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नवदुर्गा पांचवा स्वरूप - स्कंदमाता| on 16 Feb 2021 (Tuesday)

गुप्त नवरात्रि के पांचवे दिन इन तरीको से करे माँ  स्कंदमाता की पूजा, होगा बुद्धि का विकास


नवरात्री के पांचवें दिन माँ स्कंदमाता की पूजा का महत्व -

माँ स्कंदमाता को सूर्यमंडल की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है. नवरात्री के पांचवे दिन श्रद्धा पूर्वक मां स्कंदमाता की पूजा करने से संतान सुख की प्राप्ति होती है. शास्त्रों में मां स्कंदमाता को प्रथम प्रसूता महिला भी माना गया है. मान्यताओं के अनुसार मां स्कंदमाता अपने सभी भक्तों की रक्षा अपने पुत्र के समान करती हैंगुप्त नवरात्रि के पांचवें दिन श्रद्धा पूर्वक मां स्कंदमाता की पूजा अर्चना की जाती है. भगवान स्कंद कुमार कार्तिकेय की माता होने की वजह से इन्हें स्कंदमाता कहा जाता है. नवरात्रि की पंचमी तिथि को माँ स्कंदमाता की पूजा विशेष रूप से फलदायक होती है. गुप्त नवरात्री के पांचवे दिन साधक का मन पूरी तरह से विशुद्ध चक्र में अवस्थित होना चाहिए जिससे कि उसका ध्यान पूरी तरह से एकाग्र हो सके

मां स्कंदमाता का स्वरूप – 

माता स्कंदमाता शेर पर विराजमान रहती हैं

• माँ स्कंदमाता की चार भुजाएं हैं

• माँ अपने दांये हाथ की ऊपर वाली भुजा में स्कंद को गोद में लिए हुए हैं

• माँ अपने नीचे वाले हाथ में कमल का पुष्प धारण करती हैं

• मां स्कंदमाता का ये स्वरूप सभी भक्तों का कल्याण करता है

गुप्त नवरात्री में माँ स्कंदमाता की पूजा के लाभ-

• गुप्त नवरात्री के पांचवे दिन माँ स्कंदमाता की पूजा करने से  बुद्धि का विकास होता है और साथ ही ज्ञान का आशीर्वाद प्राप्त होता है

• मां स्कंदमाता की पूजा करने से परिवार में हमेशा शांति बनी रहती है

• मां स्कंदमाता की आराधना करने से मनुष्य को शुभता की प्राप्ति होती है

• माँ स्कंदमाता की पूजा हमेशा दिन के दूसरे  पहर में करनी चाहिए.

• माँ की पूजा हमेशा चंपा के फूलों से करनी चाहिए

• माँ स्कंदमाता की पूजा करने के बाद मूंग से बना प्रसाद चढ़ाना चाहिए.

• माता को श्रृंगार में हरे रंग की चूडियां अर्पित करनी चाहिए

• माँ स्कंदमाता की पूजा करने से मंदबुद्धि व्यक्ति भी बुद्धिमान हो जाता है, परिवार में खुशहाली आती है.

• माँ स्कंदमाता की पूजा करने से रोगियों को रोगों से मुक्ति मिलती है तथा सभी बीमारियों का अंत होता है

• जिन लोगों की आजीविका का संबंध मैनेजमेंट, वाणिज्य, बैंकिंग अथवा व्यापार से है  उनके लिए माँ स्कंदमाता की पूजा बहुत लाभदायक होती है.

• मां स्कंदमाता को केले का प्रसाद बहुत पसंद है. इसके अलावा माँ केसर डालकर खीर का प्रसाद भी चदया जा सकता है

• शास्त्रों के अनुसार मां स्कंदमाता की पूजा करने से मनुष्य के मन की सभी कुंठाएं जीवन-कलह और द्वेष भाव खत्म हो जाते है

• माँ स्कंदमाता की पूजा करने से मनुष्य मृत्यु लोक में ही स्वर्ग लोक की तरह परम शांति एवं सुख का अनुभव प्राप्त करके अंत में मोक्ष को प्राप्त करता है

• माँ स्कंदमाता की साधना करने से मोक्ष का मार्ग अपने आप ही खुल जाता है.


माँ स्कंदमाता पूजन विधि-

गुप्त नवरात्री के पांचवे दिन माँ स्कंदमाता की पूजा करने के लिए सबसे पहले स्नान करने के पश्चात स्वच्छ वस्त्र धारण करके पूजा के कमरे में बैठे.

• अब अपने सामने एक लकड़ी की चौकी रखें. अब इस चौकी को गंगाजल छिड़ककर शुद्ध कर लें.

• अब चौकी पर माँ स्कंदमाता की प्रतिमा या तस्वीर की स्थापना करें

• अब चौकी पर चांदी, तांबे या मिट्टी के कलश में जल भरकर उसके ऊपर नारियल रखकर स्थापित करें. अब चौकी पर कलश के साथ श्रीगणेश, वरुण, नवग्रह, षोडश मातृका, सप्त घृत मातृका(सात सिंदूर की बिंदी लगाएं) को भी स्थापित करें.

•अब व्रत, और पूजा का संकल्प करें और वैदिक एवं सप्तशती मंत्रों द्वारा स्कंदमाता के साथ साथ सभी स्थापित देवताओं की षोडशोपचार के द्वारा पूजा करें

• अब आवाहन, आसन, पाद्य, अर्ध्य, आचमन, स्नान, वस्त्र, सौभाग्य सूत्र द्वारा माँ की पूजा करें.

• अब माँ को चंदन, रोली, हल्दी, सिंदूर, दुर्वा, बिल्वपत्र, आभूषण, पुष्प-हार, सुगंधित द्रव्य अर्पित करें.

• अब माँ के सामने घी का दीपक जलाएं. अब माँ को नैवेद्य, फल, पान, दक्षिणा, अर्पित करें. अंत में माँ की आरती करने के पश्चात् परिक्रमा मंत्र पुष्पांजलि आदि करें

• पूजा सम्पन्न होने के पश्चात प्रसाद वितरण कर पूजन संपन्न करें.


ध्यान मंत्र


सिंहासनगता नित्यं पद्मातकरद्वया।

शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी॥