दर्शवला अमावस्या सूर्यास्त के बाद शुरू होकर पूरी रात चलती है और इस रात में चाँद के दर्शना नहीं होते है। यदि आपको अपने पूर्वजों की परलोकगमन की तिथियाँ मालूम नहीं हैं तो आप इस दिन शुभ दिन यानि दर्शवाल अमावस्या के दिन श्राद्ध-कर्म कर सकते हैं और उनका विशेष आशीर्वाद प्राप्त कर सकते है।
चंद्र दर्शन हिंदु धर्म में काफी महत्व रखता है क्योंकि चद्रंमा को देवता समान माना जाता है। चंद्र दर्शन का अर्थ चन्द्रमा का दर्शन करना। यह भारत में बहुत श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। इसे चंद्र दर्शन इसलिये कहा जाता है क्योंकि इसे अमावस्या के बाद देखा जाता है।
दशहरा अर्थात बुराई पर अच्छाई की जीत। दशहरा एक ऐसा पर्व है, जो हमे यह विश्वास दिलाता है की बुराई कितनी भी तेज़ी से आगे बढ़ जाए परन्तु अंत में जीत अच्छाई की ही होती है दशहरा के आते ही बहुत सी जगहों पर मेले लगने शुरू हो जाते है, कई जगह रामलीला भी होती है।
मेरु त्रयोदशी जैन धर्म से संबंधित एक विशेष त्यौहार है । इसे मनाने के पीछे का उद्देश्य तीर्थंकर ऋषभ देव की निर्वाण प्राप्ति है। मेरु त्रयोदशी का शुभ दिन रसभा देव के निर्वाण कल्याणक के दिन के रूप में भी जाना जाता है। इसी विशेष दिन पर वर्तमान तीर्थंकर ऋषभ देव ने अष्टापद पर्वत पर निर्वाण प्राप्त किया था और तभी से इस दिन का बहुत ही अधिक महत्तव है।
मासिक कार्तिगाई एक विशेष मासिक-त्यौहार है जिसे बहुत ही हर्षोल्लास से मनाया जाता है। इस त्यौहार को तमिल-हिंदुओं द्वारा भी बहुत ही जोर-शोर के साथ मनाया जाता है। भगवान सुब्रहमण्यम का आशीर्वाद - आदिम और थाई के तमिल महीनों से शुरू होने वाले छह महीनों के लिए अनुष्ठान मनाया जा सकता है। लगातार 12 वर्षों तक माणिक कार्तिगई व्रत का पालन करते हुए कहा जाता है कि भक्तों को महान सौभाग्य और भगवान सुब्रह्मण्यम का आशीर्वाद मिलता है। कार्थिगई व्रत में भोजन से पूरी तरह मना होता है पर आज के समय में ऐसा व्रत रखना संभव नहीं है, तो भक्त फल और दूध का सेवन कर सकते हैं।
क्या है मौनी अमावस्या -
मौनी अमावस्या को 'मौना अमावस्या' के रूप में भी जाना जाता है और यह 'माघ के हिंदू महीने के दौरान अमावस्या के दिन मनाया जाने वाला एक बहुत ही महत्वपूर्ण त्यौहार है।ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार यह त्यौहार जनवरी-फरवरी के महीने में आता है। इस दिन हिंदु लोग मौन रहने का अभ्यास करते है क्योंकि मौन रहने से शांति का आभास होता है।
भादो की शुक्ल पक्ष चतुर्थी
शिव-पार्वती के पुत्र गणेश जन्म की कथा वर्णन से पता चलता है की गणेश का जन्म न होकर निर्माण बल्कि पार्वती जी के शरीर से उतारी गई हल्दी से हुआ था। स्नान पूर्व गणेश को अपने रक्षक के रूप में बैठा कर वो चली गईं और शिव जी इस बात से अनभिज्ञ थे। पार्वती से मिलने में गणेश को अपना विरोधी मानकर उनका सिर काटकर अपने रास्ते से हटा दिया।
शरद ऋतु समाप्त होते ही मनभावन वसंत ऋतु का आगमन होता है। बसंत पंचमी का त्योहार उमंग और उत्साह से भरपूर होता है।पुराने समय से ही बसंत पंचमी का त्योहार उल्लास के साथ मनाया जाता रहा है। आज के समय में भारत के अलग-अलग भागों में यह त्यौहार अलग-अलग रूपों में मनाया जाता है।