सरस्वती बलिदान के दिन सभी भक्त माँ के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट करते हैं| माँ सरस्वती जो विद्या, बुद्धि व् ज्ञान की देवी हैं| सरस्वती बलिदान हिन्दू कैलेंडर के अनुसार आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनाया जाता है| सरस्वती बलिदान पूजन 'उत्तराषाढा नक्षत्र' के दौरान मनाया जाता है|
सरस्वती पूजन के चौथे यानि आखरी दिन सरस्वती विसर्जन किया जाता है| यह नवरात्री की दशमी 'विजयादशमी' के दिन मनाया जाता है| इस दिन को सरस्वती उड़वासन के नाम से भी जाना जाता है| इस दिन माँ सरस्वती की विदाई की जाती है और उनसे अगले साल, हर साल आने की कामना की जाती है| यह पर्व सरस्वती आह्वान, महानवमी से शुरु हो विजयदशमी तक मनाया जाता है|
सोम प्रदोष व्रत विधि
1. व्रत रखने वाले व्यक्ति को व्रत के दिन सूर्य उदय होने से पहले उठना चाहिये।
2. स्नान आदिकर भगवान् शिव का नाम जपते रहना चाहिए|
3. सुबह नहाने के बाद साफ और चमकदार श्वेत वस्त्र पहनें।
हिंदू धर्म में भोलेनाथ को सभी देवताओं से उच्च और श्रेष्ठ माना जाता है. सभी शिव भक्त अपने आराध्य को प्रसन्न करने के लिए व्रत और पूजा करते हैं. हर सोमवार के दिन शिवजी की विशेष पूजा की जाती है. वैसे तो भगवान शिव की पूजा कभी भी की जा सकती है पर शिव चतुर्दशी के दिन भगवान की शिव की पूजा का विशेष महत्व होता है.
1. ब्रह्म मुहूर्त (सूर्य उदय के पूर्व) में उठकर, पीले रंग के वस्त्र धारण करें। भगवन गणेश के व्रत का संकल्प लें|
2. पूजन के समय, एक चौकी रखें उसपे हरे रंग का कपडा बिछाएं और गणेश मूर्ति की स्थापना करें|
3. मूर्ति स्थापना के पश्चात कलश स्थापना करें, एक लोटे में जल लें उसपे आम के पत्ते और श्री फल रखें|
भारतीय संस्कृति में गुरु का महत्व आदिकाल से ही रहा है। सिख धर्म के दस गुरुओं की कड़ी में प्रथम हैं गुरु नानक। गुरु नानक देव से मोक्ष तक पहुंचने के एक नए मार्ग का अवतरण होता है। इतना प्यारा और सरल मार्ग कि सहज ही मोक्ष तक या ईश्वर तक पहुंचा जा सकता है।
चंद्र दर्शन हिंदु धर्म में काफी महत्व रखता है क्योंकि चद्रंमा को देवता समान माना जाता है। चंद्र दर्शन का अर्थ चन्द्रमा का दर्शन करना। यह भारत में बहुत श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। इसे चंद्र दर्शन इसलिये कहा जाता है क्योंकि इसे अमावस्या के बाद देखा जाता है।
टिप्पणीः - भगवान सत्यनारायण व्रत की कथा किसी भी दिन वैसे श्रद्धा भक्ति के साथ की जा सकती है, किन्तु पूर्णिमा तिथि इसके लिए प्रशस्त मानी गई है। इस कथा का श्रवण प्रथम दाम्पत्य जीवन मे बंधने वाले दंपत्ति, प्रथम वधु प्रवेश, में किया जाता है। इसके अतिरिक्त दुःखों से मुक्ति पाने और सुखों मे वृद्धि करने हेतु इस व्रत का अनुष्ठान प्रत्येेक माह की पूर्णिमा तिथि में भी किया जाता है।
मासिक कार्तिगाई एक विशेष मासिक-त्यौहार है जिसे बहुत ही हर्षोल्लास से मनाया जाता है। इस त्यौहार को तमिल-हिंदुओं द्वारा भी बहुत ही जोर-शोर के साथ मनाया जाता है।
भगवान सुब्रहमण्यम का आशीर्वाद -
आदिम और थाई के तमिल महीनों से शुरू होने वाले छह महीनों के लिए अनुष्ठान मनाया जा सकता है। लगातार 12 वर्षों तक माणिक कार्तिगई व्रत का पालन करते हुए कहा जाता है कि भक्तों को महान सौभाग्य और भगवान सुब्रह्मण्यम का आशीर्वाद मिलता है। कार्थिगई व्रत में भोजन से पूरी तरह मना होता है पर आज के समय में ऐसा व्रत रखना संभव नहीं है, तो भक्त फल और दूध का सेवन कर सकते हैं।
बाल दिवस साल १९२५ से मनाया जाने लगा था, लेकिन यूएन ने २० नवंबर १९५४ को बाल दिवस मनाने की घोषणा की थी। विभिन्न देशों में अलग-अलग तारीखों पर बाल दिवस मनाया जाता है। भारत में बाल दिवस १९६४ में प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के निधन के बाद से मनाया जाने लगा। सर्वसहमति से ये फैसला लिया गया कि नेहरू के जन्मदिन पर बाल दिवस मनाया जाएगा।
त्यौहार हमारे जीवन को खुशियों से भर देते हैं और आगे बढने की प्रेरणा देते हैं। साथ ही इस बात का संदेश भी देते है कि धर्म व ईश्वर से जुड़े रहना कितना अधिक आवश्यक है । और एक ऐसा ही महत्वपूर्ण व्रत-त्यौहार है रोहिणी व्रत।
रोहिणी व्रत - जैन समुदाय को मह्त्तवपूर्ण त्यौहार –
जैन समुदाय में रोहिणी व्रत महत्वपूर्ण व्रत में से एक है। रोहिणी व्रत मुख्य रूप से विवाहित महिलाओं द्वारा अपने पति के लंबे जीवन व खुशहाल वैवाहिक जीवन के लिए रखा जाता है। इस दिन महिला सजती और संवरती है। और इस दिन महिलाओं की खुशी देखते ही बनती है । रोहिणी जैन और हिंदू कैलेंडर में सत्ताईस नक्षत्रों में से एक नक्षत्र है।
ऐसी तिथि जो हमारे सब संकटों को हर; जीवन में खुशाली देती है उसे संकष्टी चतुर्थी कहते हैं| इस दिन भगवान् श्री गणेश, विघ्न हरता, गौरी पुत्र की पूजा की जाती है उनके लिए व्रत उपवास भी किया जाता है| हर माह के दोनों पक्षों की चतुर्थी तिथि भगवान गणेश की पूजा की जाती है| हर माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को वैनायकी श्री गणेश चतुर्थी और कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी श्री गणेश चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है। भगवन गणेश जी का सर्प्रथम हर शुभ कार्य या पूजा से पहले पूजन किया जाता है| श्री गणेश प्रथम पूजनीय हैं|