प्रदोष का अर्थ प्रदोष का अर्थ है "भारी दोष"| चन्द्रमा को क्षय रोग होने के कारण चंद्र देव अंतिम साँसे गिन रहे थे| तभी भगवान् शंकर ने चन्द्रमा को पुनर्जीवन देकर मस्तक पर धारण किया| चंद्र मृत्यु के निकट जाकर भी भगवान् शिव की कृपा से जीवित रहे और पूर्णिमा के दिन तक पूर्णता स्वस्थ हो प्रकट हुए| प्रदोष व्रत महत्व जीवन में शारीरिक मानसिक एवं आधयात्मिक रूप से मज़बूत होने के लिए प्रदोष व्रत कारगर मन गया है|प्रदोष व्रत एक ऐसा व्रत है जो मृत्यु
कालाष्टमी या काला अष्टमी एक बहुत ही प्रचलित हिंदू त्योहार है और भक्तों के बीच इसकी बहुत मान्यता भी है। यह विशेष त्यौहार भगवान भैरव को पूर्ण रुप से समर्पित है।
कब मनाते हैं कालाष्टमी:
यह व्रत त्यौहार पूरे विधि-विधान के साथ हिंदू चंद्र माह में कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन, हिंदू भक्त पूरी श्रद्धा के साथ भगवान भैरव की पूजा करते हैं और उन्हें प्रसन्न करने के लिए उपवास भी रखते हैं। एक वर्ष में कुल 12 कालाष्टमी के दर्शन होते हैं।
मासिक कार्तिगाई एक विशेष मासिक-त्यौहार है जिसे बहुत ही हर्षोल्लास से मनाया जाता है। इस त्यौहार को तमिल-हिंदुओं द्वारा भी बहुत ही जोर-शोर के साथ मनाया जाता है।
मनचाहा फल प्रदान करता है नरसिंह व्रत भगवान नरसिंह को श्री विष्णु का पांचवां अवतार माना जाता हैं. भगवान विष्णु ने अपने भक्त प्रहलाद की रक्षा करने के लिए नरसिंह अवतार लिया था. भगवान नरसिंह गोधूलि बेला के समय प्रकट हुए थे. नरसिंह भगवान विष्णु जी का उग्र और शक्तिशाली अवतार माना जाता हैं. भगवान नरसिंह की पूजा व्रत और उपासना करने से मनुष्य के जीवन के सभी प्रकार के संकट दूर हो जाते हैं और दुर्घटना से भी बचाव होता है. इसके अलावा भगवान नरसिंह की पूजा करने से हर प्रकार के मुकदमे, दुश्मन और विरोधी शांत हो जाते हैं, और साथ ही सभी प्रकार की तंत्र मंत्र की बाधाएं दूर हो जाती हैं भगवान श्री नरसिंह को शक्ति और पराक्रम का प्रमुख देवता माना जाता है. नरसिंह जयंती वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाती है. इसी दिन भगवान विष्णु ने नरसिंह का अवतार लेकर खंभे को चीरकर भक्त प्रहलाद की रक्षा की थी. इसीलिए इस दिन बहुत ही धूमधाम से नरसिंह जयंती का उत्सव मनाया जाता है. इस दिन व्रत करने का भी नियम है. नरसिंह जयंती का व्रत सभी महिलाएं और पुरुष कर सकते हैं.
हिंदू धर्म में अपने पति की लंबी उम्र के लिए महिलाएं कुछ विशेष व्रत रखती हैं. इन्हीं विशेष व्रतों में से एक है वट सावित्री व्रत…. वट सावित्री व्रत ज्येष्ठ कृष्ण अमावस्या के दिन किया जाता है.
रोहिणी व्रत त्यौहार हमारे जीवन को ख़ुशियों से भर देते हैं और आगे बढते की प्रेरणा देते हैं। साथ ही इस बात का संदेश भी देते है कि धर्म व ईश्वर से जुड़े रहना कितना अधिक आवश्यक है । और एक ऐसा ही महत्वपूर्ण व्रत-त्यौहार है रोहिणी व्रत। रोहिणी व्रत - जैन समुदाय को मह्त्तवपूर्ण त्यौहार – जैन समुदाय में रोहिणी व्रत महत्वपूर्ण व्रत में से एक है। रोहिणी व्रत मुख्य रूप से विवाहित महिलाओं द्वारा अपने पति के लंबे जीवन व खुशहाल वैवाहिक जीवन के लिए रखा जाता है। इस दिन महिला सजती और संवरती है। और इस दिन महिलाओं की खुशी देखते ही बनती है । रोहिणी जैन और हिंदू कैलेंडर में सत्ताईस नक्षत्रों में से एक नक्षत्र है।
क्या है बुधअष्टमी-
हिंदू धर्म में बताया गया है कि जो भी मनुष्य पूरी श्रद्धा पूर्वक बुध अष्टमी का व्रत करता है उसे मृत्यु के पश्चात नरक नहीं जाना पड़ता है. लोक कथाओं के अनुसार बुध अष्टमी का उपवास करने से मनुष्य के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं.
