संक्रांति के दिन धर्म कर्म और दान-पुण्य के काम करने का विशेष महत्व होता है। इसलिए बहुत से लोग इस दिन भी खाने पीने की वस्तुए और कपडे आदि गरीबों में दान करते है। वृश्चिक संक्रांति के दिन संक्रमण स्नान, विष्णु और दान का खास महत्व होता है। इस दिन श्राद्ध और पितृ तर्पण का भी खास महत्व होता है।
कालाष्टमी के दिन कालभैरव की पूजा और व्रत रखने का विधान है। इनकी पूजा और अर्चना विधि विधान के साथ करनी चाहिए। इनका व्रत रखने से सभी तरह के कष्टों से मुक्ति मिलती है और जीवन में आने वाली सभी बाधाएं दूर हो जाती हैं। माना जाता है कि कालभैरव की पूजा करने से सभी रह के ग्रह-नक्षत्र और क्रूर ग्रहों का अशुभ प्रभाव खत्म हो जाता है। काल भैरव का स्वरूप विकराल एवं क्रोधी है।
उत्पन्ना एकादशी के उत्पन्न होने की कहानी है। इस दिन भगवान विष्णु से पैदा हुई एकादशी के बारे में कथा सुनाई जाती है। उत्पन्ना एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। मार्गशीर्ष मास की कृष्ण एकादशी को एकादशी प्रकट हुई थी। इसलिए इस एकादशी का नाम उत्पन्ना एकादशी पड़ा है। बस फिर इसी दिन से एकादशी व्रत शुरू हो गया।
गुरु गोबिंद सिंह जयंती पूरी दुनिया में सिखों के बीच एक बहुत महत्वपूर्ण त्योहार है। यह दसवें सिख गुरु, गुरु गोविंद सिंह की जयंती मनाने का दिन है।
चंद्र दर्शन हिंदु धर्म में काफी महत्व रखता है क्योंकि चद्रंमा को देवता समान माना जाता है। चंद्र दर्शन का अर्थ चन्द्रमा का दर्शन करना। यह भारत में बहुत श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। इसे चंद्र दर्शन इसलिये कहा जाता है क्योंकि इसे अमावस्या के बाद देखा जाता है।
दीपावली के दिन लक्ष्मी पूजा करने के बाद अगले दिन सभी घरों में गोवर्धन पूजा की जाती है. गोवर्धन पूजा जिसे कई लोग अन्नकूट उत्सव के रूप में भी मनाते हैं. यह पूजा द्वापर युग में श्री कृष्ण के अवतार के बाद आरंभ की गई थी. अन्नकूट/ गोवर्धन पूजा ब्रिज वासियों का सबसे महत्वपूर्ण त्यौहार होता है. गोवर्धन पूजा के दिन सभी मंदिरों में अलग-अलग प्रकार के भोजन बनाकर भगवान को भोग लगाया जाता है.
हिन्दू धर्म में कई प्रकार के व्रत और त्यौहार मनाये जाते हैं जिनका हमारे रोज़मर्रा के जीवन पर बहुत प्रभाव पड़ता है। आज हम आपको एक बहुत ही महत्वपूर्ण ,प्रमुख और पूजनीय व्रत के बारे में बताने जा रहे हैं जिसे करने से आपके जीवन के सभी संकट दूर हो जायेंगे, आपके जीवन में कभी भी धन की कमी नहीं होगी और आपके घर में हमेशा खुशहाली बनी रहेगी।
गुरु वारा प्रदोष व्रत विधि
1. व्रत रखने वाले व्यक्ति को व्रत के दिन सूर्य उदय होने से पहले उठना चाहिये।
2. स्नान आदिकर भगवान् शिव का नाम जपते रहना चाहिए|
3. सुबह नहाने के बाद साफ और पीले वस्त्र पहनें।