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नवदुर्गा दूसरा स्वरुप - माँ ब्रह्मचारिणी on 13 Feb 2021 (Saturday)

गुप्त नवरात्र के दूसरे दिन करें माँ दुर्गा के ब्रह्मचारिणी स्वरुप की पूजा 

गुप्त नवरात्र के दूसरे दिन का महत्व-

गुप्त नवरात्र के दूसरे दिन माँ दुर्गा के ब्रह्मचारिणी स्वरूप की पूजा-अर्चना की जाती है. इस दिन व्यक्ति पूर्ण रूप से अपना ध्यान माँ के चरणों में लगाते हैं. ब्रह्म का अर्थ होता है तपस्या और चारिणी का अर्थ होता है आचरण करने वाली अर्थात ब्रह्मचारिणी का अर्थ होता है तप का आचरण करने वाली. माँ ब्रम्ह्चारिणी अपने दाहिने हाथ में जप की माला और बाएँ हाथ में कमण्डल धारण करती है. गुप्त नवरात्री के दूसरे दिन मनुष्य कुंडलिनी शक्ति को जागृत करने के लिए भी तप करते हैं जिससे उनका जीवन सफल और खुशहाल हो सके और वो अपने जीवन में आने वाली किसी भी समस्या का सामना आसानी से कर सकें. गुप्त नवरात्र में माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों के साथ साथ दस महाविद्याओं की भी खास पूजा की जाती है. इन दस महाविद्या के नाम हैं काली, तारा, त्रिपुर सुंदरी, भुनेश्वरी, छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला.

गुप्त नवरात्री के दूसरे दिन ऐसे करे माँ ब्रहचारिणी की पूजा  

• सबसे पहले आपने जिन देवी-देवताओ गणों और योगिनियों को कलश में आमत्रित किया है उन सभी की फूल, अक्षत, रोली, चंदन से श्रद्धा पूर्वक पूजा करें.

• अब इन्हे दूध, दही, शर्करा, घृत, मधु अर्पित कर स्नान करायें और माँ ब्रम्ह्चारिणी को जो कुछ भी भोग अर्पित कर रहे हैं उसमें से एक भाग इन्हें भी अर्पित करें

• प्रसाद चढाने के बाद आचमन करे और उसके पश्चात् पान, सुपारी अर्पित करें. अब इनकी परिक्रमा करें

• कलश देवता की पूजा करने के बाद इसी विधि से नवग्रह, दशदिक्पाल, नगर देवता, ग्राम देवता, की श्रद्धा पूर्वक पूजा करें. इन सभी की पूजा के बाद मॉ ब्रह्मचारिणी का पूजन करें.

• माँ ब्रहचारिणी की पूजा करते समय सर्वप्रथम अपने हाथों में एक फूल लेकर माँ से सच्चे हृदय से प्रार्थना करें 

• अब माँ ब्रम्ह्चारिणी को पंचामृत अर्पित करे और अलग अलग प्रकार के फूल, अक्षत, कुमकुम, सिन्दुर, से माँ की पूजा करे. माँ दुर्गा को गुड़हल और कमल का फूल बहुत प्रिय होता है इसलिए माँ को गुड़हल और कमल के फूलों की  माला पहनायें

• अब प्रसाद और आचमन करने के बाद पान सुपारी चढ़ा कर घी कपूर से माँ आरती करें

• गुप्त नवरात्रि के दूसरे दिन मंत्रो के द्वारा माँ ब्रह्मचारिणी का ध्यान, ब्रह्मचारिणी की स्तोत्र पाठ एवं ब्रह्मचारिणी के कवच का पाठ अवश्य करे.

• माँ ब्रम्ह्चारिणी की पूजा करते वक़्त सर्वप्रथम अपने हाथों में फूल लेकर सच्चे मन से माँ की प्रार्थना करें

या देवी सर्वभूतेषु माँ ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

• अर्थ : हे माँ! सभी जगहों पर विराजमान और ब्रह्मचारिणी के रूप में प्रसिद्ध माँ अम्बे, हम आपको बार-बार प्रणाम करते है, या मैं आपको बारंबार प्रणाम करता हूँ

माँ ब्रम्ह्चारिणी की पूजा में अवश्य ध्यान रखें ये बातें 

• गुप्त नवरात्री में मां ब्रम्ह्चारिणी की पूजा करते हैं, उन्हें गलत और अधार्मिक कार्य नहीं करने चाहिए 

• साफ-सफाई का खास ध्यान रखना चाहिए 

• सभी भक्तो को ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करना चाहिए 

• जो लोग इस दिन व्रत करते हैं उन्हें फलाहार लेना चाहिए अपने माता-पिता का अनादर नहीं करना चाहिए 

• महिलाओं का सम्मान करना चाहिए, नहीं तो आपकी पूजा-पाठ निष्फल हो जाएगी