अटला टड्डी का पर्व आंध्र प्रदेश में मनाये जाने वाला महत्वपूर्ण पर्व है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लम्बी उम्र व् स्वस्थ जीवन के लिए व्रत रखती है। इसे आश्विन पूर्णिमा की तीसरी रात को किया जाता है। उत्तर भारत में जिस प्रकार औरतें करवा चौथ का व्रत करतीं हैं ठीक उसी प्रकार आंध्र प्रदेश में महिलाएं अटला टड्डी का व्रत करतीं हैं।
हिंदू धर्म में दो बार नवरात्रि का त्योहार मनाया जाता है। पहला शारदीय नवरात्रि और दूसरा चैत्र नवरात्रि… चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से नवरात्रि का त्योहार शुरू होता है और रामनवमी तक मां दुर्गा की पूजा उपासना की जाती है। चैत्र नवरात्रि में मां दुर्गा की पूजा के साथ-साथ कन्या पूजन का भी बहुत महत्व होता है। चैत्र नवरात्रि में भक्तगण प्रतिपदा के दिन मां दुर्गा की स्थापना और जौ बोने की विधि करते हैं। इसके अलावा नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती का पाठ करने का भी नियम है। चैत्र नवरात्रि में 9 दिन पूजा पाठ करने के साथ-साथ हवन और ब्राह्मण भोजन भी कराया जाता है।
शनिदेव की पूजा प्रमुख देवताओं के रूप में की जाती है. भगवान शनिदेव का जन्म वैशाख अमावस्या के दिन 12:00 बजे हुआ था. इसीलिए हमेशा अमावस्या के दिन शनैश्चर जयंती मनाई जाती है. शनि देव भगवान सूर्य और छाया के पुत्र हैं. सूर्य के अन्य पुत्रों की अपेक्षा शनिदेव हमेशा से ही उग्र स्वभाव के थे.शनि देव को मकर और कुंभ राशि का स्वामी माना जाता है और इन की महादशा 19 वर्षों तक चलती है. शनिदेव का रंग सांवला होता है और इनका वाहन गिद्ध है. शनि देव एक राशि में 30 महीने रहते हैं. शनिदेव को बहुत ही क्रूर ग्रह माना जाता है. यदि किसी व्यक्ति पर शनिदेव की कुदृष्टि पड़ जाए तो उस व्यक्ति का विनाश शुरू हो जाता है.
कार्तिक मास आने के साथ अनेको त्यौहार व् व्रत लेकर आता है| और हर व्रत व् त्यौहार बहुत महत्वपूर्ण होता है| जिस तरह महिलाएं अपने पति के अच्छे स्वास्थ्य व् लम्बी आयु के लिए चौथ माता का व्रत करती हैं ठीक उसी प्रकार, सभी महिलाएं अपनी संतान के कुशल मंगल व् लम्बी आयु के लिए अहोई अष्टमी का व्रत करती है। जो महिलाएं संतान का सुख पाने के इंतज़ार में है वे भी इस व्रत को रख सकती है| यह व्रत मुख्यता उत्तर भारत के क्षेत्रों में मनाया जाता है| इस दिन माता अहोई व् माँ पारवती की पूजा का विधान है| अहोई अष्टमी दिवाली से आठ दिन पहले आने वाला व्रत है| क्यूंकि यह व्रत अष्टमी के दिन पड़ता है इसलिए, अहोई अष्टमी को अहोई आठे भी कहा जाता है|
मासिक कार्तिगाई एक विशेष मासिक-त्यौहार है जिसे बहुत ही हर्षोल्लास से मनाया जाता है। इस त्यौहार को तमिल-हिंदुओं द्वारा भी बहुत ही जोर-शोर के साथ मनाया जाता है।
भगवान सुब्रहमण्यम का आशीर्वाद -
आदिम और थाई के तमिल महीनों से शुरू होने वाले छह महीनों के लिए अनुष्ठान मनाया जा सकता है। लगातार 12 वर्षों तक माणिक कार्तिगई व्रत का पालन करते हुए कहा जाता है कि भक्तों को महान सौभाग्य और भगवान सुब्रह्मण्यम का आशीर्वाद मिलता है। कार्थिगई व्रत में भोजन से पूरी तरह मना होता है पर आज के समय में ऐसा व्रत रखना संभव नहीं है, तो भक्त फल और दूध का सेवन कर सकते हैं।
हिंदू धर्म में दीपावली का त्यौहार प्रमुख रूप से मनाया जाता है. दीपावली का त्यौहार कार्तिक अमावस्या के दिन मनाया जाता है. इस दिन सभी लोग अपने परिवार की सुख समृद्धि और खुशहाली के लिए बुद्धि के देवता गणेश और धन की देवी मां लक्ष्मी का पूजन किया जाता है. इसके अलावा इस दिन महानिशा यानी मां काली की आराधना करने का भी विशेष महत्व है. वैसे तो नियमित रूप से मां काली की पूजा करना फलदाई होता है. लेकिन दीपावली की रात की गई पूजा से मां काली बहुत प्रसन्न होती हैं और अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं को पूर्ण करती हैं.
केदार गौरी व्रत का महत्व-
हमारे शास्त्रों में केदार गौरी व्रत को बहुत महत्वपूर्ण बताया गया है. केदार गौरी व्रत करने से मनुष्य की सभी इच्छाएं और मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं. मान्यताओं के अनुसार देवताओं ने भी अपनी मनोकामना को पूर्ण करने के लिए केदारगौरी व्रत किया था.
शारदा पूजा व चोपड़ा पूजा का महत्व:-
भगवान दत्तात्रेय को ब्रह्मा, विष्णु और महेश का अवतार माना जाता है. भगवान दत्तात्रेय के अंदर ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों की तेजोमयी शक्ति का वास है. कलयुग में भगवान दत्तात्रेय की पूजा आदि गुरु के रूप में पूरे भारतवर्ष में की जाती है. सभी भक्तगण दत्तात्रेय की अलग-अलग प्रकार से भक्ति पूजा और उपासना करते हैं.
गौरी तृतीया का व्रत चैत्र शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि जिसे गणगौर के नाम से भी जाना जाता है| गौरी तृतीया का व्रत चैत्र शुक्ल पक्ष की तृतीया यानि गणगौर से प्रारम्भ करना सबसे उत्तम होता है, अन्यथा आप इसे किसी भी शुक्ल पक्ष की तृतीया से प्रारम्भ कर सकतें हैं| गौरी तृतीया का व्रत एक मात्र ऐसा व्रत है, जिसको नियम अनुसार करने से शीघ्र विवाह व् सुखद वैवाहिक जीवन का वरदान प्राप्त होता है|