हिंदू पंचांग के अनुसार मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को मत्स्य द्वादशी मनाई जाती है. मत्स्य द्वादशी के दिन भगवान श्री हरि विष्णु जी ने मत्स्य का अवतार लेकर दैत्य हयग्रीव का संघार करके वेदों की रक्षा की थी. इसी वजह से इस दिन भगवान विष्णु के मत्स्य अवतार की पूजा की जाती है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार मत्स्य द्वादशी के दिन भगवान विष्णु की श्रद्धा पूर्वक पूजा करने से सभी प्रकार के कष्ट दूर हो जाते हैं. मत्स्य अवतार श्रीहरि के प्रमुख अवतारों में से एक है. मत्स्य द्वादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा अर्चना करने से सभी प्रकार के संकट दूर हो जाते हैं.
वैभव लक्ष्मी व्रत करने से मनुष्य के जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं और कभी भी धन की कमी का सामना नहीं करना पड़ता है. वैभव लक्ष्मी का व्रत करने से आर्थिक संकटों से मुक्ति मिलती है और संतान से जुड़ी सभी समस्याओं का अंत होता है. अगर आप शुक्रवार के दिन मां वैभव लक्ष्मी का व्रत करते हैं
हर महीने की शुक्ल पक्ष तिथि को पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है. हिंदू पंचांग के अनुसार शुक्ल पक्ष की अंतिम 15वीं तिथि पूर्णिमा होती है. इस दिन आकाश में चंद्रमा पूर्ण रूप से दिखाई देता है. हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है.
अन्नपूर्णा जयंती मार्गशीर्ष पूर्णिमा के दिन मनाई जाती है। इस दिन माता पार्वती अन्नपूर्णा के रूप में प्रकट हुई थी। माता अन्नपूर्णा को अन्न की देवी माना जाता है। अन्नपूर्णा जयंती के दिन मुख्य रूप से अन्न की पूजा की जाती है।
पौष अमावस्या के दिन बुरी शक्तियों का प्रभाव बहुत ही अधिक होता है । इस दिन नकारात्मक शक्तियों का आसानी से वास हो जाता है। इस दिन मृत पितरों के लिए श्राद्ध और तर्पण करने को भी काफी अधिक शुभ माना जाता है।
हिन्दू धर्म के अनुसार विवाह, वर व् वधु दोनों के लिए एक दूसरे जन्म के सामान है| विवाह के पश्चात दोनों के ही परिवार के प्रति व् एक दूसरे के प्रति जिम्मेदारियां बढ़ जातीं हैं| विवाह के बाद वर वधु दोनों ही एकदूसरे के साथ अपना पूरा जीवन व्यतीत करने की प्रतिज्ञा करते हैं| हर वैवाहिक जोड़ा यही चाहता है की विवाह के पश्चात उनका जीवन सुखद हो| अग्नि के सात फेरे लेकर वर व् वधु तन मन तथा आत्मा से एक पवित्र बंधन में बंध जाते हैं|
वैकुंठ एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है। इस दिन बहुत ही धूमधाम के साथ भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार शुक्ल पक्ष की मार्गजहि महीने में वैकुंठ एकादशी का व्रत किया जाता है। वैकुंठ एकादशी को मुक्कोटी एकादशी भी कहा जाता है।
26 दिसंबर 2019 को साल 2019 का अंतिम सूर्य ग्रहण लगने वाला है| सूर्य और चन्द्रमा हम सबके जीवन से बहुत ही गहराई से जुड़े हुए है| इसलिए जब भी इन पर ग्रहण लगता है हमारा जीवन भी काफी प्रबल रूप से प्रभावित होता है|
बांदा अष्टमीको शाकंभरीनवरात्रि भीकहा जाताहै. बांदाअष्टमी अष्टमी पौषमास कीशुक्ल पक्षकी अष्टमीतिथि सेलेकर पूर्णिमातिथि तकमनाई जातीहै. मकरसंक्रांति केदिन सेबांदा अष्टमीअर्थात शाकंभरीनवरात्रि काआरंभ होजाता है.हमारे धर्मशास्त्रों केअनुसार गुप्तनवरात्रि कीतरह एसीशाकंभरी नवरात्रिका भीबहुत महत्वहोता है.माता शाकंभरीमां दुर्गाके अलग-अलगअवतारों मेंसे एकहै. इसनवरात्रि केसभी दिनोंमें पौराणिककार्य किएजाते हैं.खासतौर परइस नवरात्रिमें मांअन्नपूर्णा कीसाधना कीजाती है.बांदा अष्टमीतंत्र मंत्रकी साधनाकरने वालेलोगों केलिए भीमहत्वपूर्ण होतीहै.
इस पवित्र दिन को नवरात्रि का पहला दिन या आरंभ दिवस भी माना जाता है। हिंदू पंचांग में ऐसा कहा गया है कि शाकम्बरी नवरात्रि अष्टमी तिथि के दिन से शुरू होती है और पौष माह में पूर्णिमा तिथि के दिन समाप्त होती है। अर्थात इस विशेष व्रत त्यौहार को लगभग आठ दिनों तक पूरी श्रद्धा के साथ मानाया जाता है। शाकम्बरी पूर्णिमा के दिन शाकम्भरी नवरात्रि समाप्त हो जाती है।
दुर्गा आष्टमी जैसे की नाम से ही मालूम होता है कि ये व्रत त्यौहार मां दुर्गा को समर्पित है। दुर्गा मां के भक्तों के लिये यह एक खास त्यौहार माना जाता है। और क्योकि यह त्यौहार हर महीने मनाया जाता है इसे मासिक दुर्गा अष्टमी कहा जाता है।
जानिए क्या है लोहड़ी का महत्व और इसकी पूजन विधि लोहड़ी का त्यौहार मुख्य रूप से पंजाब में मनाया जाता है. यह त्यौहार मकर संक्रांति से एक या दो दिन पहले मनाया जाता है. लोहड़ी के दिन लोग एक दूसरे से मिलते हैं और आपस में एक दूसरे के साथ अपनी खुशियां बांटते हैं.
हमारे पूर्वजों ने बताया था कि संसार में मौजूद सभी पशु पक्षी और मनुष्य एक ही परिवार से संबंध रखते हैं. पूर्वजों द्वारा बताए गयी इस बात का एहसास हमें अलग अलग त्योहारों के द्वारा होता रहता है. भारत देश में अलग-अलग त्योहार मनाए जाते हैं. इन सभी त्योहारों में से एक है संक्रांति का त्यौहार….. दक्षिण भारत में इस त्योहार को अलग-अलग रूपों में मनाया जाता है. उत्तर भारत में इसे खिचड़ी के रूप में मनाया जाता है