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कार्तिक पूर्णिमा | Kartik Purnima on 24 Nov 2026

भारत देश में व्रत और त्योहारों को बहुत महत्व दिया जाता है. भारतीय संस्कृति में हर दिन, हर सप्ताह या हर महीने कोई न कोई पर्व या त्योहार मनाया जाता है.

भारतीय संस्कृति में कार्तिक महीने में पडने वाली पूर्णिमा को भी बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है. कार्तिक पूर्णिमा कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष तिथि को मनाई जाती है.


अटला टड्डी | Atla Taddi on 28 Oct 2026

अटला टड्डी का पर्व आंध्र प्रदेश में मनाये जाने वाला महत्वपूर्ण पर्व है।  इस दिन महिलाएं अपने पति की लम्बी उम्र व् स्वस्थ जीवन के लिए व्रत रखती है।  इसे आश्विन पूर्णिमा की तीसरी रात को किया जाता है।  उत्तर भारत में जिस प्रकार औरतें करवा चौथ का व्रत करतीं हैं ठीक उसी प्रकार आंध्र प्रदेश में महिलाएं अटला टड्डी का व्रत करतीं हैं।


चैत्र नवरात्रि | Chaitra Navratri on 19 Mar 2026

हिंदू धर्म में दो बार नवरात्रि का त्योहार मनाया जाता है। पहला शारदीय नवरात्रि और दूसरा चैत्र नवरात्रि… चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से नवरात्रि का त्योहार शुरू होता है और रामनवमी तक मां दुर्गा की पूजा उपासना की जाती है। चैत्र नवरात्रि में मां दुर्गा की पूजा के साथ-साथ कन्या पूजन का भी बहुत महत्व होता है। चैत्र नवरात्रि में भक्तगण प्रतिपदा के दिन मां दुर्गा की स्थापना और जौ बोने की विधि करते हैं। इसके अलावा नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती का पाठ करने का भी नियम है। चैत्र नवरात्रि में 9 दिन पूजा पाठ करने के साथ-साथ हवन और ब्राह्मण भोजन भी कराया जाता है।


शनैश्चर/ शनि जयंती / Shani Jayanti on 16 May 2026

शनिदेव की पूजा प्रमुख देवताओं के रूप में की जाती है. भगवान शनिदेव का जन्म वैशाख अमावस्या के दिन 12:00 बजे हुआ था. इसीलिए हमेशा अमावस्या के दिन शनैश्चर जयंती मनाई जाती है. शनि देव भगवान सूर्य और छाया के पुत्र हैं. सूर्य के अन्य पुत्रों की अपेक्षा शनिदेव हमेशा से ही उग्र स्वभाव के थे.शनि देव को मकर और कुंभ राशि का स्वामी माना जाता है और इन की महादशा 19 वर्षों तक चलती है. शनिदेव का रंग सांवला होता है और इनका वाहन गिद्ध है. शनि देव एक राशि में 30 महीने रहते हैं. शनिदेव को बहुत ही क्रूर ग्रह माना जाता है. यदि किसी व्यक्ति पर शनिदेव की कुदृष्टि पड़ जाए तो उस व्यक्ति का विनाश शुरू हो जाता है. 


अहोई अष्टमी | Ahoi Ashtami on 01 Nov 2026

कार्तिक मास आने के साथ अनेको त्यौहार व् व्रत लेकर आता है| और हर व्रत व् त्यौहार बहुत महत्वपूर्ण होता है| जिस तरह महिलाएं अपने पति के अच्छे स्वास्थ्य व् लम्बी आयु के लिए चौथ माता का व्रत करती हैं ठीक उसी प्रकार, सभी महिलाएं अपनी संतान के कुशल मंगल व् लम्बी आयु के लिए अहोई अष्टमी का व्रत करती है। जो महिलाएं संतान का सुख पाने के इंतज़ार में है वे भी इस व्रत को रख सकती  है| यह व्रत मुख्यता उत्तर भारत के क्षेत्रों में मनाया जाता है| इस दिन माता अहोई व् माँ पारवती की पूजा का विधान है| अहोई अष्टमी दिवाली से आठ दिन पहले आने वाला व्रत है| क्यूंकि यह व्रत अष्टमी के दिन पड़ता है इसलिए, अहोई अष्टमी को अहोई आठे भी कहा जाता है|


