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दर्शवला अमावस्या | Darshvala Amavasya on 18 Jan 2026

दर्शवला अमावस्या सूर्यास्त के बाद शुरू होकर पूरी रात चलती है और इस रात में चाँद के दर्शना नहीं होते है। यदि आपको अपने पूर्वजों की परलोकगमन की तिथियाँ मालूम नहीं हैं तो आप इस दिन शुभ दिन यानि दर्शवाल अमावस्या के दिन श्राद्ध-कर्म कर सकते हैं और उनका विशेष आशीर्वाद प्राप्त कर सकते है।


चंद्र दर्शन की व्रत विधि और विशेष महत्व on 16 Jun 2026

चंद्र दर्शन हिंदु धर्म में काफी महत्व रखता है क्योंकि चद्रंमा को देवता समान माना जाता है। चंद्र दर्शन का अर्थ चन्द्रमा का दर्शन करना। यह भारत में बहुत श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। इसे चंद्र दर्शन इसलिये कहा जाता है क्योंकि इसे अमावस्या के बाद देखा जाता है।


Vinayak Chaturthi on 17 Jul 2026

1.   ब्रह्म मुहूर्त (सूर्य उदय के पूर्व) में उठकर, पीले रंग के वस्त्र धारण करें। भगवन गणेश के व्रत का संकल्प लें|

2.   पूजन के समय, एक चौकी रखें उसपे हरे रंग का कपडा बिछाएं और गणेश मूर्ति की स्थापना करें|

3.   मूर्ति स्थापना के पश्चात कलश स्थापना करें, एक लोटे में जल लें उसपे आम के पत्ते और श्री फल रखें|


स्कन्द षष्टी/चंपा षष्टी | Skand Shashti on 24 Jan 2026

1. स्कन्द षष्टी दक्षिणी भारत में मनाये जाने वाला एक बहुत ही महत्वपूर्ण पर्व है| इस दिन गौरी शंकर भगवान के पुत्र कार्तिकेय  की पूजा करि जाती है|

2. भगवान् स्कन्द को मुरुगन,कार्तिकेयन, सुब्रमण्या के नाम से भी जाना जाता है| यह भाद्रपद मॉस के शुक्ल पक्ष की षष्टी तिथि को मनाया जाता है| कार्तिकेय के पूजन से रोग, दुःख और दरिद्रता का निवारण होता है।

3. कथाओं के अनुसार भगवान शिव के तेज से उत्पन्न छह मुख वाले बालक स्कन्द की छह कृतिकाओं ने स्तनपान करा कर रक्षा की थी, इसीलिए कार्तिकेय' नाम से पुकारा जाने लगा।


भानु सप्तमी | Bhanu Saptami on 18 Aug 2026

सूर्य भगवान को भानु नाम से भी जाना जाता है। रविवार का दिन सूर्य् भगवान को विशेष रुप से सर्मपित माना जाता है। सूर्य को सभी नौ ग्रहों के राजा की उपाधि दी गई है है और इसीलिये इनका स्थान सभी ग्रहों के बीच में रखा गया है। भगवान सूर्य की दो पत्नी है एक नाम छाया और दूसरी का नाम संध्या। भानु सप्तमी पर सूर्य की पूजा करने से विशेष लाभ मिलता है। 


दशहरा | Dusshera on 20 Oct 2026

दशहरा अर्थात  बुराई पर अच्छाई की जीत।  दशहरा एक ऐसा पर्व है, जो हमे यह विश्वास दिलाता है की बुराई कितनी भी तेज़ी से आगे बढ़ जाए परन्तु अंत में जीत अच्छाई की ही होती है दशहरा के आते ही बहुत सी जगहों पर मेले लगने शुरू हो जाते है, कई जगह रामलीला भी होती है। 


शनि प्रदोष व्रत | Shani Pradosh Vrat on 27 Jun 2026

प्रदोष का अर्थ है "भारी दोष"| चन्द्रमा को श्रेय रोग होने के कारण चंद्र देव अंतिम साँसे गिन रहे थे.  तभी भगवान् शंकर ने चन्द्रमा को पुनर्जीवन देकर मस्तक पर धारण किया| चंद्र मृत्यु के निकट जाकर भी भगवान् शिव की कृपा से जीवित रहे और पूरनमाशी के दिन तक पूर्णता स्वस्थ होक प्रकट हुए. 


