दुर्गा अष्टमी जैसे की नाम से ही मालूम होता है कि ये व्रत त्यौहार मां दुर्गा को समर्पित है। दुर्गा मां के भक्तों के लिये यह एक खास त्यौहार माना जाता है। और क्योकि यह त्यौहार हर महीने मनाया जाता है इसे मासिक दुर्गा अष्टमी कहा जाता है।
सब व्रतों में सर्वश्रेष्ठ व्रत है एकादशी का व्रत। एक साल में कुल चौबीस एकादशी होतीं हैं परन्तु अधिक मास में दो एकादशी और आ जाने से कुल छबीस एकादशियाँ हो जाती है। एकादशी एक मात्र ऐसा व्रत है जो मनुष्य के सब पापो का नाश कर उसकी बुद्धि को सत्मार्ग पर चलने के लिए दिशा देता है। मनुष्य को एकादशी के व्रत से मोक्ष की भी प्राप्ति होती है। एकादशी एक मात्र ऐसा व्रत है जिस से मनुष्य सभी देवी देवताओं को प्रसन्न कर उनकी कृपा पा लेता है।
रावण का वध करने के उपरांत जब भगवान् राम ने अयोध्या के लिए आगे बढे तो, पापांकुशा एकादशी के दिन ही उनका अपने प्रय भाई भरत से मिले| इसी सन्दर्भ में इस दिन को भरत मिलाप के नाम से भी जाना जाता है|
भोजन से जुड़े इस बहुत ही महत्वपूर्ण त्यौहार को भोगली बिहू या उरकु भी कहा जाता है। यह विशेष रूप से असम के मेहनती किसानों के अपने श्रम का लाभ पाने के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। सभी लोग बड़े धूम-धाम के साथ इस त्यौहार को अपने प्रियजनों से साथ मनाते हैं,। इस विशेष दिन असम के कई धार्मिक लोग इस रात को उपवास और प्रार्थना भी करते है। महिलाएं कई दिनों पहले ही बिहू की तैयारी में जुट जाती है और तैयार किये गये खाद्य पदार्थों को शुभ मीजी स्थान पर ले जाती हैं।
त्यौहार हमारे जीवन को खुशियों से भर देते हैं और आगे बढने की प्रेरणा देते हैं। साथ ही इस बात का संदेश भी देते है कि धर्म व ईश्वर से जुड़े रहना कितना अधिक आवश्यक है । और एक ऐसा ही महत्वपूर्ण व्रत-त्यौहार है रोहिणी व्रत। रोहिणी व्रत - जैन समुदाय को मह्त्तवपूर्ण त्यौहार – जैन समुदाय में रोहिणी व्रत महत्वपूर्ण व्रत में से एक है। रोहिणी व्रत मुख्य रूप से विवाहित महिलाओं द्वारा अपने पति के लंबे जीवन व खुशहाल वैवाहिक जीवन के लिए रखा जाता है। इस दिन महिला सजती और संवरती है। और इस दिन महिलाओं की खुशी देखते ही बनती है । रोहिणी जैन और हिंदू कैलेंडर में सत्ताईस नक्षत्रों में से एक नक्षत्र है।
दुर्गा अष्टमी जैसे की नाम से ही मालूम होता है कि ये व्रत त्यौहार मां दुर्गा को समर्पित है। दुर्गा मां के भक्तों के लिये यह एक खास त्यौहार माना जाता है। और क्योकि यह त्यौहार हर महीने मनाया जाता है इसे मासिक दुर्गा अष्टमी कहा जाता है।
मासिक कार्तिगाई एक विशेष मासिक-त्यौहार है जिसे बहुत ही हर्षोल्लास से मनाया जाता है। इस त्यौहार को तमिल-हिंदुओं द्वारा भी बहुत ही जोर-शोर के साथ मनाया जाता है।
भगवान सुब्रहमण्यम का आशीर्वाद -
आदिम और थाई के तमिल महीनों से शुरू होने वाले छह महीनों के लिए अनुष्ठान मनाया जा सकता है। लगातार 12 वर्षों तक माणिक कार्तिगई व्रत का पालन करते हुए कहा जाता है कि भक्तों को महान सौभाग्य और भगवान सुब्रह्मण्यम का आशीर्वाद मिलता है। कार्थिगई व्रत में भोजन से पूरी तरह मना होता है पर आज के समय में ऐसा व्रत रखना संभव नहीं है, तो भक्त फल और दूध का सेवन कर सकते हैं।
शनि प्रदोष व्रत विधि
1. व्रत रखने वाले व्यक्ति को व्रत के दिन सूर्य उदय होने से पहले उठना चाहिये।
2. स्नान आदिकर भगवान् शिव का नाम जपते रहना चाहिए|
3. सुबह नहाने के बाद साफ और आसमानी वस्त्र पहनें।