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Kurma Jayanti on 01 May 2026

Kurma Jayanti 


Bheeshma Dwadashi Significance on 29 Jan 2026

Bheeshma Dwadashi Significance
The 12th day in the month of Magha during the Shukla Paksha is the day for Bhishma Dwadashi.


परमा एकादशी /पुरुषोत्तमी एकादशी on 11 Jun 2026

परमा एकादशी का व्रत 

पुरुषोत्तम मास के कृष्ण पक्ष की जो एकादशी पड़ती है, उसे परमा एकादशी या हरिवल्लभ एकादशी भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस विशेष तिथि पर भगवान विष्णु की नरोत्तम रूप में पूजा करने से साधारण भक्त भी दुर्लभ सिद्धियाँ और वांछित शुभ फल प्राप्त कर सकते हैं।


ललिता पंचमी | Lalita Panchami on 15 Oct 2026

ललिता पंचमी महत्व

ललिता पंचमी के दिन देवी ललिता के लिए व्रत व् पूजन किया जाता है| इसे उपांग ललिता व्रत के नाम से भी जाना जाता है । यह व्रत शरद नवरात्री के पंचमी तिथि को किया जाता है।  इन्हे त्रिपुरा सुंदरी और षोडशी के नाम से भी जाना जाता है| ललिता देवी माता सती पार्वती का ही एक रूप हैं। आदि शक्ति माँ ललिता दस महाविद्याओं में से एक हैं| यह व्रत बहुत शुभ फल देने वाला है|पौराणिक मान्यता के अनुसार इस दिन माता ललिता कामदेव के शरीर की राख से उत्पन्न हुए 'भांडा' नामक राक्षस को मारने के लिए प्रकट हुई थीं।


कार्तिक मास प्रारम्भ | Kartik Month Starts on 27 Oct 2026

  1. कार्तिक मास का महत्व
  2. कार्तिक मास से जुडी विशेष बातें
  3. कार्तिक मास में मनाये जाने वाले प्रमुख व्रत और त्यौहार


Kalashtami/कालाष्टमी on 10 Jan 2026

कालाष्टमी या काला अष्टमी एक बहुत ही प्रचलित हिंदू त्योहार है और भक्तों के बीच इसकी बहुत मान्यता भी है। यह विशेष त्यौहार भगवान भैरव को पूर्ण रुप से समर्पित है।

कब मनाते हैं कालाष्टमी:

यह व्रत त्यौहार पूरे विधि-विधान के साथ हिंदू चंद्र माह में कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिनहिंदू भक्त पूरी श्रद्धा के साथ भगवान भैरव की पूजा करते हैं और उन्हें प्रसन्न करने के लिए उपवास भी रखते हैं। एक वर्ष में कुल 12 कालाष्टमी के दर्शन होते हैं।


रवि प्रदोष | Ravi Pradosh Vrat on 22 Nov 2026

रवि प्रदोष पूजन विधि

1.         व्रत रखने वाले व्यक्ति को व्रत के दिन सूर्य उदय होने से पहले उठना चाहिये।

2.         सुबह नहाने के बाद साफ और लाल वस्त्र पहनें

3.         स्नान आदिकर भगवान् शिव का नाम जपते रहना चाहिए|


चंद्र दर्शन | Chandra Darshan on 20 Jan 2026

चंद्र दर्शन हिंदु धर्म में काफी महत्व रखता है क्योंकि चद्रंमा को देवता समान माना जाता है। चंद्र दर्शन का अर्थ चन्द्रमा का दर्शन करना। यह भारत में बहुत श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। इसे चंद्र दर्शन इसलिये कहा जाता है क्योंकि इसे अमावस्या के बाद देखा जाता है।


रोहिणी व्रत | Rohini Vrat on 01 Jan 2026

त्यौहार हमारे जीवन को खुशियों से भर देते हैं और आगे बढने की प्रेरणा देते हैं। साथ ही इस बात का संदेश भी देते है कि धर्म व ईश्वर से जुड़े रहना कितना अधिक आवश्यक है । और एक ऐसा ही महत्वपूर्ण व्रत-त्यौहार है रोहिणी व्रत।

रोहिणी व्रत 

जैन समुदाय में रोहिणी व्रत महत्वपूर्ण व्रत में से एक है। रोहिणी व्रत मुख्य रूप से विवाहित महिलाओं द्वारा अपने पति के लंबे जीवन व खुशहाल वैवाहिक जीवन के लिए रखा जाता है। इस दिन महिला सजती और संवरती है। और इस दिन महिलाओं की खुशी देखते ही बनती है । रोहिणी जैन और हिंदू कैलेंडर में सत्ताईस नक्षत्रों में से एक नक्षत्र है।