प्रदोष व्रत महत्व

जीवन में शारीरिक मानसिक एवं आधयात्मिक रूप से मज़बूत होने के लिए प्रदोष व्रत कारगर माना गया है|प्रदोष व्रत एक ऐसा व्रत है जो मृत्यु के निकट पोहोंचे हुए मनुष्य को जीवन दान देता है| प्रदोष व्रत हर माह के दोनों पक्षों की त्रयोदशी को मनाया जाता है| भगवान् शिव की विशेष और अनंत कृपा पाने के लिए यह व्रत कारगर है| हिन्दू धर्म शास्त्रों में इस व्रत का विशेष महत्व बताया गया है| इस व्रत को हर माह के दोनों पक्षों को करने से व्यक्ति के जीवन के सब कष्टों का निवारण होजाता है| प्रदोष व्रत का अपना महत्व है, परन्तु दिन के अनुसार पड़ने वाले प्रदोष व्रत का अपना अलग महत्व होता है|


मेरु त्रयोदशी | Meru Trayodashi on 16 Jan 2026

मेरु त्रयोदशी जैन धर्म से संबंधित एक विशेष त्यौहार है । इसे मनाने के पीछे का उद्देश्य तीर्थंकर ऋषभ देव की निर्वाण प्राप्ति है। मेरु त्रयोदशी का शुभ दिन रसभा देव के निर्वाण कल्याणक के दिन के रूप में भी जाना जाता है। इसी विशेष दिन पर वर्तमान तीर्थंकर ऋषभ देव ने अष्टापद पर्वत पर निर्वाण प्राप्त किया था और तभी से इस दिन का बहुत ही अधिक महत्तव है।


नवरात्रि पारण | Navratri Paran on 20 Oct 2026

आश्विन शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से नवरात्रि की शुरुआत होती है और दशमी तिथि के दिन नवरात्रि का पारण किया जाता है| नौ दिन तक दुर्गा माँ की पूजा आराधना कर के, दशमी तिथि के दिन माँ का विसर्जन किया जाता है| दशमी तिथि के दिन ही माँ ने महिषासुर नामक दैत्य का वध किया था| दशमी के दिन ही नवरात्री के व्रतों का पारण किया जाता है|


दुर्गा विसर्जन | Durga Visarjan on 20 Oct 2026

 
 बंगाल में दशहरा और नवरात्री का पर्व एक बहुत ही अलग और खूबसूरत तरीके से मनाया जाता है।  नौ रात और दस दिनों तक मनाये जाने वाला यह एक बंगाल का ख़ास उत्सव है।   इस त्यौहार के लिए सभी लोग बहुत सी तरह तरह की खरीदारियां करते है।  चाहे वह घर के लिए हो या त्यौहार को मनाने से जुडी हो।  हर दिन एक नए उत्साह, उमंग व् रीती रिवाज़ों के साथ ये पर्व बंगाल में मनाया जाता है। 
 


मासिक कार्तिगाई | Masik Karthigai on 27 Jan 2026

मासिक कार्तिगाई एक विशेष मासिक-त्यौहार है जिसे बहुत ही हर्षोल्लास से मनाया जाता है। इस त्यौहार को तमिल-हिंदुओं द्वारा भी बहुत ही जोर-शोर के साथ मनाया जाता है।

भगवान सुब्रहमण्यम का आशीर्वाद -

आदिम और थाई के तमिल महीनों से शुरू होने वाले छह महीनों के लिए अनुष्ठान मनाया जा सकता है। लगातार 12 वर्षों तक माणिक कार्तिगई व्रत का पालन करते हुए कहा जाता है कि भक्तों को महान सौभाग्य और भगवान सुब्रह्मण्यम का आशीर्वाद मिलता है। कार्थिगई व्रत में भोजन से पूरी तरह मना होता है पर आज के समय में ऐसा व्रत रखना संभव नहीं हैतो भक्त फल और दूध का सेवन कर सकते हैं।


मौनी अमावस्या | Mauni Amavasya on 18 Jan 2026

क्या है मौनी अमावस्या -

मौनी अमावस्या को 'मौना अमावस्याके रूप में भी जाना जाता है और यह 'माघ के हिंदू महीने के दौरान अमावस्या के दिन मनाया जाने वाला एक बहुत ही महत्वपूर्ण त्यौहार है।ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार यह त्यौहार जनवरी-फरवरी के महीने में आता है। इस दिन हिंदु लोग मौन रहने का अभ्यास करते है क्योंकि मौन रहने से शांति का आभास होता है।


दर्शा अमावस्या on 04 Feb 2019


श्री विनायक चतुर्थी | Vinayak Chaturthi on 20 Apr 2026

भादो की शुक्ल पक्ष चतुर्थी

शिव-पार्वती के पुत्र गणेश जन्म की कथा वर्णन से पता चलता है की गणेश का जन्म होकर निर्माण बल्कि पार्वती जी के शरीर से उतारी गई हल्दी से हुआ था। स्नान पूर्व गणेश को अपने रक्षक के रूप में बैठा कर वो चली गईं और शिव जी इस बात से अनभिज्ञ थे। पार्वती से मिलने में गणेश को अपना विरोधी मानकर उनका सिर काटकर अपने रास्ते से हटा दिया।



बसंत पंचमी | Basant Panchami on 23 Jan 2026

शरद ऋतु समाप्त होते ही मनभावन वसंत ऋतु का आगमन होता है। बसंत पंचमी का त्योहार उमंग और उत्साह से भरपूर होता है।पुराने समय से ही बसंत पंचमी का त्योहार उल्लास के साथ मनाया जाता रहा है। आज के समय में भारत के अलग-अलग भागों में यह त्यौहार अलग-अलग रूपों में मनाया जाता है।


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