माताशैलपुत्री - या देवी सर्वभूतेषु माँ शैलपुत्री रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥
चातुर्मास के शुरू होते ही अनेको व्रत त्योहारों की शुरुआत हो जाती है| जिसमें कार्तिक के महीने में पड़ने वाले त्यौहार व् व्रत सबसे महत्वपूर्ण माने गए हैं| इन्ही महत्वपूर्ण व्रतों में एक सबसे ख़ास व्रत आता है जिसे करवा चौथ कहा जाता है|
प्रदोष का अर्थ है "भारी दोष"| चन्द्रमा को क्षय रोग होने के कारण चंद्र देव अंतिम साँसे गिन रहे थे| तभी भगवान् शंकर ने चन्द्रमा को पुनर्जीवन देकर मस्तक पर धारण किया| चंद्र मृत्यु के निकट जाकर भी भगवान् शिव की कृपा से जीवित रहे और पूर्णमाशी के दिन तक पूर्णता स्वस्थ हो प्रकट हुए|
छठ पूजा का सबसे महत्त्वपूर्ण पक्ष इसकी सादगी पवित्रता और लोकपक्ष है। भक्ति और आध्यात्म से परिपूर्ण इस पर्व में बाँस निर्मित सूप, टोकरी, मिट्टी के बर्त्तनों, गन्ने का रस, गुड़, चावल और गेहूँ से निर्मित प्रसाद और सुमधुर लोकगीतों से युक्त होकर लोक जीवन की भरपूर मिठास का प्रसार करता है।