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कौन है माता बगलामुखी, जानिए इनका स्वरुप on 01 May 2020 (Friday)

कौन है माता बगलामुखी, जानिए इनका स्वरुप 

 1- बगलामुखी माता पीतांबरा है. यह स्वर्ण पीठ पर विराजमान रहती हैं. बगलामुखी मां की एक हाथ में मुकदर और दूसरे में  शत्रु की जीवहा विराजमान है. 

2- मां बगलामुखी बहुत शीघ्र फल प्रदान करती हैं. कलयुग में बगलामुखी मां की पूजा आराधना और साधना अलग-अलग रूपों में की जा रही है. 

 
3- छत्तीसगढ़ में डोंगरगढ़ की पहाड़ी पर मां बमलेश्वरी के नाम से इनकी पूजा की जाती है. इनकी स्तंभन शक्ति का ही प्रभाव है कि छत्तीसगढ़ में आज तक कभी भी कोई बड़ा भूकंप या अन्य प्राकृतिक आपदा नहीं आई. 
 
4- इनके मंत्र का जाप करने से शत्रु का विनाश हो जाता है. भारतीय तंत्र विज्ञान में बताया गया है बगुलामुखी महाशक्ति अद्भुत गुण तत्व अपने अंदर लिए हुए हैं. जिसमें मनुष्य जीवन की पूर्णता और प्रकृति के रहस्य छिपे हुए हैं. 
 
5- बगलामुखी महाविद्या संसार की सबसे श्रेष्ठ महाविद्या मानी जाती है. पुराने समय से ही जो भी महान पुरुष पैदा हुए हैं या जिन राजा महाराजाओं ने निष्कल तक राज्य किया है उनकी जीत और सफलता का कारण मां बगलामुखी की आराधना रही है. 
 
6- बगुला शक्ति का मूल सूत्र है "अथर्व प्राण सूत्र” यह प्राण सूत्र हर प्राणी में सोई अवस्था में विराजमान रहता है. जिसे बगलामुखी की साधना करने से जगाया जा सकता है. 
 
7- जब यह प्राण सूत्र जागता है तो साधक स्तंभन वशीकरण और कीलन की शक्ति प्राप्त होती है और वह अपने सामने के व्यक्ति को ही नहीं बल्कि दूर स्थान पर मौजूद व्यक्ति को भी आसानी से सम्मोहित कर सकता है. 
 
8- तोड़ल तंत्र में बताया गया है बगलामुखी साधना तंत्रोक्त पद्धति के द्वारा सिद्ध करना चाहिए. रुद्रयामल तंत्र में स्पष्ट रूप से लिखित है कि बगलामुखी साधना की पीठ पद्धति अपने आप में सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है. 
 
9- महा योगी मच्छिंद्रनाथ ने योग विद्या द्वारा खुद भगवती बगलामुखी की सिद्धि kगोपनीय विधि और रहस्य को पाया था. बगुलामुखी  स्वयं रोजाना मत्स्येंद्रनाथ के सामने प्रकट होती थी और योगीराज उन्हें स्वयं अपने हाथों से नैवेद्य अर्पण करते थे. 
 
10- योगीनाथ मछिंद्रनाथ ने ताड़ के पत्तों पर बरगा को सिद्ध करके एक अद्वितीय ग्रंथ की रचना की थी. जो इस महाविद्या की सिद्धि के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है. 
 
11- यह ग्रंथ काफी दिनों तक गुप्त रहा, पर कुछ समय पहले तिब्बत के किसी मठ में इसकी एक प्रति प्राप्त हुई है. तिब्बत के बहुत सारे लामा इस पद्धति से बगुलामुखी को सिद्ध करके अद्वितीय आचार्य और योगी बने हैं. 
 
12- दुर्लभ ग्रंथ मंत्र में लिखा गया है कि "ब्रह्मास्त्रम च प्रवक्ष्यामि सदस्य प्रत्यय करनाम यस्य समृन मात्रेण पवनोपि स्थिरायते " 
 
13- बगलामुखी मंत्रों को सिद्ध करने के बाद सिर्फ स्मरण करने से तेज हवा रुक जाती है. बगलामुखी महाविद्या पीतांबरी पटधारी है. इसलिए इसे पीतांबरा भी कहते हैं. 
 
14- यह ब्रह्मास्त्र की अचूक क्षमता का बल और शत्रुओं को सहज स्तंभित करने वाली शक्ति लेकर पैदा होती है. स्वर्ण आसन पर स्वर्णिम आभा के साथ आसीन पीत वस्त्र और मस्तक पर चंद्रमा धारण करने वाली त्रिनेत्री बगलामुखी माता का संपूर्ण स्वरूप मात्र में है. 
 
15- साधक के दुश्मन चाहे बाहरी हो या आंतरिक माता बगलामुखी उनका नाश करती हैं. माता बगलामुखी में 16 शक्तियां विराजमान है. मंगल, स्तम्भिनी, जृम्भिणि,  मोहिनी, वश्या, बलाय, अचलाय, मंडरा, कल्पमासा, धात्री, कलना, कालकर्षिणि, भ्रामिका, मन्दगमना, भोगस्थ, भाविका  
 
16- जिस तरह घोड़े के मुंह पर लगाम लगाकर उसे नियंत्रण में रखा जाता है. उसी तरह बगलामुखी की सफल साधना के लिए साधक दुश्मनों को अपने वश में रख सकता है, पर ध्यान रहे कभी भी मां बगलामुखी की उपासना किसी गलत कार्य के लिए नहीं करनी चाहिए.
 
बगलामुखी तंत्र मंत्र और प्रभाव शक्ति को विस्तार से जानने से पहले हमें तंत्र को जानना बहुत जरूरी है. शास्त्रों में तंत्र शब्द का इस्तेमाल कई बार किया गया है. तंत्र का अर्थ है व्यवस्थित और सुनियोजित ढंग से किया गया कार्य….. तंत्र विद्या द्वारा  नामुमकिन कार्य को भी मुमकिन किया जा सकता है. बगलामुखी महाविद्या के तीन प्रमुख उपासक थे. सबसे पहले सृष्टिकर्ता ब्रह्मा, दूसरे जगत के पालन करता भगवान विष्णु और तीसरे भगवान परशुराम. इनके अलावा सनक, नंदन, सनातन, सनत कुमार, देवर्षि नारद, सांख्यायन,  परमहंस द्रोणाचार्य, युधिष्ठिर, राजा नल, लंकापति रावण, विश्वामित्र आदि भी मां बगलामुखी के विशेष उपासक थे. कालांतर में स्वामी शिव हरि बाबा स्वामी, विशुद्धानंद, दतिया के श्री स्वामी जी महाराज आदि ने बगुलामुखी और धूमावती तंत्र को सिद्ध करके लोगों का कल्याण करने के लिए बहुत सारे कार्य किए.  शास्त्रों में बताया गया है की बगलामुखी तंत्र की शक्ति के द्वारा विधाता द्वारा निर्मित कार्य को भी बदला जा सकता है. तंत्र प्रकृति और ब्रह्मांड से तादात्म्य स्थापित करने का एक बहुत उत्तम तरीका है.