Indian Festivals

भोगी पांडीगई on 13 Jan 2021 (Wednesday)

जानिए क्या है भोगी पांडी गई से जुड़ी परंपराएं और  मान्यताएं 

 भोगी पंडीगई का महत्व

 हमारे पूर्वजों ने बताया था कि संसार में मौजूद सभी पशु पक्षी और मनुष्य एक ही परिवार से संबंध रखते हैं. पूर्वजों द्वारा बताए गयी इस बात का एहसास हमें अलग अलग त्योहारों के द्वारा होता रहता है. भारत देश में अलग-अलग त्योहार मनाए जाते हैं. इन सभी त्योहारों में से एक है संक्रांति का त्यौहार….. दक्षिण भारत में इस त्योहार को अलग-अलग रूपों में मनाया जाता है. उत्तर भारत में इसे खिचड़ी के रूप में मनाया जाता है और तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में इसे संक्रांति कहा जाता है. तमिलनाडु में इस त्यौहार को पोंगल कहते हैं. संक्रांति अर्थात सूरज का एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करना…. सूर्य के एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करने की प्रक्रिया को पोंगल अर्थात भोगी पांडिगई  कहतेहैं. इसी प्रक्रिया को संक्रांति भी कहा जाता है

 भोगी पांडिगई से जुडी खास बातें-

 हर साल जब सूर्य उत्तरायण होता है तब यह त्यौहार 4 दिनों तक मनाया जाता है.

मकर संक्रांति और लोहड़ी की तरह भोगी पांडीगई भी मुख्य रूप से खेती और फसलों से जुड़े त्यौहार है.

भोगी पंडीगई का त्यौहार आस्था और संपन्नता के लिए मनाया जाता है.

तमिलनाडु में इस त्योहार को 4 दिनों तक मनाया जाता है.

हर दिन पोंगल का अलग-अलग नाम होता है.

पहले दिन भोगी पोंगल, दूसरे दिन सूर्य पोंगल, तीसरे दिन मट्टू पोंगल और चौथे दिन को कन्या पोंगल कहा जाता है.

भोगी पोंगल से ही भोगी पंडीगई त्यौहार का आरंभ होता है. भोगी पांडे गई त्योहार खास रूप से देवराज इंद्र को समर्पित होता है.

देवराज इंद्र भोग विलास में लिप्त रहने वाले देवता माने जाते हैं. इसीलिए इस त्यौहार को भोगी पांडीगई कहा जाता है.

इसके अलावा अच्छी बारिश और अच्छी फसल के भी इंद्रेदेव का पूजन किया जाता है.

 कैसे मनाते हैं भोगी पंडीगई का त्यौहार-

 भोगी पंडीगई के दिन शाम के समय लोग अपने अपने घर से पुराने कपड़े और पुरानी और बेकार चीजे लाकर एक जगह एकत्रित करके उन्हें जलाते हैं.

यह रस्म भगवान के प्रति सम्मान और बुराइयों का अंत करने की भावना को दर्शाने के लिए निभायी जाती है.

इस दिन युवा वर्ग पूरी रात अग्नि के चारों तरफ कोट्टम वाद्य यंत्र बजाते हुए लोकगीत गाते हैं.

भोगी पंडीगई की पूजा में पशुओं फसलों और खेतों की पूजा करने का भी नियम है.

तमिलनाडु में भोगी पांडीगई के दिन से ही नए साल की शुरुआत होती है.

इस दिन यहां पर सभी लोग अपने अपने घरों को फूल और आम के पत्तों के तोरण से सजाते हैं और साथ ही घर के मुख्य द्वार पर खूबसूरत रंगोली बनाते हैं और साथ ही नए वस्त्र भी पहनते हैं

भोगी पंडीगई त्योहार का इतिहास लगभग 1000 वर्ष पुराना माना जाता है.

भोगी पंडीगई का त्यौहार तमिलनाडु के साथ-साथ श्रीलंका, मलेशिया, मॉरीशस आदि जगहों पर भी मनाया जाता है.

भोगी पांडीगई के दिन सूर्य देवता को जो प्रसाद चढ़ाया जाता है उसे पगल कहते हैं. पगल शब्द से ही पोंगल शब्द का निर्माण हुआ है.

इसीलिए इस त्यौहार को भोगी पोंगल कहा जाता है. पगल गुण और चावल से बनाया जाता है.