Indian Festivals

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शीतला सप्तमी on 27 Mar 2019


रंग पंचमी on 25 Mar 2019


Easter on 24 Mar 2019


कोजागर व्रत | Kojagar vrat on 25 Oct 2026

कोजागर व्रत आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को किया जाता है।  यह व्रत माँ लक्ष्मी की कृपा पाने व् उनको प्रसन्न करने के लिए किया जाता है।  ऐसी मान्यता है की इस दिन माँ लक्ष्मी अपने भक्तों की झोलियाँ सुख व् समृद्धि से भर देती है।  इस दिन को माँ लक्ष्मी जी के जन्मोत्सव के रूप में भी मनाया जाता है।  ऐसी मान्यता है की सागर मंथन के दौरान ही माँ लक्ष्मी समुद्र से, शरद या कोजागर पूर्णिमा के दिन ही उत्पन हुई थी।


संकष्टी चतुर्थी on 31 Mar 2021

ऐसी तिथि जो हमारे सब संकटों को हर; जीवन में खुशाली देती है उसे संकष्टी चतुर्थी कहते हैं| इस दिन भगवान् श्री गणेश, विघ्न हरता, गौरी पुत्र की पूजा की जाती है उनके लिए व्रत उपवास भी किया जाता है| हर माह के दोनों पक्षों की चतुर्थी तिथि भगवान गणेश की पूजा की जाती है| हर माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को वैनायकी श्री गणेश चतुर्थी और कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी श्री गणेश चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है। भगवन गणेश जी का सर्प्रथम हर शुभ कार्य या पूजा से पहले पूजन किया जाता है| श्री गणेश प्रथम पूजनीय हैं|


शहीद भगत सिंह जयंती on 23 Mar 2019


शिवाजी जयंती on 23 Mar 2019


शरद पूर्णिमा | Sharad Purnima on 25 Oct 2026

आश्विन मास की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा कहा जाता है।  शरद पूर्णिमा के दिन ही भगवान्  श्री कृष्ण ने गोपियों के साथ महा रासलीला की थी।  इस दिन चन्द्रमा अपनी सोलह कलाओं के साथ उदित होकर अमृत वर्षा कर के वातावरण को शुद्ध व् शीतल कर देता है।


Good Friday on 22 Mar 2019


भ्रातृ दूज on 22 Mar 2019


Panguni Uthiram on 21 Mar 2019


सोम प्रदोष व्रत विधि व कथा on 18 Mar 2019

सोम प्रदोष व्रत विधि

1.         व्रत रखने वाले व्यक्ति को व्रत के दिन सूर्य उदय होने से पहले उठना चाहिये।

2.         स्नान आदिकर भगवान् शिव का नाम जपते रहना चाहिए|

3.         सुबह नहाने के बाद साफ और चमकदार श्वेत वस्त्र पहनें।


सत्य नारायण व्रत | Satya Narayan Vrat on 01 Feb 2026

टिप्पणीः - भगवान सत्यनारायण व्रत की कथा किसी भी दिन वैसे श्रद्धा भक्ति के साथ की जा सकती है, किन्तु पूर्णिमा तिथि इसके लिए प्रशस्त मानी गई है। इस कथा का श्रवण प्रथम दाम्पत्य जीवन मे बंधने वाले दंपत्ति, प्रथम वधु प्रवेश, में किया जाता है। इसके अतिरिक्त दुःखों से मुक्ति पाने और सुखों मे वृद्धि करने हेतु इस व्रत का अनुष्ठान प्रत्येेक माह की पूर्णिमा तिथि में भी किया जाता है। 


आमलकी एकदशी on 17 Mar 2019

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मनोवांछित फल देती है गोविन्द द्वादशी on 18 Mar 2019

Coming Soon...


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