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सोम प्रदोष व्रत विधि व कथा on 24 May 2021

सोम प्रदोष व्रत विधि

1.         व्रत रखने वाले व्यक्ति को व्रत के दिन सूर्य उदय होने से पहले उठना चाहिये।

2.         स्नान आदिकर भगवान् शिव का नाम जपते रहना चाहिए|

3.         सुबह नहाने के बाद साफ और चमकदार श्वेत वस्त्र पहनें।


कार्तिगाई दीपम | Karthigai Deepam on 23 Mar 2026

मासिक कार्तिगाई एक विशेष मासिक-त्यौहार है जिसे बहुत ही हर्षोल्लास से मनाया जाता है। इस त्यौहार को तमिल-हिंदुओं द्वारा भी बहुत ही जोर-शोर के साथ मनाया जाता है। 


सत्यनारायण व्रत कथा on 29 Dec 2020

टिप्पणीः - भगवान सत्यनारायण व्रत की कथा किसी भी दिन वैसे श्रद्धा भक्ति के साथ की जा सकती है, किन्तु पूर्णिमा तिथि इसके लिए प्रशस्त मानी गई है। इस कथा का श्रवण प्रथम दाम्पत्य जीवन मे बंधने वाले दंपत्ति, प्रथम वधु प्रवेश, में किया जाता है। इसके अतिरिक्त दुःखों से मुक्ति पाने और सुखों मे वृद्धि करने हेतु इस व्रत का अनुष्ठान प्रत्येेक माह की पूर्णिमा तिथि में भी किया जाता है। 


पहला नवरात्रा : माता शैलपुत्री | First Navratri Maa Shailputri on 19 Mar 2026

माता शैलपुत्री - या देवी सर्वभूतेषु माँ शैलपुत्री रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:

शैल का अर्थ होता है पर्वत. पर्वतों के राजा हिमालय के घर में पुत्री के रूप में यह जन्मी थीं, इसीलिए इन्हें शैलपुत्री कहा जाता है नवरात्र के इस प्रथम दिन की उपासना में साधक अपने मन कोमूलाधारचक्र में स्थित करते हैं, शैलपुत्री का पूजन करने सेमूलाधार चक्रजागृत होता है और यहीं से योग साधना आरंभ होती है जिससे अनेक प्रकार की शक्तियां प्राप्त होती हैं 


द्वितीय नवरात्रि: माता ब्रह्मचारिणी | Second Navratri on 12 Oct 2026

ब्रह्म का अर्थ है तप और चारिणी का अर्थ है आचरण करने वाली 


तृतीय नवरात्रि: माता चंद्रघंटा | Third Navratri on 13 Oct 2026

श्री दुर्गा का तृतीय रूप श्री चंद्रघंटा है। इनके मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र है, इसी कारण इन्हें चंद्रघंटा देवी कहा जाता है। नवरात्रि के तृतीय दिन इनका पूजन और अर्चना किया जाता है। इनके पूजन से साधक को मणिपुर चक्र के जाग्रत होने वाली सिद्धियां स्वतः प्राप्त हो जाती हैं तथा सांसारिक कष्टों से मुक्ति मिलती है।इनकी आराधना से मनुष्य के हृदय से अहंकार का नाश होता है तथा वह असीम शांति की प्राप्ति कर प्रसन्न होता है। माँ चन्द्रघण्टा मंगलदायनी है तथा भक्तों को निरोग रखकर उन्हें वैभव तथा ऐश्वर्य प्रदान करती है।


चतुर्थ नवरात्रि: माता कूष्माण्डा | Fourth Navratri on 14 Oct 2026

ब्रह्मांड को उत्पन्न करने के कारण इन्हें कूष्मांडा देवी के नाम से पुकारा जाता है। नवरात्रि के चतुर्थ दिन इनकी पूजा और आराधना की जाती है। श्री कूष्मांडा की उपासना से भक्तों के समस्त रोग-शोक नष्ट हो जाते हैं। इनकी आराधना से मनुष्य त्रिविध ताप से मुक्त होता है। माँ कूष्मांडा  सदैव अपने भक्तों पर कृपा दृष्टि रखती है। इनकी पूजा आराधना से हृदय को शांति एवं लक्ष्मी की प्राप्ति होती हैं|


षष्ठ नवरात्रि: माता कात्यायनी | Sixth Navratri on 16 Oct 2026

नवदुर्गा के छठे स्वरूप में माँ कात्यायनी की पूजा की जाती हैमाँ कात्यायनी का जन्म कात्यायन ऋषि के घर हुआ था अतः इनको कात्यायनी कहा जाता हैये ब्रजमंडल की अधिष्ठात्री देवी हैंगोपियों ने कृष्ण की प्राप्ति के लिए इनकी पूजा की थीविवाह सम्बन्धी मामलों के लिए इनकी पूजा अचूक होती हैयोग्य और मनचाहा पति इनकी कृपा से प्राप्त होता है|