मासिक कार्तिगाई | Masik Karthigai on 24 Nov 2026

मासिक कार्तिगाई एक विशेष मासिक-त्यौहार है जिसे बहुत ही हर्षोल्लास से मनाया जाता है। इस त्यौहार को तमिल-हिंदुओं द्वारा भी बहुत ही जोर-शोर के साथ मनाया जाता है। 

भगवान सुब्रहमण्यम का आशीर्वाद -

आदिम और थाई के तमिल महीनों से शुरू होने वाले छह महीनों के लिए अनुष्ठान मनाया जा सकता है। लगातार 12 वर्षों तक माणिक कार्तिगई व्रत का पालन करते हुए कहा जाता है कि भक्तों को महान सौभाग्य और भगवान सुब्रह्मण्यम का आशीर्वाद मिलता है। कार्थिगई व्रत में भोजन से पूरी तरह मना होता है पर आज के समय में ऐसा व्रत रखना संभव नहीं हैतो भक्त फल और दूध का सेवन कर सकते हैं।


रमा एकादशी | Rama Ekadashi on 05 Nov 2026

रमा एकादशी का व्रत कार्तिक मास कृष्ण पक्ष की एकादशी के दिन किया जाता है।  इस एकादशी को दिव्य रमा एकादशी  और रंभा एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। शास्त्रों के अनुसार अगर रमा एकादशी के दिन सच्चे मन से पूजा अर्चना की जाए तो सभी पाप खत्म हो जाते हैं और प्रकार की मनोकामनाएं पूरी होती हैं।  


काली पूजा | Kaali Pooja on 08 Nov 2026

हिंदू धर्म में दीपावली का त्यौहार प्रमुख रूप से मनाया जाता है. दीपावली का त्यौहार कार्तिक अमावस्या के दिन मनाया जाता है. इस दिन सभी लोग अपने परिवार की सुख समृद्धि और खुशहाली के लिए बुद्धि के देवता गणेश  और धन की देवी मां लक्ष्मी का पूजन किया जाता है. इसके अलावा इस दिन महानिशा यानी मां काली की आराधना करने का भी विशेष महत्व है. वैसे तो नियमित रूप से मां काली की पूजा करना फलदाई होता है. लेकिन दीपावली की रात की गई पूजा से मां काली बहुत प्रसन्न होती हैं और अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं को पूर्ण करती हैं.

 


केदार गौरी व्रत | Kedar Gauri Vrat on 08 Nov 2026

केदार गौरी व्रत का महत्व-

हमारे शास्त्रों में केदार गौरी व्रत को बहुत महत्वपूर्ण बताया गया है. केदार गौरी व्रत करने से मनुष्य की सभी इच्छाएं और मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं.  मान्यताओं के अनुसार देवताओं ने भी अपनी मनोकामना को पूर्ण करने के लिए केदारगौरी व्रत किया था.

 


कमला जयंती | Kamla Jayanti on 08 Nov 2026

कमला जयंती के दिन माना जाता है की इस दिन १० महाविद्या में से एक देवी कमला धरती पर अवतरित हुयी थी। यह दिवाली के दिन मनाई जाती है। कहते है महाविद्या कमला श्रीहरि विष्णु की साथी है, उनकी सबसे बड़ी ताकत है, देवी कमला का रूप, देवी लक्ष्मी के सम्मान ही है, जो प्रसिद्धि भाग्य, धन की देव है, धन, समृद्धि प्राप्त करने के लिए इनकी पूजा आराधना की जाती है। साथ ही प्रजनन और बच्चों के अच्छे विकास के लये इन्हे पूजा जाता है। माँ कमला देवी भाग्य, सम्मान, पवित्रता और परोपकार की देवी है।


