क्या है कलंक चतुर्थी?
कलंक चतुर्थी गणेश चतुर्थी के दिन ही मनाई जाती है| गणेश चतुर्थी की तरह ही कलंक चतुर्थी का भी अपना महत्व है|
कलंक चतुर्थी के दिन चंद्र दर्शन या चन्द्रमा देखना वर्जित होता है, क्यूंकि इस दिन चंद्र दर्शन से मिथ्या कलंक या आरोप लगता है|
1.स्कन्द षष्टी दक्षिणी भारत में मनाये जाने वाला एक बहुत ही महत्वपूर्ण पर्व है| इस दिन गौरी शंकर भगवान के पुत्र कार्तिकेय की पूजा करि जाती है|
2.भगवान् स्कन्द को मुरुगन,कार्तिकेयन, सुब्रमण्या के नाम से भी जाना जाता है| यह भाद्रपद मॉस के शुक्ल पक्ष की षष्टी तिथि को मनाया जाता है| कार्तिकेय के पूजन से रोग, दुःख और दरिद्रता का निवारण होता है।
3.कथाओं के अनुसार भगवान शिव के तेज से उत्पन्न छह मुख वाले बालक स्कन्द की छह कृतिकाओं ने स्तनपान करा कर रक्षा की थी, इसीलिए कार्तिकेय' नाम से पुकारा जाने लगा।
सामवेद उपाकर्म संस्कृत के शब्द है जिनका आश्य है शुरुआत या किसी कार्य का आंरभ करना।
सामवेद उपाकर्म एक बहुत ही मह्त्वपूर्ण और वैदिक अनुष्ठान है। यह आज के समय में भी ब्राह्मण जाति के हिंदुओं के बीच काफी ज्यादा प्रचलित है।
संवत्सरी पर्व जैन धर्म से जुड़ा एक विशेष त्यौहार है जिसका उद्देश्य है जाने-अनजाने हुयी गलतियों की माफी मांगना। यह त्यौहार पूरी तरह दोस्ती, माफी और प्यार का संदेश देने वाला त्यौहार है।
क्या है संवत्सरी पर्व-
यह त्यौहार क्षमा (माफी मांगना और देना), आहिंसा (प्यार के साथ और बिना हिंसा के) और मैत्री (दोस्ती) का त्यौहार है। कहना गलत ना होगा कि यह त्यौहार बाकी त्यौहारों से एकदम अलग है क्योंकि समाज को एक मौका देता है जहां पर गलतियों के सुधारने की गुंजाइश होती है। जैन धर्म के श्वोताबंर पंथ अपने इसे अनोखे त्यौहार से बाकी धर्मों को भी काफी प्रभावित करता है। यह त्यौहार समाज में एकता बढाने के लिये है।
ललिता प्रिय राधा रानी और श्री कृष्ण जी के काफी करीबी और प्यारी गोपियों में से एक मानी जाती थी। और इतने प्रेम और लाड़ के कारण ही इन्हें सबसे प्यारी गोपी का दर्जा दिया गया।
दुर्गा अष्टमी जैसे की नाम से ही मालूम होता है कि ये व्रत त्यौहार मां दुर्गा को समर्पित है। दुर्गा मां के भक्तों के लिये यह एक खास त्यौहार माना जाता है। और क्योकि यह त्यौहार हर महीने मनाया जाता है इसे मासिक दुर्गा अष्टमी कहा जाता है।
1. ज्येष्ठ गौरी पूजन हिन्दू धर्म में मनाये जाने वाला एक बहुत ही सुन्दर पर्व है| जो की मुख्यता महाराष्ट्र की महिलाओं द्वारा बोहोत ही ख़ूबसूरती से मनाया जाता है|
2. गौरी पूजन तीन दिन तक गौरी आवाहन, गौरी पूजा, अथवा गौरी विसर्जन के रूप में मनाया जाता है|
3. गौरी पूजन गणेश चतुर्थी व् गणेश विसर्जन के बीच मनाये जाने वाला पर्व है|
1. ज्येष्ठ गौरी पूजन हिन्दू धर्म में मनाये जाने वाला एक बहुत ही सुन्दर पर्व है| जो की मुख्यता महाराष्ट्र की महिलाओं द्वारा बहुत ही ख़ूबसूरती से मनाया जाता है|
2. गौरी पूजन तीन दिन तक गौरी आवाहन, गौरी पूजा, अथवा गौरी विसर्जन के रूप में मनाया जाता है.
