क्या है नारद जयंती- हिन्दू धर्म में नारद जयंती को सबसे प्रसिद्ध और महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक माना जाता है. नारद जयंती के पर्व को सैकड़ों हजारों हिंदू भक्त पूरी श्रद्धा के साथ मनाते है.
क्या है परशुराम द्वादशी- परशुराम द्वादशी व्रत, या जमदग्नि परशुराम व्रत, भगवान विष्णु के छठे अवतार, भगवान परशुराम को समर्पित है. परशुराम द्वादशी व्रत वैशाख मास में शुक्ल पक्ष के बारहवें दिन मनाया जाता है. इस दिन भक्त एक कठोर व्रत का पालन करते हैं. मोहिनी एकादशी के अगले दिन परशुराम व्रत मनाया जाता है. कभी-कभी दोनों व्रत एक ही दिन पड़ सकते हैं. शास्त्रों में इस व्रत को बहुत ही फलदायी माना गया है|
क्या है बुद्ध पूर्णिमा- हिंदू धर्म के साथ-साथ बौद्ध धर्म में भी बुद्ध पूर्णिमा का त्योहार बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है. मान्यताओं के अनुसार बुद्ध पूर्णिमा के दिन ही बौद्ध धर्म के संस्थापक महात्मा बुद्ध जी का जन्म हुआ था.
क्या है वृषभ संक्रांति- साल के 12 महीनों के समान राशियां भी 12 होती हैं. इन 12 राशियों के नाम के अनुसार हर महीने एक संक्रांति मनाई जाती है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सूर्य का राशि परिवर्तन करना एक महत्वपूर्ण घटना होती है. सूर्य के राशि परिवर्तन करने से जातकों के राशिफल पर प्रभाव पड़ता है और साथ ही सूर्य के इस परिवर्तन से सौर वर्ष के मास की गणना की जाती है. शास्त्रों के अनुसार पूरे वर्ष में एक बार सूर्य देव सभी राशियों में प्रवेश करते हैं. सूर्य देव के इस चक्र को संक्रांति कहा जाता है. वृषभ संक्रांति का पर्व जेष्ठ मास के आरंभ को दर्शाता है. साल में पड़ने वाली 12 संक्रांतियों में से वृषभ संक्रांति को बहुत ही महत्वपूर्ण माना गया है. जेष्ठ मास में पड़ने वाली संक्रांति को वृषभ संक्रांति के रूप में मनाया जाता है. मान्यताओं के अनुसार वृषभ संक्रांति के दिन सूर्य मेष राशि से निकलकर वृषभ राशि में प्रवेश करता है.
क्या है मोहिनी एकादशी- हमारे शास्त्रों में मोहिनी एकादशी को बहुत ही पुण्यदायक बताया गया है. शास्त्रों के अनुसार वैशाख शुक्ल एकादशी तिथि के दिन ही भगवान् विष्णु ने मोहिनी का रूप धारण किया था. भगवान विष्णु ने मोहिनी का रूप धारण करके सभी असुरों को मोहपाश में बांध लिया और सारा अमृत देवताओं को पिला दिया था. ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार, वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि के दिन मोहिनी एकादशी का पर्व मनाया जाता है. हिन्दू धर्म में इस एकादशी को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है. मान्यताओं के अनुसार मोहिनी एकादशी का व्रत करने से मनुष्य के पिछले जन्म और इस जन्म के सभी पाप नष्ट हो जाते है. हिंदू पौराणिक कथाओं अनुसार मोहिनी भगवान विष्णु का प्रच्छन्न रूप है. और जब से एकादशी तिथि के दिन भगवान् विष्णु ने मोहिनी रूप धारण किया था तबसे इसे 'मोहिनी एकादशी' के रूप में मनाया जाने लगा. मोहिनी एकादशी का पर्व उत्तरी भारत और आसपास के क्षेत्रों में 'वैशाख' के महीने में मनाया जाता है, तमिल कैलेंडर के अनुसार, मोहिनी एकादशी 'चिथिरई' के महीने में मनायी जाती है, बंगाली कैलेंडर के अनुसार इसे 'ज्येष्ठो' महीने में मनाया जाता है. मलयालम कैलेंडर के अनुसार मोहिनी एकादशी का पर्व 'एडवा' के महीने में मनाया जाता है. सभी लोग सुख और समृद्धि पाने के लिए और भगवान का आशीर्वाद पाने के लिए मोहिनी एकादशी का व्रत पूरी श्रद्धा और आस्था के साथ करते हैं.
अपरा एकादशी के दिन विष्णु यंत्र का पूजन बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है. अपरा एकादशी के दिन श्रद्धालु पूरा दिन श्रद्धा और आस्था के साथ व्रत रहकर संध्याकाल में भगवान विष्णु की पूजा करते हैं.
भद्रकाली महान देवी पार्वती के सबसे शक्तिशाली रूपों में से एक है. देवी भद्रकाली का उल्लेख सभी धर्म पुराणों में मिलता है. भद्रा का अर्थ होता है आशीर्वाद,सौभाग्य और समृद्धि से परिपूर्ण|
सभी मनोकामयाओं को पूरा करता है महेश नवमी का व्रत|
भारतीयों के लिये गंगा केवल जलस्त्रोत नहीं बल्कि इससे बढ़कर है। गंगा दशहरा देवी गंगा को समर्पित है और यह दशमी तिथि या हिंदू कैलेंडर के अनुसार ज्येष्ठ के महीने में चंद्रमा के उज्ज्वल आधे के दसवें दिन आता है। गंगा दशहरा देवी मां गंगा को सर्मपित है। गंगाजल को बहुत पवित्र माना जाता है और इसका उपयोग सभी हिंदू अनुष्ठानों के लिए करते हैं। गंगा नदी पौराणिक, ऐतिहासिक, धार्मिक और आर्थिक रूप से भारतीयों के लिए बहुत अधिक मूल्य रखती है।
निर्जला एकादशी और भीमसेनी एकादशी महत्व|