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स्कन्द षष्टी/चंपा षष्टी महत्व on 03 Aug 2022 (Wednesday)

स्कन्द षष्टी/चंपा षष्टी महत्व

1.स्कन्द षष्टी दक्षिणी भारत में मनाये जाने वाला एक बहुत ही महत्वपूर्ण पर्व है| इस दिन गौरी शंकर भगवान के पुत्र कार्तिकेय  की पूजा करि जाती है

2.भगवान् स्कन्द को मुरुगन,कार्तिकेयन, सुब्रमण्या के नाम से भी जाना जाता है| यह भाद्रपद मॉस के शुक्ल पक्ष की षष्टी तिथि को मनाया जाता है| कार्तिकेय के पूजन से रोग, दुःख और दरिद्रता का निवारण होता है। skanda sashti vrat, Karthikeya, sashti viratham, santan sashti, Shashthi fast, स्कंद षष्ठी व्रत, कार्तिकेय, संतान षष्ठी व्रत,Skanda Sashti, Significance of Skanda Sashti, Shasti Date in 2021 : August 13 Thursday

3.कथाओं के अनुसार भगवान शिव के तेज से उत्पन्न छह मुख वाले बालक स्कन्द की छह कृतिकाओं ने स्तनपान करा कर रक्षा की थी, इसीलिए कार्तिकेय' नाम से पुकारा जाने लगा। 

4.कार्तिकेय भगवान के अधिकतर भक्त तमिल हिन्दू हैं, इसीलिए इनकी पूजा भारत के तमिलनाडु में विशेष तौर पर होती है। भगवान स्कंद का सबसे प्रसिद्ध मंदिर भी तमिलनाडु में ही है।

5.स्कन्दपुराण में कुमार कार्तिकेय ही हैं तथा यह पुराण सभी पुराणों में सबसे बड़ा माना जाता है। Latest news

6.शास्त्रों में इस बात का उल्लेख मिलता है कि स्कन्द षष्ठी एवं चम्पा षष्ठी के महायोग का व्रत करने से काम, क्रोध, मद, मोह, अहंकार से मुक्ति मिलती है और सन्मार्ग की प्राप्ति होती है।

स्कन्द षष्टी पूजन विधि|