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धूमावती जयंती का महत्व|

धूमावती जयंती का महत्व|

धूमावती मां का रूप बहुत ही विकृत और भयानक प्रतीत होता है. मां धूमावती का स्वरूप एक विधवा के समान है. इनका वाहन कौवा है. मां धूमावती सफेद रंग के वस्त्र धारण किए हुए खुले बालों में रहती हैं. मां धूमावती का स्वरूप भले ही कितना भयानक और विकृत क्यों ना हो पर वह अपने भक्तों के लिए सर्वथा कल्याणकारी होता है. मां धूमावती का दर्शन करने से अभीष्ट फलों की प्राप्ति होती है. माँ धूमावती का जन्म पापियों को दंड देने के लिए हुआ है. मां धूमावती के अंदर संसार का नाश और संघार करने की क्षमताएं विराजमान है. मां धूमावती ज्येष्ठा नक्षत्र से संबंध रखती हैं इसलिए इन्हें ज्येष्ठा भी कहा जाता है. मान्यताओं के अनुसार ऋषि दुर्वासा, भृगु, परशुराम इन सभी की मूल शक्ति धूमावती है. सृष्टि कलह की देवी होने की वजह से इन्हें कलह प्रिय नाम से भी जाना जाता है. देवी का प्रमुख समय चौमासा होता है. जिसमें देवी का पूजन किया जाता है. मां धूमावती का स्वरूप अत्यंत भयानक है. इन्होंने शत्रुओं का नाश करने के लिए ऐसा रूप धारण किया है. मां धूमावती हमेशा मलिन वस्त्र धारण करती हैं. इनके रथ की पताका पर कौवे का चिन्ह है. धूमावती जयंती पूरे देश में बहुत ही धूमधाम के साथ मनाई जाती है. धूमावती जयंती का व्रत और पूजा करने से भक्तों के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं.