्या कार्य में दक्षिण दिशा की ओर सरसों के तेल का दो मुखी दीपक जलाएं। 

• भाई बहन की सुख सुविधाओं में बढ़ोत्तरी के लिए उनकी कलाई में सात रंगों वाली मौली बांधें। 

• भाई-बहन के सभी कष्टों और संकटो को दूर करने के लिए राई,लौंग और उड़द की दाल को मिलाकर उनके सर के ऊपर से उतार लें। अब इसे कपूर के साथ मिलाकर अग्नि में डालकर जला दें। ऐसा करने से भाई बहन के सभी कष्ट दूर हो जायेंगे।

भाई दूज की कथा:
हिंदू शास्त्रों के अनुसार सूर्य की संज्ञा से दो संतानें थीं एक पुत्र यमराज और दूसरी पुत्री यमुना. संज्ञा सूर्य का तेज सहन कर पाने के कारण अपनी छायामूर्ति का निर्माण कर उसे ही अपने पुत्र-पुत्री को सौंपकर वहां से चली गई. छाया को यम और यमुना से किसी प्रकार का लगाव था, लेकिन यम और यमुना में बहुत प्रेम था.

यमराज अपनी बहन यमुना से बहुत प्यार करते थे, लेकिन ज्यादा काम होने के कारण अपनी बहन से मिलने नहीं जा पाते. एक दिन यम अपनी बहन की नाराजगी को दूर करने के लिए मिलने चले गए. यमुना अपने भाई को देख खुश हो गईं. भाई के लिए खाना बनाया और आदर सत्कार किया.

बहन का प्यार देखकर यमराज इतने खुश हुए कि उन्होंने यमुना को खूब सारे भेंट दिए. यम जब बहन से मिलने के बाद विदा लेने लगे तो बहन यमुना से कोई भी अपनी इच्छा का वरदान मांगने के लिए कहा. यमुना ने उनके इस आग्रह को सुन कहा कि अगर आप मुझे वर देना ही चाहते हैं तो यही वर दीजिए कि आज के दिन हर साल आप मेरे यहां आएं और मेरा आतिथ्य स्वीकार करेंगे. कहा जाता है इसी के बाद हर साल भाईदूज का त्योहार मनाया जाता है.