सप्तम नवरात्रि: माता कालरात्रि | Seventh Navratri on 17 Oct 2026

दुर्गा के इस सातवें रूप को कालरात्रि के नाम से जाना जाता है जो इस संसार में आदि काल से सुप्रसिद्ध है। इन माँ की मूर्ति यद्यपि बड़ी ही विकराल प्रतीत होती है, जो परम तेज से युक्त है जो भक्तों के हितार्थ अति भयानक कालिरात्रि के रूप मे प्रकट होती हैं। इनका रंग काला होने के कारण ही इन्हें कालरात्रि कहा गया और असुरों के राजा रक्तबीज का वध करने के लिए देवी दुर्गा ने अपने तेज से इन्हें उत्पन्न किया था|


अष्टम नवरात्रि: माता महागौरी | Eighth Navratri on 19 Oct 2026

 
 महागौरी का पूजन-अर्चन, उपासना-आराधना कल्याणकारी है। इनकी कृपा से अलौकिक सिद्धियां भी प्राप्त होती हैं। ये अमोघ फलदायिनी हैं और इनकी पूजा से भक्तों के सभी पाप भी नष्ट हो जाते हैं।


नवम नवरात्रि:माता सिद्धिदात्री | Ninth Navratri on 19 Oct 2026


मां
 दुर्गाजी की नौवीं शक्ति का नाम सिद्धिदात्री हैं। ये सभी प्रकार की सिद्धियों को देने वाली हैं। नवरात्रि-पूजन के नौवें दिन इनकी उपासना की जाती है। इस दिन शास्त्रीय विधि-विधान और पूर्ण निष्ठा के साथ साधना करने वाले साधक को सभी सिद्धियों की प्राप्ति हो जाती है।


अष्टाह्निका विधान शुरू | Ashatahnika Vidhan Start on 16 Nov 2026

वर्ष में तीन बार आने वाले अष्टाह्निक पर्व के बारे में जैन मतावलंबियों की मान्यता है कि इस दौरान स्वर्ग से देवता आकर नंदीश्वर द्वीप में निरंतर आठ दिन तक धर्म कार्य करते हैं। कार्तिक, फाल्गुन, और  आषाढ़ इन तीन महीनों के शुक्ल पक्ष में मनाये जाने इस पर्व पर जो भक्त नंदीश्वर द्वीप तक नहीं पहुंच सकते वे अपने निकट के मंदिरों में पूजा आदि कर लेते हैं। 


भानु सप्तमी | Bhanu Saptami on 25 Jan 2026

सूर्य भगवान को भानु नाम से भी जाना जाता है। रविवार का दिन सूर्य् भगवान को विशेष रुप से सर्मपित माना जाता है। सूर्य को सभी नौ ग्रहों के राजा की उपाधि दी गई है है और इसीलिये इनका स्थान सभी ग्रहों के बीच में रखा गया है। भगवान सूर्य की दो पत्नी है एक नाम छाया और दूसरी का नाम संध्या। भानु सप्तमी पर सूर्य की पूजा करने से विशेष लाभ मिलता है। 


रोहिणी व्रत - जैन समुदाय को मह्त्तवपूर्ण त्यौहार on 28 Dec 2020

त्यौहार हमारे जीवन को खुशियों से भर देते हैं और आगे बढने की प्रेरणा देते हैं। साथ ही इस बात का संदेश भी देते है कि धर्म व ईश्वर से जुड़े रहना कितना अधिक आवश्यक है । और एक ऐसा ही महत्वपूर्ण व्रत-त्यौहार है रोहिणी व्रत।

रोहिणी व्रत - जैन समुदाय को मह्त्तवपूर्ण त्यौहार –

जैन समुदाय में रोहिणी व्रत महत्वपूर्ण व्रत में से एक है। रोहिणी व्रत मुख्य रूप से विवाहित महिलाओं द्वारा अपने पति के लंबे जीवन व खुशहाल वैवाहिक जीवन के लिए रखा जाता है। इस दिन महिला सजती और संवरती है। और इस दिन महिलाओं की खुशी देखते ही बनती है । रोहिणी जैन और हिंदू कैलेंडर में सत्ताईस नक्षत्रों में से एक नक्षत्र है।


त्रिपुर भैरवी जंयती | Tripur Bhairav Jayanti on 23 Dec 2026

ऐसा माना जाता है कि त्रिपुर भैरवी की पूजा अर्चना करने से भक्त के सभी बंधन दूर हो जाते है। सबसे महत्वपूर्ण बात ये है कि इनकी पूजा-अर्चना करने से व्यक्ति को न केवल सफलता बल्कि सर्वसंपदा की भी प्राप्ति होती है। चाहें वो शक्ति-साधना हो अथवा भक्ति-मार्ग हो भक्त किसी भी रुप में देवी मां की उपासना कर सकते है क्योंकि यह दोनो ही तरह से फलदायी सिदध होती है। 


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