सनातन परंपरा में पुरुषोत्तम मास को बेहद पुण्यदायी और खास माना गया है। इसे अधिक मास के नाम से भी जाना जाता है। यह पावन समय लगभग हर 32 महीने के अंतराल पर आता है और भगवान विष्णु की उपासना के लिए समर्पित होता है। मान्यता है कि इस अवधि में किए गए जप, तप, पूजा-पाठ, दान और सेवा का फल सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक प्राप्त होता है। वर्ष 2026 में पुरुषोत्तम मास 17 मई से 15 जून तक रहेगा।
हिंदू पंचांग सूर्य और चंद्रमा की गति के आधार पर तैयार किया जाता है। दोनों की गणना में संतुलन बनाए रखने के लिए एक अतिरिक्त माह जोड़ा जाता है, जिसे अधिक मास कहा जाता है। जब किसी महीने में सूर्य एक भी नई राशि में प्रवेश नहीं करता, तब वह माह अधिक मास कहलाता है।
पौराणिक कथाओं के अनुसार पहले इस महीने को विशेष महत्व नहीं दिया जाता था, लेकिन भगवान विष्णु ने इसे अपना नाम और आशीर्वाद देकर "पुरुषोत्तम मास” का सम्मान प्रदान किया। तभी से यह महीना भक्ति और साधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाने लगा।