गोपाष्टमी के दिन गायों की पूजा की जाती है। कुछ लोग गऊशाला में जाकर गायों की विधिवत पूजा- अर्चना करते हैं।इसके लिए पहले गायों का तिलक किया जाता है। फिर गंगाजल छिड़ककर उन्हें फूलों की माला पहनाई जाती है। उसके बाद उन्हें गुड़, केले और लड्डूओं का प्रसाद खिलाया जाता है और धूप व दीप से उनकी आरती उतारी जाती है।
दुर्गा अष्टमी जैसे की नाम से ही मालूम होता है कि ये व्रत त्यौहार मां दुर्गा को समर्पित है। दुर्गा मां के भक्तों के लिये यह एक खास त्यौहार माना जाता है। और क्योकि यह त्यौहार हर महीने मनाया जाता है इसे मासिक दुर्गा अष्टमी कहा जाता है।
ऐसी तिथि जो हमारे सब संकटों को हर; जीवन में खुशाली देती है उसे संकष्टी चतुर्थी कहते हैं| आषाढ़ मास की कृष्ण पक्ष चतुर्थी को अत्यन्त शुभदायक एवं मंगलकारी बतलाया गया है। जिसे कृष्णपिंगला चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन भगवान् श्री गणेश, विघ्न हरता, गौरी पुत्र की पूजा की जाती है उनके लिए व्रत उपवास भी किया जाता है|हर माह के दोनों पक्षों की चतुर्थी तिथि भगवान गणेश की पूजा की जाती है| हर माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को वैनायकी श्री गणेश चतुर्थी और कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी श्री गणेश चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है। भगवन गणेश जी का सर्प्रथम हर शुभ कार्य या पूजा से पहले पूजन किया जाता है| श्री गणेश प्रथम पूजनीय हैं|
हमारे शास्त्रों के अनुसार कार्तिक मास की नवमी तिथि के दिन आंवला नवमी का त्योहार मनाया जाता है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि से लेकर पूर्णिमा के दिन तक भगवान विष्णु आंवले के पेड़ पर निवास करते हैं. आंवला नवमी के दिन आंवले के पेड़ के साथ साथ भगवान विष्णु की भी पूजा की जाती है. आंवला नवमी को अक्षय नवमी तथा कुष्मांड नवमी के नाम से भी जाना जाता है.
हिंदू धर्म में सूर्य पंचांग के अनुसार धनु संक्रांति के दिन से ही हिन्दु पंचांग के नौवें महीने का आरंभ हो जाता है। धनु संक्रांति के दिन सूर्य देव की आराधना का बहुत महत्व है। हिन्दू पंचांग के अनुसार माना जाता है की पौष माह की धनु संक्रांति से पौष संक्रांति का आरम्भ हो जाता है।
कालाष्टमी या काला अष्टमी एक बहुत ही प्रचलित हिंदू त्योहार है और भक्तों के बीच इसकी बहुत मान्यता भी है। यह विशेष त्यौहार भगवान भैरव को पूर्ण रुप से समर्पित है।
कब मनाते हैं कालाष्टमी:
यह व्रत त्यौहार पूरे विधि-विधान के साथ हिंदू चंद्र माह में कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन, हिंदू भक्त पूरी श्रद्धा के साथ भगवान भैरव की पूजा करते हैं और उन्हें प्रसन्न करने के लिए उपवास भी रखते हैं। एक वर्ष में कुल 12 कालाष्टमी के दर्शन होते हैं।
बुराई पर अच्छाई की जीत का जश्न कंस वध के उत्सव को दर्शाता है। इस विशेष दिन, भगवान श्रीकृष्ण ने ‘कंस’ की हत्या करके राजा उग्रसेन को भारत के मुख्य शासक बनाया था। कंस वध’ का त्यौहार बुराई के अंत और ब्रह्मांड में भलाई के स्थायित्व को दर्शाता है और इसे अधर्म पर धर्म की जीत के रूप में मनाया जाता है।
भीष्म पंचक का हिंदू धर्म में बड़ा ही महत्त्व है। पुराणों तथा हिंदू धर्म ग्रंथों में कार्तिक माह में ‘भीष्म पंचक’ व्रत का विशेष महत्त्व कहा गया है। भीष्म पंचक को ‘पंच भीखू’ के नाम से भी जाना जाता है। धर्म ग्रंथों में कार्तिक स्नान को बहुत महत्त्व दिया गया है। अतः कार्तिक स्नान करने वाले सभी लोग इस व्रत को करते हैं। भीष्म पितामह ने इस व्रत को किया था इसलिए यह ‘भीष्म पंचक’ नाम से प्रसिद्ध हुआ।
शनि प्रदोष व्रत विधि
1. व्रत रखने वाले व्यक्ति को व्रत के दिन सूर्य उदय होने से पहले उठना चाहिये।
2. स्नान आदिकर भगवान् शिव का नाम जपते रहना चाहिए|
3. सुबह नहाने के बाद साफ और आसमानी वस्त्र पहनें।
इस्लाम में इस दिन का खास महत्व है। कुरान के मुताबिक ईद-ए-मिलाद को मौलिद मावलिद के नाम से भी जाना जाता है जिसका अर्थ होता है पैगंबर के जन्म का दिन। इसकी तारीख दुनियाभर में अलग-अलग है क्योंकि यह चंद्र कैलेंडर पर आधारित होता है।