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मासिक कार्तिगाई| on 15 Jul 2020

 

मासिक कार्तिगाई

 

मासिक कार्तिगाई एक विशेष मासिक-त्यौहार है जिसे बहुत ही हर्षोल्लास से मनाया जाता है। इस त्यौहार को तमिल-हिंदुओं द्वारा भी बहुत ही जोर-शोर के साथ मनाया जाता है। 

 

भगवान सुब्रहमण्यम का आशीर्वाद -

 

आदिम और थाई के तमिल महीनों से शुरू होने वाले छह महीनों के लिए अनुष्ठान मनाया जा सकता है। लगातार 12 वर्षों तक माणिक कार्तिगई व्रत का पालन करते हुए कहा जाता है कि भक्तों को महान सौभाग्य और भगवान सुब्रह्मण्यम का आशीर्वाद मिलता है। कार्थिगई व्रत में भोजन से पूरी तरह मना होता है पर आज के समय में ऐसा व्रत रखना संभव नहीं है, तो भक्त फल और दूध का सेवन कर सकते हैं।



महानंदा नवमी व्रत on 21 Feb 2021

माघ माह के शुक्ल पक्ष में प्रतिपदा तिथि से गुप्त नवरात्र आरंभ होता है. गुप्त नवरात्रि की नवमी तिथि को श्री महानंदा नवमी व्रत किया जाता है. मान्यताओं के अनुसार गुप्त नवरात्र में नवमी के दिन महानंदा नवमी की पूजा, व्रत विधि विधान से करने से दुख दरिद्र समाप्त हो जाते है और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है. इस व्रत को करने से मनुष्य संपन्नता पूर्वक अपना जीवन व्यतीत करके अंत में विष्णु लोक को प्राप्त होता है. हिंदू धर्म में महानंदा नवमी के व्रत को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है. महानंदा नवमी का व्रत करने से सभी प्रकार के रोग और कष्ट दूर हो जाते हैं



पूर्णिमा व्रत on 28 Mar 2021

पूर्णिमा व्रत का महत्व- 

हर महीने की शुक्ल पक्ष तिथि को पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है. हिंदू पंचांग के अनुसार शुक्ल पक्ष की अंतिम 15वीं तिथि पूर्णिमा होती है. इस दिन आकाश में चंद्रमा पूर्ण रूप से दिखाई देता है. हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है. पूर्णिमा के दिन चंद्रमा पक्षबली होकर बहुत बलवान हो जाता है. पौराणिक धर्म ग्रंथों में बताया गया है कि चंद्रमा को पूर्णिमा तिथि सबसे अधिक प्रिय होती है. पूर्णिमा के दिन पूजा-पाठ दान और किसी पवित्र नदी में स्नान करना बहुत ही शुभ कारी माना जाता है. वैशाख, माघ और शुक्लपक्ष पूर्णिमा के दिन किसी भी तीर्थ स्थल पर जाकर स्नान  और दान करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है. 

पूर्णिमा व्रत पूजन विधि- 

1. हमारे धर्म शास्त्रों में बताया गया है कि पूर्णिमा तिथि को किसी पवित्र नदी में स्नान करना शुभ होता है. 

2. अगर आप किसी नदी में स्नान नहीं कर सकते हैं तो अपने नहाने के पानी में थोड़ा सा गंगाजल मिलाकर घर पर भी स्नान कर सकते हैं. 

3. पूर्णिमा तिथि पर पित्र तर्पण करना भी बहुत शुभ माना जाता है. 

4. पूर्णिमा के दिन प्रातः काल स्नान करने के पश्चात संकल्प लेकर पूरे विधि विधान से चंद्र देव की पूजा अर्चना करें. 

5. चंद्रमा की पूजा करते समय नीचे दिए गए मंत्र का जाप करें:

ओम सोम सोमाय नमः 

6. भगवान शिव को चंद्रमा अत्यंत प्रिय है. चंद्रमा, भगवान् शिव की जटाओं में विराजमान रहता है. इसीलिए पूर्णिमा के दिन चंद्रमा की पूजा के साथ-साथ भगवान शिव की पूजा करने से मनचाहे फलों की प्राप्ति होती है. 

