Indian Festivals

चतुर्थ नवदुर्गा स्वारूप - माँ कुष्मांडा on 15 Feb 2021 (Monday)

गुप्त नवरात्रि के चौथे दिन करें मां कुष्मांडा की पूजा 

गुप्त नवरात्री में माँ कुष्मांडा की पूजा का महत्व-

गुप्त नवरात्री के चौथे दिन माँ कुष्मांडा की पूजा करने का नियम है। गुप्त नवरात्रि के चौथे दिन विधि विधान के साथ मां दुर्गा के कुष्मांडा स्वरूप की पूजा-अर्चना की जाती है। शास्त्रों में बताया गया है की मां कुष्मांडा संसार को सभी कष्टों और विपदाओं से मुक्ति दिलाती हैं। माँ कुष्मांडा अपने भक्तों के समस्त दुखों को दूर करके उन्हें सुख और समृद्धि प्रदान करती हैं। माँ कुष्मांडा को लाल रंग के पुष्प बहुत प्रिय है, माँ कुष्मांडा को पूजा के दौरान आप गुड़हल का पुष्प अर्पित कर सकते हैं।  विधि विधान के साथ माँ कुष्मांडा की पूजा करने के बाद दुर्गा चालीसा और मां दुर्गा की आरती जरूर करें। मां कुष्मांडा के अंदर पूरा ब्रह्माण्ड समाहित है। वह संसार में मौजूद सभी प्राणियों को ऊर्जा प्रदान करती हैं। माँ कुष्मांडा की पूजा करने के पश्चात् आप मां के सामने अपनी मनोकामनाएं प्रकट कर दें और पूजा के दौरान हुई गलतियों के लिए माँ से क्षमा प्रार्थना कर लें।

कुष्मांडा का अर्थ

• कुष्मांडा अर्थात कुम्हड़ा। मां दुर्गा ने राक्षसों के अत्याचार से संसार को मुक्ति दिलाने के लिए कुष्मांडा अवतार लिया था। 

• शास्त्रों में बताया गया है की माँ कुष्मांडा ने पूरे ब्रह्माण्ड की रचना की है। 

• ऐसा माना जाता है की माँ कुष्मांडा की पूजा के दौरान अगर कुम्हड़े की बलि दी जाए तो वे बहुत प्रसन्न होती हैं। 

• ब्रह्माण्ड और कुम्हड़े से उनका जुड़ाव होने की वजह से उन्हें कुष्मांडा के नाम जाना जाता हैं। 

• माँ कूष्मांडा की उपासना करने से मनुष्य को सभी प्रकार के रोगो और शोकों से मुक्ति मिलती है। 

• इसके अलावा मां कुष्मांडा की पूजा करने से आयु, यश, बल और स्वास्थ्य समृद्धि की प्राप्ति होती है।जो लोग अधिकतर बीमार रहते हैं उन्हें देवी कूष्मांडा की पूजा पुरे श्रद्धा भाव के साथ करनी चाहिए।

मां कुष्मांडा का स्वरूप 

• मां कुष्मांडा को अष्टभुजा के नाम से भी जाना जाता है

• माँ कुष्मांडा की आठ भुजाएं हैं. ये अपने हाथों में  धनुष, बाण, चक्र, गदा, अमृत कलश, कमल और कमंडल धारण करती है

• वहीं ये अपने हाथों में सिद्धियों और निधियों से युक्त जप की माला भी धारण करती हैं. माता कुष्मांडा की सवारी सिंह हैं.

मंत्र 

देवी कूष्माण्डायै नमः॥

स्तुति

या देवी सर्वभूतेषु माँ कूष्माण्डा रूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

पूजा विधि

• गुप्त नवरात्रि के चौथे दिन प्रात:काल स्नान करने के पश्चात् मां दुर्गा के कुष्मांडा स्वरूप की विधि विधान से पूजा करें

• पूजा में मां कुष्मांडा को लाल रंग का पुष्प, गुड़हल या गुलाब, सिंदूर, धूप, गंध, अक्षत् चढ़ाएं.

• इसके पश्चात् माँ के सामने  सफेद कुम्हड़े की बलि अर्पित करें

• अब माँ को दही और हलवा का भोग लगाएं.