Indian Festivals

श्राद्ध कर्म के दौरान ज़रूर ध्यान रखें ये बातें

श्राद्ध के दौरान पितरों को याद किया जाता है, और उनकी आत्मा की शांति के लिए तर्पण किया जाता है.  शास्त्रों में बताया गया है कि श्राद्ध पक्ष के समय सूर्य दक्षिणायन होता है. जिसकी वजह से आत्माओं की मुक्ति का मार्ग खुल जाता है. अगर इस दौरान श्राद्ध कर्म नियम पूर्वक किया जाए तो प्रेत योनि में भटक रही आत्माओं को मुक्ति मिलती है और वह अगले चरण तक आसानी से पहुंच जाती हैं. श्राद्ध कर्म करने के लिए कई नियमों का पालन किया जाता है. शास्त्रों के अनुसार कई कार्य ऐसे हैं जिन्हें श्राद्ध के दौरान करना मना होता है. अगर कोई व्यक्ति इन नियमों का पालन ना करें तो उसे कई समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है. 
 
श्राद्ध में क्या करें- 
  • किसी भी कार्य को सफल बनाने के लिए या मन वांछित फल पाने के लिए यज्ञ करने की प्रथा प्राचीन काल से चली आ रही है. यज्ञ और हवन करवाने के लिए हमेशा शास्त्रों का ज्ञानी और कुशल ब्राह्मण चुनना चाहिए.
  • घर में पूजा पाठ यज्ञ और हवन कराने से घर का वातावरण शुद्ध हो जाता है. इस बात का हमेशा ध्यान रखना चाहिए कि यज्ञ और हवन के दौरान बात नहीं करनी चाहिए.
  • श्राद्ध विधि में मंत्रों का बहुत महत्व होता है. अगर आप श्राद्ध के दौरान सही मंत्रों का जाप नहीं करते हैं तो श्राद्ध में किया गया दान बेकार हो जाता है. श्राद्ध कर्म के दौरान  जमीन पर तिल बिखेर कर रक्षक मंत्र का जाप करना चाहिए. 
  • यज्ञेश्वरो यञसमस्तनेता भोक्तव्यात्मा हरीश्वरस्तु तत्सनिधानादपयान्तु सद्यो रक्षांस्याशे शान्यसूराश्च सर्वे  
  • इस मंत्र का जाप करने से श्राद्ध कर्म में मौजूद राक्षस और बुरी आत्माएं वहां से चले जाते हैं. यदि घर में किसी का जन्म या मृत्यु हुई है तो ब्राम्हण 10 दिनों में, क्षत्रिय 12 दिनों में, वैश्य 15 दिनों में और शूद्र का एक माह में शुद्धिकरण होता है. 
  • पितरों को संतुष्ट करने के लिए अलग-अलग पित्र कर्म के नियम है. एको दृष्टि श्राद्ध, पावार्थ श्राद्ध , नागवली कर्म, नारायण बलि श्राद्ध कर्म, त्रिपिंडी श्राद्ध, महालय श्राद्ध पक्ष में श्राद्ध कर्म. इसके अलावा पितरों को प्रसन्न करने के लिए नांदी श्राद्ध का भी नियम है. 
  • अगर आपके परिवार में किसी व्यक्ति की मृत्यु हो गई है और आपको उसका श्राद्ध करना है तो उस व्यक्ति की मृत्यु की तिथि वाले दिन ब्राह्मणों को सात्विक भोजन कराकर दान देना चाहिए. 
  • यदि आप ब्राह्मणों को भोजन नहीं करवा सकते हैं तो अपनी क्षमता अनुसार एक थाली में आटा, चावल, दाल, घी, नमक, गुड और कुछ मीठा रखकर किसी मंदिर में दान कर दे. 
  • माता पिता की पुण्यतिथि के मध्यान काल में पुत्र को श्राद्ध करना चाहिए. यदि किसी स्त्री के कोई पुत्र नहीं है तो वह खुद अपने पति का श्राद्ध कर्म कर सकती है. 
  • महालय श्राद्ध पक्ष में पितरों को प्रसन्न करने के लिए भोजन में सबसे पहले गाय, कुत्ते और कौए के लिए भोजन निकालना चाहिए. उसके बाद ब्राह्मणों को भोजन करवाकर क्षमता अनुसार दान दक्षिणा देनी चाहिए. उसके बाद स्वयं भोजन ग्रहण करना चाहिए. 
  • यदि आप किसी तीर्थ स्थान नदी या संगम पर नहीं जा सकते हैं तो आप नीचे दिए गए नियमों का पालन करके घर पर ही श्राद्ध कर्म कर सकते हैं. 
  • रोजाना खीर बनाएं. गाय के गोबर के कंडे को जलाकर बर्तन में रखें. अब इसे किसी शुद्ध स्थान पर रखकर खीर से • तीन बार आहुति दें. इसके पास में एक जल से भरा हुआ तांबे का बर्तन रखें. जल को अगले दिन किसी पेड़ की जड़ में समर्पित कर दें.
श्राद्ध में क्या ना करें :-
  • वायु पुराण में बताया गया है कि शाम के समय श्राद्ध कर्म नहीं करना चाहिए. क्योंकि शाम का समय राक्षसों का होता है. हमेशा दोपहर के समय ही श्राद्ध करना चाहिए.
  • कभी भी श्राद्ध कर्म  दूसरे की जमीन पर नहीं करना चाहिए. अपनी जमीन पर किया गया श्राद्ध अति उत्तम होता है. 
  • श्राद्ध कर्म करते समय बिना नमक का भोजन और शाक से हवन कुंड में तीन बार आहुति देनी चाहिए. 
  • श्राद्ध कर्म करते समय साफ सफाई का विशेष ध्यान रखें, क्रोध ना करें और श्राद्ध करते समय जल्दबाजी ना करें.धैर्य पूर्वक पूजा पाठ करें. 
  • श्राद्ध में चना, मसूर, उड़द, सत्तू, मूली, काला जीरा, कचनार, खीरा, काला नमक, लोकी, बड़ी सरसों, काली सरसों की पत्ती और बासी अन्न निषेध माना जाता है