7. चंद्रमा एक स्त्री प्रधान ग्रह है. इसलिए इसे मां पार्वती का प्रतीक भी माना जाता है.

8. अगर आप पूर्णिमा तिथि के दिन भगवान शिव के साथ-साथ मां पार्वती और संपूर्ण शिव परिवार की पूजा करते हैं तो इससे आपको सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाएंगी.

 


 


विजया एकादशी | Vijaya Ekadashi on 13 Feb 2026

फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष एकादशी के दिन विजया एकादशी का व्रत किया जाता है. ऐसा माना जाता है कि इस दिन भगवान राम ने लंका पर विजय पाने के लिए समुद्र के किनारे बैठकर भगवान  की पूजा की थी. विजया एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है. विजया एकादशी के दिन श्रद्धा पूर्वक भगवान विष्णु की पूजा करने से सभी कार्यों में सफलता मिलती है और सभी प्रकार के दोषों का नाश हो जाता है. विजय एकादशी का व्रत करने से मनुष्य को मनचाहा वरदान मिलता है. भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी के पत्तों का इस्तेमाल जरूर करें.  



प्रदोष व्रत | Pradosh Vrat on 30 Mar 2026

प्रदोष का अर्थ

प्रदोष का अर्थ है "भरी दोष"| चन्द्रमा को श्रेय रोग होने के कारण चंद्र देव अंतिम साँसे गिन रहे थे| तभी भगवान् शंकर ने चन्द्रमा को पुनर्जीवन देकर मस्तक पर धारण किया| चंद्र मृत्यु के निकट जाकर भी भगवान् शिव की कृपा से जीवित रहे और पूरनमाशी के दिन तक पूर्णता स्वस्थ होक प्रकट हुए|

प्रदोष व्रत महत्व

जीवन में शारीरिक मानसिक एवं आधयात्मिक रूप से मज़बूत होने के लिए प्रदोष व्रत कारगर मन गया है|प्रदोष व्रत एक ऐसा व्रत है जो मृत्यु के निकट पोहोंचे हुए मनुष्य को जीवन दान देता है| प्रदोष व्रत हर माह के दोनों पक्षों की त्रयोदशी को मनाया जाता है| भगवान् शिव की विशेष और अनंत कृपा पाने के लिए यह व्रत कारगर है| हिन्दू धर्म शास्त्रों में इस व्रत का विशेष महत्व बताया गया है| इस व्रत को हर माह के दोनों पक्षों को करने से व्यक्ति के जीवन के सब कष्टों का निवारण होजाता है| प्रदोष व्रत का अपना महत्व है, परन्तु दिन के अनुसार पड़ने वाले प्रदोष व्रत का अपना अलग महत्व होता है|



महाशिवरात्रि | Mahashivratri on 15 Feb 2026

जानिए क्या है महाशिवरात्रि का रहस्य

हिंदू धर्म में महाशिवरात्रि के पर्व को बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है. शास्त्रों में शिवरात्रि को भगवान शिव की पूजा और आराधना का मुख्य दिन माना गया है. महाशिवरात्रि का पर्व फाल्गुन कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाता हैभोलेनाथ को विश्व की सर्वोच्च शक्तियों में से एक माना जाता है. हमारे वेद पुराणों और भाषा ग्रंथों में शिव की महिमा और गरिमा का विस्तृत वर्णन किया गया है. आज हम आपको इस आर्टिकल के द्वारा महाशिवरात्रि के रहस्य से अवगत कराने जा रहे हैं



मासिक शिवरात्रि on 10 Feb 2021

हिन्दू धर्म में भोलेनाथ की पूजा को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है. ऐसा माना जाता है की जो भी भक्त सच्चे मन और आस्था से भोलेनाथ की पूजा अर्चना करता है उसके जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं. 