।। श्री सत्यनारायण व्रत महत्व।। on 28 Jan 2021

टिप्पणीः - भगवान सत्यनारायण व्रत की कथा किसी भी दिन वैसे श्रद्धा भक्ति के साथ की जा सकती है, किन्तु पूर्णिमा तिथि इसके लिए प्रशस्त मानी गई है। इस कथा का श्रवण प्रथम दाम्पत्य जीवन मे बंधने वाले दंपत्ति, प्रथम वधु प्रवेश, में किया जाता है। 


Rohini Vrat on 23 Dec 2026

त्यौहार हमारे जीवन को खुशियों से भर देते हैं और आगे बढने की प्रेरणा देते हैं। साथ ही इस बात का संदेश भी देते है कि धर्म ईश्वर से जुड़े रहना कितना अधिक आवश्यक है और एक ऐसा ही महत्वपूर्ण व्रत-त्यौहार है रोहिणी व्रत।

रोहिणी व्रत - 

जैन समुदाय में रोहिणी व्रत महत्वपूर्ण व्रत में से एक है। रोहिणी व्रत मुख्य रूप से विवाहित महिलाओं द्वारा अपने पति के लंबे जीवन व खुशहाल वैवाहिक जीवन के लिए रखा जाता है। इस दिन महिला सजती और संवरती है। और इस दिन महिलाओं की खुशी देखते ही बनती है । रोहिणी जैन और हिंदू कैलेंडर में सत्ताईस नक्षत्रों में से एक नक्षत्र है।


संकष्टी चतुर्थी Sankashti Chaturthi on 27 Nov 2026

ऐसी तिथि जो हमारे सब संकटों को हर; जीवन में खुशहाली  देती है उसे संकष्टी चतुर्थी कहते हैं| इस दिन भगवान् श्री गणेश, विघ्न हरता, गौरी पुत्र की पूजा की जाती है उनके लिए व्रत उपवास भी किया जाता है|हर माह के दोनों पक्षों की चतुर्थी तिथि भगवान गणेश की पूजा की जाती है| हर माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को वैनायकी श्री गणेश चतुर्थी और कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी श्री गणेश चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है। भगवन गणेश जी का सर्प्रथम हर शुभ कार्य या पूजा से पहले पूजन किया जाता है| श्री गणेश प्रथम पूजनीय हैं|
  


पंचम महाविद्या माँ छिन्मस्ता | Maa Chhinmasta on 23 Jan 2026

गुप्त नवरात्रि में पांचवें दिन माँ छिन्मस्ता की पूजा की जाती है। 

 देवी को समर्पित मंदिरों में तंत्र के रूप में महाविद्या की पूजा की जाती है। देवी छिन्नमस्ता के मंदिर और सार्वजनिक पूजा सामान्य रूप से नहीं की जाती है। जब गूढ़ तांत्रिक परंपरा की बात आती है तो छिन्नमस्ता को एक महत्वपूर्ण देवी के रूप में देखा जाता है। देवी के मंदिर भारतीय राज्यों ओडिशा,  के पूर्वी भाग के साथ-साथ नेपाल में भी देखे जाते हैं। हिंदू धर्म के देवी-केंद्रित संप्रदाय, शक्तिवाद के कलिकुला संप्रदाय में देवी की पूजा की जाती है। साधारण उपासकों द्वारा  इसी वजह से इसे आम जनता के लिए उपयुक्त नहीं माना गया है, लेकिन इनकी अलग से पूजा करने का विशेष विधान दिया गया है।       
 
गुप्त नवरात्रि पांचवे दिन की जाती है माँ छिन्न्मस्ता की पूजा

 गुप्त नवरात्रि के पांचवे दिन मां छिन्मस्ता की पूजा करने का नियम है. तंत्र शास्त्र में देवी छिन्मस्ता की उपासना से समाज में प्रसिद्धि मिलती है । पूर्वी भारत जैसे पश्चिम बंगाल, झारखंड और उत्तर प्रदेश और नेपाल में इनकी विशेष रूप से पूजा की जाती है। छिन्नमस्ता की पूजा में यदि कोई कमी की जाती है तो वह विपरीत फल देने वाली भी होती है। यही कारण है की आम लोगो के लिए इनकी साधना को उपयुक्त नहीं माना गया है।  देवी छिन्नमस्ता की पूजा करने से मनुष्य को समाज में सम्मान और प्रतिष्ठा प्राप्त होती है और साथ ही सुख और समृद्धि का वरदान मिलता है. माँ छिन्नमस्ता की पूजा करने से मंसूही न केवल अपनी यौन ऊर्जा को नियंत्रित कर सकते हैं बल्कि आध्यात्मिक ऊर्जा को भी बढ़ा सकते हैं. देवी अपने साधक को ज्ञान, समृद्धि, विजय, स्वास्थ्य और धन का आशीर्वाद देती हैं. छिन्नमस्तिका पूजा उन लोगों के लिए बहुत प्रभावी है जो बांझपन, यौन रोग और ऋण से संबंधित समस्याओं का सामना कर रहे हैं. माँ छिन्नमस्ता की पूजा व्यावसायिक हानि से उबरने में भी मदद करती है. 

