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नवम् नवरात्रा - माँ सिद्धिदात्री

नवरात्रा व्रत में क्या करें, क्या नहीं करें ?

व्रत में क्रोध, आलस्य, चिंता नहीं करें। प्रसन्न चित्त व उत्साह पूर्वक माँ की पूजा करें। किसी बात में अविष्वास व संदेह न पैदा करें। नित्यादि क्रियाएं षुद्धता पूर्व करें, स्नान में सुगन्धित तेल, साबुन यदि संभव हो तो प्रयोग न करें। ब्रह्मचर्य का पूर्ण पालन करें, अर्थात् मैथुन आदि क्रियाएं न करें।

स्त्री/पुरूष प्रसंग, हास्य विनोद, अत्याधिक बोलना, जोर से हंसना, गुस्सा करने से बचें। सरल और षांति चित्त होकर व्रत का पालन करें। जल्दी-जल्दी पानी पीना और हर थोड़ी देर में खाने से भी बचें। दिन में सोना नहीं चाहिए, बल्कि कार्यो से निवृत्त होने पर जरूरत के अनुसार थोड़ा विश्राम करना चाहिए।
 
नवां दिनः  नवम् नवरात्रा।
तिथिः         षुक्ल नवमी
माहः          चैत्र
ऋतुः         वसन्त
पूजा का समय: प्रातःकाल से।
नवें दिन की दुर्गाः- सिद्धिदात्री है।
 
यह नवां दिन माँ सिद्धिदात्री दुर्गा की पूजा के लिए विषेष महत्त्वपूर्ण है माँ भगवती ने नवें दिन देवताओं और भक्तों के सभी वांछित मनोरथों को सिद्धि कर दिया जिससे माँ सिद्धिदात्री के रूप में सम्पूर्ण विष्व में व्याप्त हुई। परम करूणामयी सिद्धिदाती की अर्चना व पूजा से भक्तों के सभी कार्य सिद्धि होतें हैं। बाधाएं समाप्त होती हैं तथा मोक्ष की प्राप्ति होती है।
 
माँ की परम करूणामयी मूर्ति का रूप इस ष्लोक से स्पष्ट हैः-
नवमं सिद्धिदात्री च नवदुर्गाः प्रकीर्तिताः।
उक्तान्येतानि नामानि ब्रह्मणैव महात्मना।।
उपरोक्त षोडषोपचार विधि से नवें दिन भी पूजा बडे श्रद्धा भक्ति से की जाती हैं और स्थापित कलष, दीप और अन्य प्रतिष्ठित वेदियों और देवी प्रतिमा में पूर्व दिन में अर्पित किए गए पुष्पादि सामग्री उतार लें और उपरोक्त क्रम को दोहराते हुए श्रद्धा, भक्ति पूर्वक हांथ जोड़कर पूजा आराधना तथा हवन व आरती करें और पूजा सम्पन्न होने के बाद प्रसाद आदि वितरित करें और नव कन्याएं एक बालक को हलुआ पूरी आदि का भोजन करा कर उन्हें यथा षक्ति दक्षिणा व कपड़ो का दान दें। नवरात्रि के व्रत का पारण दषमी के दिन यदि नवमी तिथि की वृद्धि हो रही हो तो पहली नवमी का व्रत कर दसवें दिन पारण (व्रत खोलने) का विधान है। नवरात्रा व्रत की विधि यहीं सम्पन्न होती है।