कोजागर व्रत आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को किया जाता है। यह व्रत माँ लक्ष्मी की कृपा पाने व् उनको प्रसन्न करने के लिए किया जाता है। ऐसी मान्यता है की इस दिन माँ लक्ष्मी अपने भक्तों की झोलियाँ सुख व् समृद्धि से भर देती है। इस दिन को माँ लक्ष्मी जी के जन्मोत्सव के रूप में भी मनाया जाता है। ऐसी मान्यता है की सागर मंथन के दौरान ही माँ लक्ष्मी समुद्र से, शरद या कोजागर पूर्णिमा के दिन ही उत्पन हुई थी।
आश्विन मास की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा कहा जाता है। शरद पूर्णिमा के दिन ही भगवान् श्री कृष्ण ने गोपियों के साथ महा रासलीला की थी। इस दिन चन्द्रमा अपनी सोलह कलाओं के साथ उदित होकर अमृत वर्षा कर के वातावरण को शुद्ध व् शीतल कर देता है।
टिप्पणीः - भगवान सत्यनारायण व्रत की कथा किसी भी दिन वैसे श्रद्धा भक्ति के साथ की जा सकती है, किन्तु पूर्णिमा तिथि इसके लिए प्रशस्त मानी गई है। इस कथा का श्रवण प्रथम दाम्पत्य जीवन मे बंधने वाले दंपत्ति, प्रथम वधु प्रवेश, में किया जाता है। इसके अतिरिक्त दुःखों से मुक्ति पाने और सुखों मे वृद्धि करने हेतु इस व्रत का अनुष्ठान प्रत्येेक माह की पूर्णिमा तिथि में भी किया जाता है।