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सत्यनारायण व्रत on 03 Aug 2020 (Monday)

टिप्पणीः - भगवान सत्यनारायण व्रत की कथा किसी भी दिन वैसे श्रद्धा भक्ति के साथ की जा सकती है, किन्तु पूर्णिमा तिथि इसके लिए प्रशस्त मानी गई है। इस कथा का श्रवण प्रथम दाम्पत्य जीवन मे बंधने वाले दंपत्ति, प्रथम वधु प्रवेश, में किया जाता है। इसके अतिरिक्त दुःखों से मुक्ति पाने और सुखों मे वृद्धि करने हेतु इस व्रत का अनुष्ठान प्रत्येेक माह की पूर्णिमा तिथि में भी किया जाता है। यदि किसी को दुःखों को मुक्ति न मिल रही हो तो वह किसी विद्धान व संस्कारित पंड़ित के सहयोग से वर्ष पर्यन्त या उससे अधिक समय तक प्रत्येक पूर्णिमा के दिन षोड़षोपचार विधि से पूजन करते हुए भगवान श्रीसत्यनाराण व्रत की कथा सुनें तो उसे चमत्कारिक फल प्राप्त होगा।   

।। श्री सत्यनारायण व्रत महत्व।।
सत्य सनातन धर्म जीव व जीवन के सृजन करता ईष्वर के बारे में अनेकों तथ्यों को समेटे हुए है। जिसके अध्ययन व अनुसरण से मानव अटूट सत्य जन्म-मृत्यु के बंधनों से सहज ही छुटकारा पा लेता है। भ्रम व भौतिकता की चादर ओढ़ मानव अनेक जन्मों तक नाना प्रकार के दुःख को भोगता है। अधिदैविक (आँधी, तूफान, भूकम्प, बाढ़ादि दैविक षक्तियों व प्रकृति) द्वारा, अधिभौतिक (वायुयान, जलयान, रेल, व अन्य वाहन,) भौतिक साधनों द्वारा ये अधिभौतिक दुःख कहे गए हैं। इसी प्रकार घर, परिवार, शरीर में उत्पन्न रोग, व्याधि, हार्ट अटैक, रक्तचापादि, सुगर, जिससे नाना प्रकार के मानसिक व शारीरिक कष्ट मिलते हैं उन्हें विद्वानों ने दैहिक दुःख कहा है। विविध प्रकार के दुःखों से दुखी भटकते हुए जीवन के लिए सत्यसनातन धर्म के वेद, पुराणों, शास्त्रों, कथाओं व प्रसंगों में बडे़ ही रोचक व सत्य तथ्य उपलब्ध हैं। जिनका अनुसरण ध्यान, मनन, कीर्तन, चिंतन करते हुए व्यक्ति सुकर्मों की ओर अग्रसर होता है। जिससे जीवन में सुख-समृद्धि, आरोग्यता व आयु बढ़ती है तथा स्त्री, पति, पुत्र, धन, वैभव भी बढ़ता है। इसी प्रकार अति विषिष्ट व महत्त्वपूर्ण व्रत कथा सत्य नारायण व्रत कथा है जिसके श्रद्धा विष्वास पूर्वक व्रत करने तथा सत्य नारायण व्रत की कथा कहने या सुनने से व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। कुल (वंष) में वृद्धि, व्यावसाय में लाभ तथा नाना प्रकार के रोगों से छुटकारा भी मिलता है।