महिलाओं के लिए रखता है विशेष महत्व
आज पूरे विश्व में भारतीय संस्कृति की अपनी एक अलग पहचान है। भारत में पूरे वर्ष विभिन्न प्रकार के त्यौहार मनाए जाते है। ये त्यौहार कभी धार्मिक दृष्टि से तो कभी कला और सांस्कृतिक दृष्टि से अहम होते है। इसके अलावा कई छठ पूजा और गणगौर जैसे कई पारंपरिक पर्व केवल कुछ राज्यों में ही मनाए जाते है। गणगौर का पर्व राजस्थान का मुख्य पर्व है। राजस्थान के अलावा गुजरात, पश्चिम बंगाल और मध्य प्रदेश के भी कुछ जिलों में यह पर्व मनाया जाता है।
महिलाओं के लिए विशेष है यह पर्व
गणगौर का विशेष पर्व होली के दूसरे दिन से शुरु हो जाता है और चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तक चलता है। यह पर्व मूलरुप से महिलाओं के लिए बेहद अहम होता है। हर उम्र की लड़कियां और महिलाएं बड़े ही धूम-धाम से यह पर्व मनाते है। विवाहित महिलाएं अपने पति की दीर्घायु के लिए यह पूजा करती है, वहीं कुंवारी कन्याएं अच्छे वर की कामना के लिए गणगौर पूजती है।
यह पर्व नवविवाहित महिलाओं के लिए भी विशेष होता है। विवाह के पश्चात पहले गणगौर पर महिलाएं अपने मायके में यह पूजा करती है। होली के दूसरे दिन विवाहित स्त्री ससुराल से अपने घर चली जाती है एवं आठ दिन के पश्चात अपने पति के साथ ससुराल लौटती है।
गणगौर पूजा का शुभ मुर्हत
इस वर्ष गणगौर पूजा का उद्यापन 8 अप्रैल दिन सोमवार को किया जाएगा। सोमवार का दिन भगवान शिव का दिन भी कहा जाता है, इसलिए इस साल गणगौर पूजा बेहद खास है। गणगौर पूजा का शुभ मुर्हत इस वर्ष 7 अप्रैल को सायं 4 बजकर 01 मिनट से प्रारंभ होकर 8 अप्रैल को शाम 4 बजकर 15 मिनट तक रहेगा।
व्रत का नामः-मासिक शिवरात्रि
व्रत की तिथिः-त्रयोदषी/ चतुदर्षी
व्रत का पक्षः-कृष्ण पक्ष,
व्रत का मासः-चैत्र मास
व्रत के देवताः-भगवान षिव
पूजा का समयः-प्रातः काल संकल्प के साथ
व्रत का दिनः-बुधवार
व्रत की पूजा विधिः-षोड़षोपचार या पंचोपचार विधि
व्रत के मंत्रः-ऊँ नमः षिवाय
जीवन मे शारीरिक, मानसिक व आध्यात्मिक रूप से उन्नति प्राप्त करने तथा नाना प्रकार के दुख दर्दों को दूर करने के अति सूक्ष्म किन्तु सरल उपाय धर्मषास्त्रों मे महर्षियों ने बताएं हैं। जिसमें व्रत और उपवास प्रमुख हैं किन्तु व्रत में भोजनादि करने का विधान है लेकिन उपवास मे कुछ भी नहीं खाने अर्थात् निराहार (बिना आहार)े रहने का नियम होता है। इन व्रतों का आचरण करने से जहाँ रोग व पाप नष्ट होते हैं वहीं षरीर स्वस्थ होता है और मानसिक षांति भी मिलती है। इसी प्रकार का अति महत्त्वपूर्ण व्रत प्रदोष व्रत है, जिसे करने से भगवान षिवजी की कृपा व प्रसन्नता मिलती है।
1. ब्रह्म मुहूर्त (सूर्य उदय के पूर्व) में उठकर, पीले रंग के वस्त्र धारण करें। भगवन गणेश के व्रत का संकल्प लें|
2. पूजन के समय, एक चौकी रखें उसपे हरे रंग का कपडा बिछाएं और गणेश मूर्ति की स्थापना करें|
3. मूर्ति स्थापना के पश्चात कलश स्थापना करें, एक लोटे में जल लें उसपे आम के पत्ते और श्री फल रखें|
कामदा एकादशी विष्णु भगवान का बहुत ही उत्तम और मनोकामना पूर्ण करने वाला व्रत है। इस व्रत को करने से मनुष्य की सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं। इसलिए इसे फलदा एकादशी भी कहते हैं। कामदा एकादशी का व्रत करने से मनुष्य को सभी पापों से मुक्ति मिलती है। कामदा एकादशी मनुष्य के जीवन के सभी कष्टों को दूर करने वाली और मन वांछित फल देने वाली कहीं जाती है। कामदा एकादशी का व्रत चैत्र शुक्ल पक्ष की एकादशी के दिन किया जाता है।
प्रदोष व्रत और उसका महत्त्व
व्रत का नामः-मासिक शिव रात्रि
व्रत की तिथिः-त्रयोदषी/ चतुदर्षी
व्रत का पक्षः-कृष्ण पक्ष
व्रत का मासः- वैशाख
व्रत के देवताः-भगवान शिव
पूजा का समयः-प्रातः काल संकल्प के साथ
व्रत का दिनः-गुरुवार
व्रत की पूजा विधिः-षोड़षोपचार या पंचोपचार विधि
व्रत के मंत्रः-ऊँ नमः शिववाय
व्रत का नामः - गंगा जयंती
व्रत की तिथिः - षष्ठी
व्रत का मासः - बैशाख
व्रत का पक्षः - शुक्ल पक्ष
व्रत की देवीः - मां गंगा
व्रत का दिनः - शुक्रवार
पूजा का समयः - प्रातः काल संकल्प के साथ
व्रत की पूजा विधिः - षोड़षोपचार या पंचोपचार विधि
व्रत की कथाः - यह जयंती मां गंगा के जन्मोत्सव के रूप मे मनाई जाती है।