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ललिता पंचमी on 10 Oct 2021 (Sunday)

ललिता पंचमी महत्व
ललिता पंचमी के दिन देवी ललिता के लिए व्रत व् पूजन किया जाता है| इसे उपांग ललिता व्रत के नाम से भी जाना जाता है| यह व्रत शरद नवरात्री के पंचमी तिथि को किया जाता है| इन्हे त्रिपुरा सुंदरी और षोडशी के नाम से भी जाना जाता है| ललिता देवी माता सती पार्वती का ही एक रूप हैं। आदि शक्ति माँ ललिता दस महाविद्याओं में से एक हैं| यह व्रत बहुत शुभ फल देने वाला है|पौराणिक मान्यता के अनुसार इस दिन माता ललिता कामदेव के शरीर की राख से उत्पन्न हुए 'भांडा' नामक राक्षस को मारने के लिए प्रकट हुई थीं।
 
क्यों कहलातीं है ये देवी माँ "ललिता"?
पुराणों के अनुसार जब माता सती अपने पिता दक्ष द्वारा अपमान किए जाने पर यज्ञ अग्नि में अपने प्राण त्‍याग देती हैं तब भगवान शिव उनके शरीर को उठाए घूमने लगते हैं, ऐसे में पूरी धरती पर हाहाकार मच जाता है। जब विष्‍णु भगवान अपने सुदर्शन चक्र से माता सती की देह को विभाजित करते हैं, तब भगवान शंकर को हृदय में धारण करने पर इन्हें 'ललिता' के नाम से पुकारा जाने लगा।
 
कैसा है माँ ललिता का स्वरुप?
कालिका पुराण के अनुसार देवी ललिता की दो भुजाएं हैं। यह माता गौर वर्ण होकर रक्तिम कमल पर विराजित हैं। दक्षिणमार्गी शाक्तों के मतानुसार देवी ललिता को 'चण्डी' का स्थान प्राप्त है। इनकी पूजा पद्धति देवी चण्डी के समान ही है।
 
देवी माँ ललिता की पूजा उपासना
  1. सूर्य उदय के पूर्व उठ स्नान कर खुद को शुद्ध करलें|
  2. सूर्य को जल अर्पित करें|
  3. एक चौकी पर लाल कपडा बिछाएं और उसे जल का छींटा दें|
  4. अब माँ ललिता की मूर्ति या चित्र स्थापित करें|
  5. उन्हें भी जल का छींटा दें और चरण धोएं|
  6. अब माँ को श्रृंगार की वस्तुएं अर्पित करें|
  7. माँ ललिता को लाल पीले फूलों की माला भी अर्पित करें|
  8. उनके आगे घी का एक मुखी दीपक लगाएं|
  9. उनकी चालीसा से शुरू कर आरती के साथ अपनी पूजा समापन करें|
  10. माँ ललिता को मिष्ठान व् फल आदि का भोग लगाएं|