क्या है अशोकअष्टमी–
हिन्दू धर्म में अशोक अष्टमी के व्रत को बहुत ही पुण्य प्रदान करने वाला बताया गया है. शास्त्रों में बताया गया है की अशोक अष्टमी का व्रत करने से सभी प्रकार के शोक खत्म हो जाते हैं और साथ ही धन संपत्ति की भी प्राप्ति होती है. अशोक अष्टमी के दिन अशोक के वृक्ष की पूजा की जाती है.
अशोक अष्टमी कामहत्त्व-
अशोक अष्टमी का व्रत चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि के दिन किया जाता है यदि अशोक अष्टमी के दिन पुनर्वसु नक्षत्र पड रहा हो तो यह और भी अधिक शुभ माना जाता है. शास्त्रों में अशोक अष्टमी के दिन अशोक वृक्ष की पूजा करने का विधान बताया गया है. इस व्रत में अशोक-कलिका-प्राशन की प्रधानता होती है इसी वजह से इस व्रत को अशोक अष्टमी कहा जाता है. गरुण पुराण के अनुसार अशोक अष्टमी व्रत का वर्णन भगवान ब्रह्मा जी के मुखारविन्द से हुआ है, इसलिए इस व्रत को बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है.
क्या है तारा जयंती-
पूरे देश में तारा जयंती को बहुत ही उत्साह और हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है. तारा जयंती को चैत्र माह की नवमी तिथि तथा शुक्ल पक्ष के दिन मनाया जाता है. विशेष रूप से तंत्र मन्त्र की साधना करने वाले लोगों के लिए तारा जयंती के दिन माँ तारा की उपासना सर्वसिद्धिकारक मानी जाती है. माँ तारा को दस महाविद्याओं में से एक मानाजाताहैं.शास्त्रों में देवी तारा को सूर्यप्रलय की अघिष्ठात्री देवी का उग्ररुप बताया गया है|
क्या है पंगुनीउथीराम -
स्कंद पुराण में जिन आठ महा व्रतों के बारे में बताया गया है, उन सभी व्रतों में से पंगुनी उथीराम सबसे कल्याण कारक व्रत माना जाता है. जब सूर्य फाल्गुन मास के तमिल महीने में शुक्ल पक्ष के दौरान उत्तरा नक्षत्रम पर मीन राशि पर चमकता है, तब पंगुनी उथीराम का त्यौहार मनाया जाता है. यह त्यौहार फाल्गुनी महीने की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है.
क्या है हनुमान जयंती-
हमारे धर्म शास्त्रों में हनुमान जयंती का विशेष महत्व बताया गया है. मान्यताओं के अनुसार हनुमान जयंती के दिन भगवान राम के परम भक्त हनुमान जी भगवान शिव के 11 वे अवतार के रूप में प्रकट हुए थे. हनुमान जी की जयंती पूरे देश में बहुत ही हर्षोल्लास के साथ मनाई जाती है. हिंदु धर्म में हनुमान जयंती को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है. हमारे शास्त्रों में बताया गया है कि भगवान हनुमान का ध्यान करने मात्र से ही सभी प्रकार के कष्ट दूर हो जाते हैं और भक्तों को किसी भी बात का भय नहीं रहता है. हिंदू मान्यताओं के अनुसार हनुमान जी को बहुत ही बलशाली और मंगलकारी बताया गया है.
वैशाख मास की महिमा
भारतीय कालगणना के अनुसार वैशाख मास को हिंदू वर्ष का दूसरा महीना माना जाता है. शास्त्रों में वैशाख मास में पवित्र नदियों में स्नान करने का नियम बताया गया है. पद्म पुराण में बताया गया है कि यदि कोई व्यक्ति वैशाख मास में प्रातः काल स्नान करता है तो उसे अश्वमेध यज्ञ के समान फल प्राप्त होता है.
वैशाख मास का महत्व –
वैशाख मास में है भगवान बुध का जन्म हुआ था. इस महीने में मां दुर्गा के अपराजिता स्वरूप को कपूर और जटामांसी से युक्त जल से स्नान कराने का नियम है. शास्त्रों के अनुसार वैशाख मास में ही ब्रह्म देव ने तिलों का निर्माण किया था. इसलिए यदि कोई व्यक्ति इस महीने में til युक्त जल से स्नान करके अग्नि में तिल की आहुति देकर शहद और तिलों से भरा पात्र दान में देता है तो उसे अक्षय पुण्यों की प्राप्ति होती है. वैशाख मास पूरी तरह से भगवान शिव और आदिशक्ति मां पार्वती को समर्पित है.