3. गौरी पूजन गणेश चतुर्थी व् गणेश विसर्जन के बीच मनाये जाने वाला पर्व है|
ज्येष्ठ गौरी पूजन
1. ज्येष्ठ गौरी पूजन हिन्दू धर्म में मनाये जाने वाला एक बहुत ही सुन्दर पर्व है| जो की मुख्यता महाराष्ट्र की महिलाओं द्वारा बोहोत ही ख़ूबसूरती से मनाया जाता है|
2. गौरी पूजन तीन दिन तक गौरी आवाहन, गौरी पूजा, अथवा गौरी विसर्जन के रूप में मनाया जाता है|
3. गौरी पूजन गणेश चतुर्थी व् गणेश विसर्जन के बीच मनाये जाने वाला पर्व है|
1. सम्पूर्ण सृष्टि की गतिशीलता सूर्यादि ग्रहो की ऊर्जा शक्ति के कारण बनी हुई है| सूर्य हमारे जीवन का दाता व् विश्वात्मा है|
2. सूर्य प्रत्यक्ष रूप से भौतिक और आध्यात्मिक जगत को प्रभावित करता है| जिसके दम पर सम्पूर्ण जहां रोशन है| जो ज्योतिषीय दृष्टि से सिंह राशि का स्वामी है|
दूर्वा अष्टमी एक विशेष तरह का त्यौहार है जो कि दूर्वा घास को समर्पित होता है। दूर्वा घास को हिन्दु धर्म में केवल घास नहीं माना जाता है बल्कि इसका एक विशेष महत्व है। दूर्वा घास को सभी तरह के हिन्दु अनुष्ठानों में प्रयोग किया जाता है। इसका प्रयोग बहुत ही शुद्ध माना जाता है।
माँ भुवनेश्वरी को शक्ति प्रदान करने वाली मां माना जाता है। इसके अलावा उन्हें इसीलिये भी पूजा जाता है क्योंकि वह प्राणियों को पोषण व शक्ति दोनों ही प्रदान करती है। हर साल यह जयंती बहुत ही धूमधाम से मनाई जाती है। मां भुवनेश्वरी देवी को महादेव शिव की लीला-विलास का सहभागी माना जाता है।
राधा अष्टमी भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की अष्टमी को मनाई जाती है क्योकि इस दिन श्रीकृष्ण की प्रिय राधा जी का जन्म हुआ था। राधा अष्टमी हर साल मनाई जाती है और यह व्रत त्यौहार राधा जी और क़ृष्ण जी के भक्तों के लिये बहुत ही महत्तव रखती है।
हिन्दु धर्म में एकादशी व्रत का बहुत खास और विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन व्रत से जुड़े देवी-देवताओं की पूजा बहुत ही श्रद्धा के साथ की जाती है। इस दिन पूरे विधि और विधान से साथ व्रत रखा जाता है ताकि विशेष फल की प्राप्ति हो सके।
भगवान वामन का पूजा करना बहुत ही अच्छा माना जाता है। इस दिन व्रत कथा सुनने का भी विशेष महत्व माना जाता है। पूजा करने के बाद पूरे परिवार वालों को भगवान का प्रसाद ग्रहण करना चाहिए। इस दिन व्रत एवं पूजा करने से भगवान वामन का आशीर्वाद प्राप्त होता है और भक्तों की सभी तरह की मनोकामनाएं पूरी होती है।