दर्श अमावस्या | Darsha Amavasya on 17 Feb 2026

दर्श अमावस्या का महत्व

हिंदू शास्त्रों के अनुसार दर्श अमावस्या के दिन पूरी रात चंद्रमा आकाश में छुपा रहता है. मान्यताओं के अनुसार परिवार की सुख समृद्धि और उद्धार की कामना के लिए दर्श अमावस्या का दिन बहुत महत्वपूर्ण होता है. दर्श अमावस्या के दिन पूर्वजों की पूजा करना भी शुभ कार्य होता है. इस दिन चंद्र दर्शन करना बहुत आवश्यक होता है. दर्श अमावस्या के दिन चंद्रमा को देखने के पश्चात ही उपवास आदि रखने का नियम है. हमारे शास्त्रों के अनुसार जो भी व्यक्ति दर्श अमावस्या के दिन सच्चे मन से चंद्रदेव की प्रार्थना करता है चंद्रदेव उसकी प्रार्थना स्वीकार करते हैं और उसकी सभी मनोकामनाएं को पूर्ण करते हैं



विनायक चतुर्थी| on 18 Nov 2020

गणअर्थात पवित्रक, ‘पतिअर्थात स्वामी, ‘गणपतिअर्थात पवित्रकों के स्वामी।

भादो की शुक्ल पक्ष चतुर्थी

शिव-पार्वती के पुत्र गणेश जन्म की कथा वर्णन से पता चलता है की गणेश का जन्म होकर निर्माण बल्कि पार्वती जी के शरीर से उतारी गई हल्दी से हुआ था। स्नान पूर्व गणेश को अपने रक्षक के रूप में बैठा कर वो चली गईं और शिव जी इस बात से अनभिज्ञ थे। पार्वती से मिलने में गणेश को अपना विरोधी मानकर उनका सिर काटकर अपने रास्ते से हटा दिया।


जब वास्तविकता का ज्ञान हुआ तो अपने गणो को उन्होंने आदेश दिया की उस पुत्र का सिर लाओ जिसके ओर उसकी माता की पीठ हो। शिव-गणो को एक हाथी का पुत्र जब इस दशा में मिला तो वो उसका सिर ही ले आए और शिव जी ने हाथी का सिर उस बालक के सिर पर लगाकर बालक को पुनर्जीवित कर दिया। यह घटना भाद्रमास मास की चतुर्थी को हुई थी इसलिए इसी को गणेश जी का जन्म मानकर इस तिथि को गणेश चतुर्थी माना जाता है।



स्कन्द षष्टी/चंपा षष्टी | Skand Shashti on 16 Sep 2026

स्कन्द षष्टी/चंपा षष्टी महत्व

1.स्कन्द षष्टी दक्षिणी भारत में मनाये जाने वाला एक बहुत ही महत्वपूर्ण पर्व है| इस दिन गौरी शंकर भगवान के पुत्र कार्तिकेय  की पूजा करि जाती है

2.भगवान् स्कन्द को मुरुगन,कार्तिकेयन, सुब्रमण्या के नाम से भी जाना जाता है| यह भाद्रपद मॉस के शुक्ल पक्ष की षष्टी तिथि को मनाया जाता है| कार्तिकेय के पूजन से रोग, दुःख और दरिद्रता का निवारण होता है। 

3.कथाओं के अनुसार भगवान शिव के तेज से उत्पन्न छह मुख वाले बालक स्कन्द की छह कृतिकाओं ने स्तनपान करा कर रक्षा की थी, इसीलिए कार्तिकेय' नाम से पुकारा जाने लगा। 

4.कार्तिकेय भगवान के अधिकतर भक्त तमिल हिन्दू हैं, इसीलिए इनकी पूजा भारत के तमिलनाडु में विशेष तौर पर होती है। भगवान स्कंद का सबसे प्रसिद्ध मंदिर भी तमिलनाडु में ही है।



भानु सप्तमी on 15 Aug 2021

सूर्य भगवान को भानु नाम से भी जाना जाता है। रविवार का दिन सूर्य् भगवान को विशेष रुप से सर्मपित माना जाता है। सूर्य को सभी नौ ग्रहों के राजा की उपाधि दी गई है है और इसीलिये इनका स्थान सभी ग्रहों के बीच में रखा गया है। भगवान सूर्य की दो पत्नी है एक नाम छाया और दूसरी का नाम संध्या। भानु सप्तमी पर सूर्य की पूजा करने से विशेष लाभ मिलता है। आइये और जानते है इस पवित्र भानु व्रत-त्यौहार के बारे में विस्तार से -

 

भानु सप्तमी का क्या अर्थ है?