छोटी दिवाली के दिन क्यों की जाती है हनुमान जी की पूजा | Chhoti Diwali on 07 Nov 2026

दीपावली से एक दिन पहले छोटी दिवाली मनाई जाती है. छोटी दिवाली को नरक चतुर्दशी भी कहा जाता है. कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को नरक चतुर्दशी के रूप में मनाया जाता है. नरक चतुर्दशी के दिन हनुमान जी यमराज और मां लक्ष्मी की पूजा करने का नियम हैऐसा माना जाता है कि नरक चतुर्दशी के दिन भगवान हनुमान का जन्म हुआ था. इसीलिए इस दिन हनुमान जयंती भी मनाई जाती है. हमारे धर्म शास्त्रों में बताया गया है की नरक चतुर्दशी के दिन आधी रात में माता अंजनी के गर्भ से हनुमान जी का जन्म हुआ था. इसीलिए सुख आनंद और शांति प्राप्त करने के लिए नरक चतुर्दशी के दिन हनुमान जी की पूजा करना शुभ माना जाता है.
 


शारदा पूजा व चोपड़ा पूजा | Sharda Pooja, Chopra Pooja on 08 Nov 2026

शारदा पूजा व चोपड़ा पूजा का महत्व:-

इस दिन, व्यवसायी अपनी बही खाता  की पूजा करते हैं और इस दिन से नई पुस्तकों में अपने नए खाते लिखना शुरू करते हैं। चोपड़ा पूजा न केवल खाता किताबों का बल्कि आध्यात्मिक किताबों का भी किया जाता है। चोपड़ा पूजा समारोह के दौरान, नए खाते की किताबें और नए व्यापारिक लेन देन लिखे जाते हैं, जिसके बाद भगवान गणेश और देवी लक्ष्मी की मूर्तियों के सामने उनके आशीर्वाद मांगने के लिए विशेष प्रार्थना होती है। 


दुबड़ी संतान सप्तमी | Dubadi Santan Saptami on 18 Sep 2026

संतान सप्तमी का महत्व:-
संतान की कुशलता और उन्नति के लिए इस व्रत का काफी महत्व होता है। इसे मुक्त भरण संतान सप्तमी भी कहते है। यह व्रत संतान के समस्त दुःख, परेशानी के निवारण के उद्देशय से किया जाता है। संतान की सुरक्षा का भाव लिए स्त्रियां इस व्रत को पूरी विधि के साथ करती है। यह व्रत पुरुष अर्थार्थ माता पिता दोनों मिलकर संतान के सुख के लिए रखते है। 


दत्तात्रेय जयंती | Dattatrey Jayanti on 23 Dec 2026

भगवान दत्तात्रेय को ब्रह्मा, विष्णु और महेश का अवतार माना जाता है. भगवान दत्तात्रेय के अंदर ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों की तेजोमयी शक्ति का वास है. कलयुग में भगवान दत्तात्रेय की पूजा आदि गुरु के रूप में पूरे भारतवर्ष में की जाती है. सभी भक्तगण दत्तात्रेय की अलग-अलग प्रकार से भक्ति पूजा और उपासना करते हैं.


गौरी तृतीया on 08 Feb 2019

गौरी तृतीया का व्रत चैत्र शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि जिसे गणगौर के नाम से भी जाना जाता है| गौरी तृतीया का व्रत चैत्र शुक्ल पक्ष की तृतीया यानि गणगौर से प्रारम्भ करना सबसे उत्तम होता है, अन्यथा आप इसे किसी भी शुक्ल पक्ष की तृतीया से प्रारम्भ कर सकतें हैं| गौरी तृतीया का व्रत एक मात्र ऐसा व्रत है, जिसको नियम अनुसार करने से शीघ्र विवाह व् सुखद वैवाहिक जीवन का वरदान प्राप्त होता है| 


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