माँ छिन्मस्ता की पूजा का महत्व -

माँ छिन्नमस्ता की पूजा से समृद्धि, स्थिरता और लंबे जीवन के साथ साथ और भी अनगिनत लाभ होते है. छिन्नमस्तिका मंत्र कुंडलिनी जागरण में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. कुंडलिनी योग माँ के अभ्यास के दौरान मूला धरा चक्र के जागरण के लिए छिन्नमस्तिका मंत्र का जाप किया जाता है.


माता छिन्नमस्तिका  मंत्र

श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं वज्र वैरोचनीये हूं हूं फट् स्वाहा।


माता की उत्पत्ति कथा 

 माता छिन्नमस्तिका के बारे में एक पौराणिक कथा प्रसिद्द है. कथा के अनुसार एक बार माँ मंदाकिनी नदी में स्नान कर रही थीं. उस समय उनके साथ उनके दो सहयोगी अजय और विजया भी थी, स्नान करते समय माँ के सहयोगियों को भूख महसूस होने लगी. उन्होंने माँ से कुछ खाने के लिए माँगा. तब माँ ने उन्हें प्रतीक्षा करने के लिए कहा, पर अजया और विजया को बहुत ज़ोरो से भूख लगी थी इसलिए वो बार बार माँ से खाने के लिए कुछ मांगते रहे. सहायकों ने देवी से कहा की माँ तो वो होती है जो अपने बच्चों को भोजन उपलब्ध कराती है. अपने सहयोगीयो की बात सुनकर ’देवी भवानी ने अपना सिर काट दिया जो उनके बाएं हाथ में गिरा. उनके  सिर से खून की तीन धाराएं निकलीं. इनमें से दो धाराओं को अजया और विजया ने भस्म का  दिया. तीसरी धारा को देवी ने भस्म कर दिया. तब से, वह माता छिन्नमस्तिका के नाम से जानी जाने लगी. लेकिन, अजय और विजया को और रक्त चाहिए था तो देवी ने अपना माथा काट दिया और उन्हें अपना रक्त अर्पित किया. इसलिए, उन्हें माता छिन्नमस्तिका के नाम से जाना जाता है.


अक्षय तृतीया | Akshay Tritiya on 19 Apr 2026

क्या है अक्षय तृतीया का महत्व और पूजन विधि 

 

क्या है अक्षय तृतीया-

हिंदू धर्म में वैशाख के महीने को बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है. वैशाख मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि के दिन अक्षय तृतीया का पर्व मनाया जाता है. कई जगहों पर अक्षय तृतीया को आखा तीज भी कहा जाता है. शास्त्रों के अनुसार अक्षय तृतीया के दिन सतयुग और त्रेता युग का आरंभ हुआ था. अक्षय तृतीया के दिन तप, दान करने से अक्षय फलों की प्राप्ति होती है. इसीलिए इस दिन को अक्षय तृतीया कहा जाता है. इसलिए यह महा फलदायक माना जाता है. अक्षय तृतीया के दिन प्रातः काल पंखा ,चावल, नमक, चीनी, सब्जी, फल, इमली और वस्त्र के दान को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है. 


 


महालक्ष्मी व्रत आरम्भ | Mahalakshmi Vrat arambh on 19 Sep 2026

हिंदू धर्म में महालक्ष्मी की पूजा का बहुत ही महत्व होता है। कई महिलाएं इस दिन खास व्रत रखती है। हर साल भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से इस व्रत की शुरुआत होती है। इसे आश्विन महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि तक किया जाता है। माता महालक्ष्मी का व्रत पूरे 16 दिन तक चलता है। 
माना जाता है कि इस दिन पूरे मन और विधिपूर्वक महालक्षमी की पूजा की जाए, तो मनुष्य की सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। यही नहीं, महालक्ष्‍मी व्रत के दौरान ’लक्ष्‍मी सहस्रनाम’, ’शतनामावली’ और ’लक्ष्‍मी अष्टोत्तर’ जैसी धार्मिक किताबें पढ़ना भी बेहद लाभकारी माना जाता है।


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