 

जब सप्तमी तिथि और रविवार एक साथ पडते हैंतो इसे भानु सप्तमी के रूप में जाना जाता है। इस दिन को सूर्य सप्तमी या वैवस्वतमा सप्तमी के रूप में भी जाना जाता है। इस दिन सूर्योदय से पहले भक्तगण नदी में स्नान करते हैं और फिर भगवान सूर्य की पूजा आराधना करते हैं। सूर्य की किरणों का स्वागत करने के लिए महिलाएं अपने घरों के बाहर आंगन में रंगोली बनाती है। इस दिन भगवान सूर्य को प्रसाद में खीर अर्पित की जाती है। यह खीर 12 अनाजों से बनती है। 


रोहिणी व्रत | Rohini Vrat on 14 Jun 2026

त्यौहार हमारे जीवन को खुशियों से भर देते हैं और आगे बढने की प्रेरणा देते हैं। साथ ही इस बात का संदेश भी देते है कि धर्म व ईश्वर से जुड़े रहना कितना अधिक आवश्यक है । और एक ऐसा ही महत्वपूर्ण व्रत-त्यौहार है रोहिणी व्रत।

रोहिणी व्रत - जैन समुदाय को मह्त्तवपूर्ण त्यौहार –

जैन समुदाय में रोहिणी व्रत महत्वपूर्ण व्रत में से एक है। रोहिणी व्रत मुख्य रूप से विवाहित महिलाओं द्वारा अपने पति के लंबे जीवन व खुशहाल वैवाहिक जीवन के लिए रखा जाता है। इस दिन महिला सजती और संवरती है। और इस दिन महिलाओं की खुशी देखते ही बनती है । रोहिणी जैन और हिंदू कैलेंडर में सत्ताईस नक्षत्रों में से एक नक्षत्र है।


जानिए क्या है गुप्त नवरात्री की महिमा on 19 Jan 2026

गुप्त नवरात्री का महत्त्व-

माँ दुर्गा को शक्ति का प्रतीक माना जाता है. माँ दुर्गा की पूजा वैसे तो नियमित रूप से की जाती है, पर नवरात्र में माँ दुर्गा की पूजा का खास महत्त्व होता है. वैसे तो चैत्र और अश्विन महीने में पुरे नौ दिनों तक माँ दुर्गा के नौ रूपों की आराधना का नियम है. इन नवरात्र को चैत्र नवरात्र और शारदीय नवरात्र कहा जाता है. पर चैत्र नवरात्र और शारदीय नवरात्र के अलावा भी साल में दो नवरात्र और मनाये जाते हैं. जिनमें से मां दुर्गा की दस महाविद्याओं की पूजा करने का नियम है. जो लोग तंत्र विद्या में आस्था रखते है उनके लिए यह नवरात्र बहुत महत्वपूर्ण होते हैं. इस नवरात्र को गुप्त नवरात्र कहा जाता है. माघ मास के ये गुप्त नवरात्र इस बार बसंत पंचमी से पहले 25 जनवरी से लेकर 4 फरवरी तक मनाए जाएंगे. आपको जानकर हैरानी होगी कि शास्त्रों में गुप्त नवरात्रि का महत्व सामान्य नवरात्रि से अधिक माना गया है. ये नवरात्र विशेष रूप से साधकों के लिए बहुत महत्वपूर्ण होते हैं गुप्त नवरात्री में साधक को सिद्धिया प्राप्त होती हैं. गुप्त नवरात्री में साधक दस महाविद्याओं की उपासना करके मनोवांछित फल प्राप्त कर सकते हैं. आज हम आपको इस आर्टिकल के माध्यम से गुप्त नवरात्र के बारे विशेष जानकारी देने जा रहे हैं.


सत्यनारायण व्रत on 31 Oct 2020

टिप्पणीः - भगवान सत्यनारायण व्रत की कथा किसी भी दिन वैसे श्रद्धा भक्ति के साथ की जा सकती है, किन्तु पूर्णिमा तिथि इसके लिए प्रशस्त मानी गई है। 


पूर्णिमा व्रत महत्व| on 28 Jan 2021

पूर्णिमा व्रत के लाभ और पूजन विधि|


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