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जगधात्री पूजा | Jagdatri Pooja on 10 Nov 2024 (Sunday)

महत्व :-
जगद्धात्री पूजा का पूरे बंगाल में एक विशेष महत्व है। दुर्गा पूजा के ठीक एक महीने बाद मनाई जाती है जगद्धात्री पूजा। सारा कलकता शहर और आसपास के शहरों से लोग उमड़ पड़ते हैं इस पूजा में शामिल होने के लिए। भव्य मूर्तियाँ और आलीशान पंडाल इस शहर को एक नया रूप दे देते हैं इन कुछ दिनों में। कार्तिक महीने में मनायी जाने वाली इस पूजा में देवी जगद्धात्री चार हाथों में नाना शस्त्र लिए होती हैं। शेर पर सवार इस देवी की भव्य मूर्तियाँ जगह-जगह पंडाल की शोभा बढ़ा रही होती हैं।

कब और क्यों मनाई जाती है:-
दुर्गा पूजा में देवी जगद्धात्री की पूजा होती है। जो कि मां दुर्गा का ही एक स्वरूप है। यह पर्व भी दुर्गा पूजा की तरह बड़ें हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। यह पर्व कार्तिक महीने की शुक्ल पक्ष में पड़ता है। मुख्य रूप से यह पूजा गोस्थाष्टमी को मनाई जाती है। गद्धात्री मां की पूजा चार दिनों तक चलती है। यह पूजा सप्तमी से लेकर अष्टमी तक चलती है। जगद्धात्री मां के तेज स्वरूप की पूजा की जाती है।

मान्यताए:-
कहते है की इस त्यौहार का शुरुवात रामकृष्ण की पत्नी शारदा देवी ने रामकृष्ण मिशन में की थी। वे भगवन के पुर्नजन्म में बहुत विश्वास रखती थी। इसकी शुरुवात के बाद इस त्यौहार को दुनिया के हर कोने में मौजूद रामकृष्ण मिशन में मानाने लगे थे। इस त्यौहार को माँ दुर्गा के पुर्नजन्म की ख़ुशी में मानते है। मन जाता है देवी, पृथ्वी पर बुराई को नष्ट करने और अपने भक्तों को सुख शांति देने आयी थी।

विधि:-
  • माँ दुर्गा की पूजा के जैसा ही इस पूजा को किया जाता है। 
  • इसमें खासतौर पर मनुष्य को अपनी ज्ञाननेद्रियों पर नियंत्रण रखने का ज्ञान मिलता है। 
  • अभिमान का नाश ही इस उत्सव का मकसद है। 
  • इस त्यौहार में जगद्धात्री देवी की बड़ी सी प्रतिमा को पंडाल में बैठाते है। 
  • प्रतिमा को सुन्दर लाल साड़ी, तरह - तरह के ज़ेवर पहनाये जाते है। 
  • देवी की प्रतिमा को फूलो की माला से भी सजाया जाता है। 
  • देवी जगद्धात्री और देवी दुर्गा का स्वरुप बिलकुल एक जैसा होता है। 
  • नव रात्रि के जैसा ही इसका आयोजन किया जाता है।
कथा:-
पौराणिक कथा के अनुसार, महिषासुर पर विजय के बाद, देवताओं में अहंकार घर कर गया। उन्हें लगता था कि देवी दुर्गा असुरों के नाथ के लिए उनका एक साधन बन चुकी हैं। तभी देवताओं को इस बात की अनुभूति कराने की देवी स्वयं शक्ति का प्रतीक है, हर कार्य में उनकी ताकत छिपी है, इसके लिए परम ब्रम्ह देवताओं के सामने राजा दक्ष के रूप में प्रकट हुए। यक्ष ने वायु देव से कहा कि वे उनके लिए क्या कर सकते हैं। तब वायु देव ने अहंकार से कहा कि वे किसी भी चीजं को हवा में उड़ा सकते हैं। तभी यक्ष ने एक छोटा सा घास रख दिया और वायु देव से उसे उड़ाने को कहा, लेकिन वह असमर्थ रहें। इसी तरह अन्य देवताओं ने भी अपनी ताकत दिखाई, किंतु सब व्यर्थ रहा। तभी यक्ष ने कहा कि आप सभी देवताओं की शक्ति वास्तविक है लेकिन ये आपके स्वयं की नहीं है। वहीं आदि शक्ति मां जगद्धात्री सर्वशक्तिशाली हैं। वह इस संसार रूपी सरंचना की रक्षक हैं। इसलिए ही उन्हें जगद्धात्री कहा जाता है।
 
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