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महाविद्या पांचवा स्वरूप - माँ भैरवी| on 16 Feb 2021 (Tuesday)

गुप्त नवरात्री में माँ त्रिपुर भैरवी की पूजा का महत्व -

गुप्त नवरात्री में माँ के नौ रूपों के साथ साथ दस महाविद्याओं की पूजा भी की जाती है. विशेष रूप से जो लोग तंत्र विद्या पर यकीन रखते हैं उनके लिए गुप्त नवरात्री बहुत ही महत्वपूर्ण होती है. गुप्त नवरात्री के पांचवा दिन माँ त्रिपुर भैरवी की पूजा की जाती है. ये दस महाविद्याओं में पांचवा स्वरूप विद्या हैं. देवी के समस्त रूपों में से एक जगत प्रसिद्ध देवी त्रिपुर भैरवी भी हैं. माँ त्रिपुर भैरवी तीनों लोकों में सबसे सौंदर्यवान और सभी कर्मो का शीघ्र फलदेने वाली देवी हैं. माँ त्रिपुर भैरवी का सौंदर्य सोलह कलाओं से युक्त सोलह वर्ष की कन्या के समान है. इनके मुख से हजारों सूर्य का तेज निकलता रहता है. माँ त्रिपुर भैरवी की अराधना से समस्त प्रकार के ऐश्वर्य एवं भोग प्राप्त होते है.

माँ त्रिपुर भैरवी की पूजा के लाभ-

माँ त्रिपुर भैरवी को यौवन और आकर्षण की देवी माना जाता है

• इनकी पूजा करने से आकर्षण सौंदर्यता की प्राप्ति होती  है

• अगर आपके वैवाहिक जीवन हमेशा कलह बनी रहती है, आपका कोई प्रिय आपसे रूठ गया है, सम्मान और पद प्राप्त करने के लिएकिसी को भी सम्मोहित करने के लिए भी माँ त्रिपुर भैरवी की साधना बहुत फलदायी होती है. इनकी साधना करने मनुष्य की सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं

• माँ त्रिपुर भैरवी की उपासना भोग और मोक्ष प्रदान करती है.

माँ त्रिपुर भैरवी का स्वरूप-

• माँ त्रिपुर भैरवी की चार भुजाएं हैं.

• ये अपने हाथों में पाश, अंकुश, धनुष और बाण धारण करती हैं

• जो भी मनुष्य मां त्रिपुर भैरवी की साधना करता है माँ उसे कभी भी निराश नही करती हैं.

माँ त्रिपुर भैरवी के हृदय में सौम्यता और दया वास करते हैं

• मां त्रिपुर भैरवी की महिमा का वर्णन करना शब्दों में सम्भव नही है

• संसार की सभी  तन्त्र-मंत्र तांत्रिक और सिद्ध गण बिना माँ के आर्शिवाद के पुरे