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विशु कानी on 14 Apr 2020 (Tuesday)

विशु कानी 

क्या है विशु कानी

केरल राज्य में मलयालम महीने मेष संक्रांति के दिन विशु कानी का पर्व मनाया जाता है. केरल में रहने वाले लोग इस त्योहार को नव वर्ष के रूप में मनाते हैं. यह पर्व वैशाखी बिहू और पोहिला वैशाख की तरह ही मनाया जाता है. विशु कानी के पर्व के द्वारा मलयाली लोग ज्योतिष नववर्ष का स्वागत करते हैं. पंजाब में इस पर्व के पश्चात ही गेहूं की फसल को काटना शुरू किया जाता है

विशु कानी का महत्व

मलयाली लोगों के लिए विशु कानी का पर्व बहुत ही महत्वपूर्ण होता है. पूरे देश में इस पर्व को खरीफ की फसल पकने की खुशी के रूप में मनाया जाता है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब सूर्य अश्विनी नक्षत्र में प्रवेश करता है तो राशि चक्र में बदलाव आना आरम्भ हो जाता है और नववर्ष की शुरुआत होती है. मान्यताओं के अनुसार विशु कानी के दिन सूर्य भूमध्य रेखा से ऊपर होता है. हमारे शास्त्रों में बताया गया है कि इस समय भगवान विष्णु और उनके अवतार भगवान श्री कृष्ण की पूजा करने का नियम है. भगवान विष्णु को समय का देवता माना जाता है. क्योंकि भगवान विष्णु खगोलीय वर्ष के पहले दिन को चिन्हित करते हैं. जिसकी वजह से इस दिन लोग भगवान विष्णु की पूजा करते हैं. मान्यताओं के अनुसार विशु कानी के दिन ही भगवान श्री कृष्ण ने नरकासुर नाम के राक्षस का वध किया था

मान्यताओं के अनुसार विशु कानी

• विशु कानी के पर्व के दिन भगवान श्री राम ने रावण का वध किया था

• इसके पश्चात ही सूर्य देव ने पूर्व की ओर बढ़ने की हिम्मत की थी जिसकी वजह से इस त्यौहार को पूर्व में ही मनाया जाता है.

• केरल राज्य के सभी हिस्सों में विषु कानि का पर्व बहुत ही हर्षोउल्लास और धूमधाम के साथ मनाया जाता है

• विषु कानि पर्व के दिन विषुक्कणी  अनुष्ठान किया जाता है. यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण अनुष्ठान होता है.

• विषुक्कणी का अर्थ होता विषु कानि के दिवस उषाकाल में सबसे शुभः वस्तु का दर्शन करना, जिसके असर से पुरे वर्ष भर सुखः सौभाग्य कायम रहता है.

• विषु कानि पर्व के दिन एक अन्य अनुष्ठान विषुकैनीट्टम  किया जाता है. विषुकैनीट्टम का अर्थ होता है, परिवार के बुज़ुर्गो के द्वारा बच्चों, सेवकों तथा किरायेदारों को उपहार में धन प्रदान करना.

• विषु कानि के पर्व के दिन सामूहिक भोज भी आयोजित किया जाता है

• विशु कानि के भोज में नमकीन, मीठे, खट्टे तथा कड़वे व्यंजनों को समान मात्रा में शामिल किया है

• विषु कानि पर्व के दिन दो विशेष प्रकार के व्यंजन अवश्य बनाये जाते हैं, पहला वेप्पमपूरासम (नीम से बना एक कड़वा व्यञ्जन) है तथा दूसरा मांगा पचड़ी (कच्चे आम की चटनी).

विशु कानि से जुडी विशेष बाते-

• मान्यताओं के अनुसार केरल राज्य में विशु कानि के पर्व के दिन से ही धान की बुआई शुरू हो जाती है

• इस दिन केरल राज्य में सभी नया पंचांग पढ़ते हैं और पूरे वर्ष का अपना भविष्यफल देखते हैं

• विशु कानि के पर्व के दिन केरल और मलयालम के सभी घरों में भगवान श्रीकृष्ण की पूजा की जाती है और सभी लोग भगवान् से अच्छी फसल होने की कामना करते है.

• विषु कानि पर्व के दिन का सबसे मुख्य आकर्षणविषुक्कणीहै

• विषुक्कणीझांकी-दर्शन को कहा जाता हैं. इस पर्व के दिन प्रातःकाल आंख खोलने के पश्चात् सर्वपर्थम विषुक्कणी के दर्शन किये जाते है

• मान्यताओं के अनुसार विषुक्कणी का प्रभाव पूरे वर्ष रहता है और साथ ही इसके दर्शन से जीवन की समस्त समस्याएं दूर हो जाती हैं

• विषु कानि पर्व के एक दिन पहले ही शाम के समयकणीदर्शन की सामग्री को इकट्ठा करके एक थाली में सजा लिया जाता है.

• लोग एक कांसे के डेगची या किसी दूसरे बर्तन में चावल, नया कपड़ा, ककड़ी, कच्चा आम, पान का पत्ता, सुपारी, कटहल, आइना, अमलतास के फूल आदि को सजा कर रख देते हैं और इसी पात्र के समीप एक दिए को जलाकर रखा जाता है. यह दीपक लंबा और ऊंचा होता है.

• जिस समय विषुक्कणी की झांकी आती है तो उसका दर्शन कराने के लिए घर के सबसे बुजुर्ग लोग एक-एक कर घर के सभी लोगो को हाथ पकड़ कर झांकी के नज़दीक ले जाते है और झांकी के दर्शन करवाते है

• विषुक्कणी की झांकी का दर्शन करने से पूर्व घर के सभी लोग अपनी आंखें बंद रखते हैं.

• विषुक्कणी की झांकी का दर्शन करने के पश्चात् घर के बड़े परिवार के सभी लोगों को उपहार देते हैं या आशीर्वाद के रूप में कुछ पैसे देते हैं

• केरल राज्य में इसेकैनीट्टमकहा जाता हैं. यह प्रथा बिल्कुल ईद की तरह है, जिसमें घर के बड़े परिवार के सभी सदस्यों को ईदी देते हैं.

• विशु कानि के पर्व के दिन केरल राज्य के कुछ हिस्सों में पटाखे और आतिशबाजी की जाती हैं

• विशेष रूप से  केरल राज्य के उत्तरी भाग में विषु कानि के पर्व को बिल्कुल दिवाली की तरह मनाया जाता है

• जिस प्रकार केरल राज्य में विषु कानि का पर्व मनाया जाता है, उसी प्रकार देश के अन्य राज्यों में इसे अलग अलग नामो से मनाया जाता है.

• पंजाब और हरियाणा राज्य में इस दिन बैसाखी का पर्व मनाया जाता है

• असम राजय में इस दिन बिहू का पर्व मनाया जाता है

• तमिलनाडु राज्य में इस दिन तमिल पुतानदु या विषु पुण्यकालम का पर्व मनाते है.

• विशु कानि पर्व के दिन सभी घरो में सद्य नाम का भोज बनाया जाता है

• इस भोजन को दोपहर में ग्रहण किया जाता है

• इस दिन सभी पकवान अधिकतर कद्दू, आम, घिया, करेला, और दूसरी शाकहाई वस्तुओं और फलों के द्वारा तैयार किये जाते हैं. ये सभी चीजे आसानी से इस ऋतु में मिल जाती है