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कमला महाविद्या जयंती का महत्व on 04 Nov 2021 (Thursday)

कमला जयंती के दिन माना जाता है की इस दिन 10 महाविद्या में से एक देवी कमला धरती पर अवतरित हुयी थी। यह दिवाली के दिन मनाई जाती है। कहते है महाविद्या कमला श्रीहरि विष्णु की साथी है, उनकी सबसे बड़ी ताकत है, देवी कमला का रूप, देवी लक्ष्मी के सम्मान ही है, जो प्रसिद्धि भाग्य, धन की देव है, धन, समृद्धि प्राप्त करने के लिए इनकी पूजा आराधना की जाती है। साथ ही प्रजनन और बच्चों के अच्छे विकास के लये इन्हे पूजा जाता है। माँ कमला देवी भाग्य, सम्मान, पवित्रता और परोपकार की देवी है।

कमला जयंती कब और क्यों मनाई जाती है:-
कमला जयंती हिन्दू पंचांग अनुसार मार्गशीर्ष की अमावस्या को मनाई जाती है। दस महत्वपूर्ण विद्याओ में से दसवा स्थान देवी कमला का है। देवी कमला माँ शक्ति का सबसे पहला रूप आदि शक्ति के नाम से भी जानी  जाती है। देवी कमला भाग्य, सम्मान, पवित्रता और परोपकार की देवी है। देवी कमला सभी दिव्या गतिविधियों में मौजूद ऊर्जा है। यह भगवन विष्णु की दिव्या शक्ति है। इनकी पूजा अर्चना से कौशल विकास और गुणवत्ता में विधि होती है। इनकी पूजा से वही पुण्य मिलता है, जो माता लक्ष्मी की पूजा से मिलता है यह धन, ऐश्वर्या देती है, यह गर्भवती की रक्षा करती है, उनका पोषण करती है।

कमला जयंती की मान्यताए:-
देवी कमला भाग्य, सम्मान और परोपकार की देवी हैं और सभी दिव्य गतिविधियों में ऊर्जा के रूप में उपस्थित रहती हैं। उन्हें भगवान विष्णु की दिव्य शक्ति भी माना जाता है। कहते हैं मां कमला की पूजा से विद्या और कौशल में विकास होता है, धन और ऐश्वर्य में वृद्धि करती है और गर्भवती महिलायें यदि इनकी पूजा करें तो उनकी संतति की रक्षा होती है। 

कमला जयंती की विधि:-
  • इस दिन माता की सभी दस शक्तियों की पूजा की जाती है। 
  • इस दिन तांत्रिक पूजा का महत्व होता है। 
  • इस दिन कन्या भोज कराया जाता है, जिसमे छोटी बालिका जिनकी उमर १० वर्ष से कम है, उन्हें भोजन करवा कर दान दिया जाता है।
  • फिर गुरु वन्दना, गुरु पूजा, गौ पूजा होती है। 
  • माँ कमला देवी अभिषेक और संपूर्ण पूजा, देवी का पूरा श्रृंगार किया जाता है, कुमकुम, हल्दी, अक्षत, सिंदूर आदि चढ़ाया जाता है।
  • फूल चढ़ाये जाते है।
  • गणपति नवग्रह और आवाहन पूजा की जाती है।
  • होम, हवं किया जाता है।
  • श्री कमला मूल मंत्र संपूर्ण पाठ, महा पूजन यज्ञ पुर्णाहुरति की जाती है। 
  • अंत में दीप दान और प्रसाद वितरण किया जाता है।