हिंदू धर्म में बहुत सारे त्यौहार मनाए जाते हैं. इन सभी त्यौहारों में रक्षाबंधन, दशहरा, दिवाली और होली प्रमुख है. होली का उत्सव पूरे देश में बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है. होली रंगों का त्यौहार होता है. यह त्यौहार भगवान् कृष्ण को समर्पित है. इस दिन लोग अपनी धर्म, जाति को भूलकर एक-दूसरे को रंग लगाकर आपस में गले मिलते हैं. होली को प्रेम उत्साह और खुशहाली का त्यौहार भी माना जाता है.
मासिक कार्तिगाई एक विशेष मासिक-त्यौहार है जिसे बहुत ही हर्षोल्लास से मनाया जाता है। इस त्यौहार को तमिल-हिंदुओं द्वारा भी बहुत ही जोर-शोर के साथ मनाया जाता है। भगवान सुब्रहमण्यम का आशीर्वाद - आदिम और थाई के तमिल महीनों से शुरू होने वाले छह महीनों के लिए अनुष्ठान मनाया जा सकता है। लगातार 12 वर्षों तक माणिक कार्तिगई व्रत का पालन करते हुए कहा जाता है कि भक्तों को महान सौभाग्य और भगवान सुब्रह्मण्यम का आशीर्वाद मिलता है। कार्थिगई व्रत में भोजन से पूरी तरह मना होता है पर आज के समय में ऐसा व्रत रखना संभव नहीं है, तो भक्त फल और दूध का सेवन कर सकते हैं।
गुरु वारा प्रदोष व्रत विधि 1. व्रत रखने वाले व्यक्ति को व्रत के दिन सूर्य उदय होने से पहले उठना चाहिये। 2. स्नान आदिकर भगवान् शिव का नाम जपते रहना चाहिए| 3. सुबह नहाने के बाद साफ और पीले वस्त्र पहनें।
टिप्पणीः - भगवान सत्यनारायण व्रत की कथा किसी भी दिन वैसे श्रद्धा भक्ति के साथ की जा सकती है, किन्तु पूर्णिमा तिथि इसके लिए प्रशस्त मानी गई है। इस कथा का श्रवण प्रथम दाम्पत्य जीवन मे बंधने वाले दंपत्ति, प्रथम वधु प्रवेश, में किया जाता है। इसके अतिरिक्त दुःखों से मुक्ति पाने और सुखों मे वृद्धि करने हेतु इस व्रत का अनुष्ठान प्रत्येेक माह की पूर्णिमा तिथि में भी किया जाता है।
ऐसी तिथि जो हमारे सब संकटों को हर; जीवन में खुशाली देती है उसे संकष्टी चतुर्थी कहते हैं| इस दिन भगवान् श्री गणेश, विघ्न हरता, गौरी पुत्र की पूजा की जाती है उनके लिए व्रत उपवास भी किया जाता है| हर माह के दोनों पक्षों की चतुर्थी तिथि भगवान गणेश की पूजा की जाती है| हर माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को वैनायकी श्री गणेश चतुर्थी और कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी श्री गणेश चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है। भगवन गणेश जी का सर्प्रथम हर शुभ कार्य या पूजा से पहले पूजन किया जाता है| श्री गणेश प्रथम पूजनीय हैं|
कालाष्टमी या काला अष्टमी एक बहुत ही प्रचलित हिंदू त्योहार है और भक्तों के बीच इसकी बहुत मान्यता भी है। यह विशेष त्यौहार भगवान भैरव को पूर्ण रुप से समर्पित है। कब मनाते हैं कालाष्टमी: यह व्रत त्यौहार पूरे विधि-विधान के साथ हिंदू चंद्र माह में कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन, हिंदू भक्त पूरी श्रद्धा के साथ भगवान भैरव की पूजा करते हैं और उन्हें प्रसन्न करने के लिए उपवास भी रखते हैं। एक वर्ष में कुल 12 कालाष्टमी के दर्शन होते हैं।
चातुर्मास के चारों महीनो के कृष्ण पक्ष ककी द्वितीय तिथि को अशून्य शयन मनाया जाता है| इस व्रत में भगवान् विष्णु व् माँ लक्ष्मी जी की पूजा की जाती है| यह व्रत समस्त मनोकामनाओ की पूर्ति करता है| इस व्रत को करने से वैवाहिक जोड़े को सुखद वैवाहिक जीवन का वरदान मिलता है| इस व्रत को विधिवत करने से स्त्री वैध्वय व् पुरुष विधुर होने के पाप से मुक्त होजाता है|