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क्या है नारली पूर्णिमा? on 03 Aug 2020 (Monday)

'नारल' का अर्थ है नारियल और यह फल पूर्णिमा के दिन समुद्र देवता को बहुत ही श्रद्धा के साथ अर्पित किया जाता है।

 

 नारली पूर्णिमा हिंदु कैलेंडर के अनुसार श्रावण महीने के दिन मनाई जाती है। इस दिन लोग सुबह जल्दी उठते है और समुद्र देवता की पूजा करते हैं और उन्हें नारियल चढाते हैं। नारली पूर्णिमा को नारियल का त्यौहार भी कहा जाता है और इसे बहुत ही ख़ुशी और उत्साह के साथ मनाया जाता है।

नारली पूर्णिमा का महत्व नारली पूर्णिमा का महत्व -

यह त्यौहार मछुआरों के साथ-साथ पूरे महाराष्ट्र में मछली पकड़ने वाले समुदाय के बीच काफी लोकप्रिय है। यह बताने की आवश्यकता नहीं है कि श्रवण (सावन का महीना) हिंदी कैलेंडर के चार सबसे शुभ महीनों में से एक है। और इसीलिएपूर्णिमा को अधिक सम्मान के साथ माना जाता है।

  • नारली पूर्णिमा मौसम से जुड़ा त्योहार है।
  • इसे मानसून के मौसम के समाप्त होने के रुप में मनाया जाता है।
  • इस दिन मछुआरे विशेष रूप से इस दिन समुद्र,भगवान,वरुण की पूजा करते हैं।
  • लोग इस शुभ दिन पर नृत्य और गायन करते हैं।
  • इसके अलावापरिवार और दोस्तों के साथ करी के साथ मीठे नारियल चावल भी खाये जाने की प्रथा हैं।

 नारली पूर्णिमा कहाँ-कहाँ मनाई जाती है -

नारली पूर्णिमा पूरे देश में प्रचलित है लेकिन खासतौर पर महाराष्ट्र में बहुत ही हर्षोल्लास के साथ मनाई जाती है। इस विशेष त्यौहार को अन्य नामों से भी जाना जाता है जैसे -श्रावणी पूर्णिमा, रक्षा बंधन और राखी पूर्णिमा।

नारली पूर्णिमा एक बड़े पैमाने पर हिंदुओं द्वारा मनाया जाने वाला एक प्रमुख त्योहार है। मुख्य रूप से,यह भारत के पश्चिमी तट पर दमन और दीवठाणे जैसे महाराष्ट्र के तटीय क्षेत्र मेंरत्नागिरी, और कोंकण आदि में रहने वाले लोगों के बीच मनाया जाता है

इस दिन पारंपरिक भोजन बनाया जाता है जिसे नारली भातनारियल चावलनरलाची करंजी कहा जाता है। पारंपरिक रूप से कपड़े पहने हुए पुरुष और महिलाएं इस दिन अनुष्ठान का पालन करते हैं। वे अपने साथ नारियल लेकर जाते हैं और समुद्र को अर्पित करते हैं।

नारली पूर्णिमा पर क्या करें -

  • लोग इस दिन मछली पकड़ने के लिए नहीं जाते हैं। इसके अलावालोग इस दिन मछली का सेवन भी नहीं करते हैं।
  • समुद्र देवता का आशीर्वाद पाने के लिए नारियल को समुद्र में फेंक दिया जाता है।
  • नारियल फेंकने को शांत करने के लिए एक इशारा माना जाता है।
  • केवल नारियल ही चढ़ाया जाता है लेकिन कोई अन्य फल नहीं। और इसका कारण यह है कि सभी प्रकार के हिंदू त्योहारों में भगवान को चढ़ाने के लिए नारियल को काफी शुभ माना जाता है।
  • नारियल एकमात्र ऐसा पेड़ है जो मनुष्य को उपयोगी पत्तेनारियल और छाल धारण करता है।
  • नारियल को तीन नेत्र होने के कारण भगवान शिव का एक फल सहयोगी भी माना जाता है।
  • कुछ भी शुभ करने से पहले नारियल तोड़ना भी सभी नकारात्मकताओं को दूर करने के लिए काफी शुभ माना जाता है।

नारली पूर्णिमा और अनुष्ठान -

मछुआरे समुद्र अपने सभी प्रकार औजारों व अन्य चीजों की मरम्मत करते हैं जिसे वह मछली या नौका चलाने के दौरान प्रयोग करत हैं जैसे नावमछली पकड़ने का जालजहाज आदि। यह त्यौहार पूरी तरह से मछुवारों का अपनी नौकरी और समुद्री भगवान के प्रति सम्मान देने का पर्व है। इसके अलावामछुवारे यदि धन से सम्पन्न है तो वे नई नाव या मछली पकड़ने का जाल भी खरीदते हैं। इस दिन नावें भी विशेष रुप से सजाई जाती हैं।