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प्रथम नवरात्रि: माता शैलपुत्री | First Navratri on 11 Oct 2026

माताशैलपुत्री - या देवी सर्वभू‍तेषु माँ शैलपुत्री रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:


करवा चौथ | Karwa Chauth on 29 Oct 2026

चातुर्मास के शुरू होते ही अनेको व्रत त्योहारों की शुरुआत हो जाती है| जिसमें कार्तिक के महीने में पड़ने वाले त्यौहार व् व्रत सबसे महत्वपूर्ण माने गए हैं| इन्ही महत्वपूर्ण व्रतों में एक सबसे ख़ास व्रत आता है जिसे करवा चौथ कहा जाता है|


रूक्मिणी अष्टमी | Rukmani Ashtami on 30 Dec 2026

रूक्मिणी अष्टमी व्रत – जीवन में लाए सुख-समृद्धि
 
पौराणिक ग्रंथों के अनुसार द्वापर युग में भगवान विष्णु के अवतार श्रीकृष्ण की लीला में सहयोग देने के लिए माता लक्ष्मी ने भी रूक्मिणी के रूप में अवतार लिया था। रूक्मिणी रूप में वह श्रीकृष्ण की जीवनसंगिनी और प्राणप्रिया बनीं। यही कारण है कि जैसे कृष्ण जन्माष्टमी को बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है, वैसे ही रूक्मिणी के जन्म को रूक्मिणी अष्टमी के रूप में मनाया जाता है। इस दिन महिलाएं विशेष रूप से व्रत रखती हैं, माता रूक्मिणी और श्रीकृष्ण का पूजन करती हैं और उनसे अपने और परिवार के जीवन के लिए के लिए सुख-समृद्धि, मंगल की कामना करती हैं। आइए इस लेख में हम आपको विस्तार से बताते हैं कि रूक्मिणी अष्टमी व्रत का महत्व और कथा है? साथ ही इस व्रत की पूजन विधि क्या है? इसे किस प्रकार से किया जाता है।


भौम प्रदोष | Bhaum Pradosh Vrat on 28 Apr 2026

प्रदोष का अर्थ है "भारी दोष"| चन्द्रमा को क्षय रोग होने के कारण चंद्र देव अंतिम साँसे गिन रहे थे| तभी भगवान् शंकर ने चन्द्रमा को पुनर्जीवन देकर मस्तक पर धारण किया| चंद्र मृत्यु के निकट जाकर भी भगवान् शिव की कृपा से जीवित रहे और पूर्णमाशी के दिन तक पूर्णता स्वस्थ हो प्रकट हुए| 


माता स्कन्दमाता |Fifth Navratri Maa Skandmata on 23 Mar 2026

माता स्कन्दमाता:- या देवी सर्वभू‍तेषु माँ स्कन्दमाता रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥
पहाड़ों पर रहकर सांसारिक जीवों में नवचेतना का निर्माण करने वालीं स्कंदमाता| स्कंद कुमार कार्तिकेय की माता के कारण इन्हें स्कंदमाता नाम से अभिहित किया गया है। इनके विग्रह में भगवान स्कंद बालरूप में इनकी गोद में विराजित हैं। 
रूप:- इस देवी की चार भुजाएं हैं। ये दाईं तरफ की ऊपर वाली भुजा से स्कंद को गोद में पकड़े हुए हैं। नीचे वाली भुजा में कमल का पुष्प है। बाईं तरफ ऊपर वाली भुजा में वरदमुद्रा में हैं और नीचे वाली भुजा में कमल पुष्प है। इनका वर्ण एकदम शुभ्र है। ये कमल के आसन पर विराजमान रहती हैं। इसीलिए इन्हें पद्मासना भी कहा जाता है। सिंह इनका वाहन है। 
श्रृंगार:- माँ के श्रृंगार में खूबसूरत रंगो का इस्तेमाल करना चाहिए| स्कन्द माता को हलके हरे रंग के वस्त्र अर्पित करें| उन्हें पीले सफ़ेद फूलों की माला अर्पित करें|
पूजा:- मां स्कंदमाता की पूजा पवित्र और एकाग्र मन से करनी चाहिए। स्कंदमाता की उपासना से भक्त की सारी इच्छाएं पूरी हो जाती हैं। इसके अलावा स्कंदमाता की कृपा से संतान के इच्छुक दंपत्ति को संतान सुख प्राप्त हो सकता है। अगर बृहस्पति कमजोर हो तो स्कंदमाता की पूजा आराधना करनी चाहिए। 
कथा:- नवरात्रि के पंचम


छठ पूजा | Chhat Pooja on 15 Nov 2026

छठ पूजा का सबसे महत्त्वपूर्ण पक्ष इसकी सादगी पवित्रता और लोकपक्ष है। भक्ति और आध्यात्म से परिपूर्ण इस पर्व में बाँस निर्मित सूप, टोकरी, मिट्टी के बर्त्तनों, गन्ने का रस, गुड़, चावल और गेहूँ से निर्मित प्रसाद और सुमधुर लोकगीतों से युक्त होकर लोक जीवन की भरपूर मिठास का प्रसार करता है।



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