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गोपाष्टमी | Gopashtami on 17 Nov 2026

गोपाष्टमी के दिन गायों की पूजा की जाती है। कुछ लोग गऊशाला में जाकर गायों की विधिवत पूजा- अर्चना करते हैं।इसके लिए पहले गायों का तिलक किया जाता है। फिर गंगाजल छिड़ककर उन्हें फूलों की माला पहनाई जाती है। उसके बाद उन्हें गुड़, केले और लड्डूओं का प्रसाद खिलाया जाता है और धूप व दीप से उनकी आरती उतारी जाती है।


मासिक दुर्गा अष्टमी | Masik Durga ashtami on 17 Nov 2026

दुर्गा अष्टमी जैसे की नाम से ही मालूम होता है कि ये व्रत त्यौहार मां दुर्गा को समर्पित है। दुर्गा मां के भक्तों के लिये यह एक खास त्यौहार माना जाता है। और क्योकि यह त्यौहार हर महीने मनाया जाता है इसे मासिक दुर्गा अष्टमी कहा जाता है।


कृष्णपिंगला संकष्टी चतुर्थी on 03 Jul 2026

ऐसी तिथि जो हमारे सब संकटों को हर; जीवन में खुशाली देती है उसे संकष्टी चतुर्थी कहते हैं| आषाढ़ मास की कृष्ण पक्ष चतुर्थी को अत्यन्त शुभदायक एवं मंगलकारी बतलाया गया है। जिसे कृष्णपिंगला चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन भगवान् श्री गणेश, विघ्न हरता, गौरी पुत्र की पूजा की जाती है उनके लिए व्रत उपवास भी किया जाता है|हर माह के दोनों पक्षों की चतुर्थी तिथि भगवान गणेश की पूजा की जाती है| हर माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को वैनायकी श्री गणेश चतुर्थी और कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी श्री गणेश चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है। भगवन गणेश जी का सर्प्रथम हर शुभ कार्य या पूजा से पहले पूजन किया जाता है| श्री गणेश प्रथम पूजनीय हैं|


अक्षय नवमी / आवंला नवमी | Akshay Navami on 18 Nov 2026

हमारे शास्त्रों के अनुसार कार्तिक मास की नवमी तिथि के दिन आंवला नवमी का त्योहार मनाया जाता है.  पौराणिक मान्यताओं के अनुसार कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की नवमी  तिथि से लेकर पूर्णिमा के दिन तक भगवान विष्णु आंवले के पेड़ पर निवास करते हैं. आंवला नवमी के दिन आंवले के पेड़ के साथ साथ भगवान विष्णु की भी पूजा की जाती है. आंवला नवमी को अक्षय नवमी तथा कुष्मांड नवमी के नाम से भी जाना जाता है. 


धनु संक्रांति | Dhanu Sankranti on 16 Dec 2026

हिंदू धर्म में सूर्य पंचांग के अनुसार धनु संक्रांति के दिन से ही हिन्दु पंचांग के नौवें महीने का आरंभ हो जाता है। धनु संक्रांति के दिन सूर्य देव की आराधना का बहुत महत्व है। हिन्दू पंचांग के अनुसार माना जाता है की पौष माह की धनु संक्रांति से पौष संक्रांति का आरम्भ हो जाता है।


कालाष्टमी | Kalashtami on 10 Apr 2026

कालाष्टमी या काला अष्टमी एक बहुत ही प्रचलित हिंदू त्योहार है और भक्तों के बीच इसकी बहुत मान्यता भी है। यह विशेष त्यौहार भगवान भैरव को पूर्ण रुप से समर्पित है।

कब मनाते हैं कालाष्टमी:

यह व्रत त्यौहार पूरे विधि-विधान के साथ हिंदू चंद्र माह में कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिनहिंदू भक्त पूरी श्रद्धा के साथ भगवान भैरव की पूजा करते हैं और उन्हें प्रसन्न करने के लिए उपवास भी रखते हैं। एक वर्ष में कुल 12 कालाष्टमी के दर्शन होते हैं।


जगधात्री पूजा | Jagdatri Pooja on 18 Nov 2026

महत्व :-
जगद्धात्री पूजा का पूरे बंगाल में एक विशेष महत्व है। दुर्गा पूजा के ठीक एक महीने बाद मनाई जाती है जगद्धात्री पूजा। सारा कलकता शहर और आसपास के शहरों से लोग उमड़ पड़ते हैं इस पूजा में शामिल होने के लिए। भव्य मूर्तियाँ और आलीशान पंडाल इस शहर को एक नया रूप दे देते हैं इन कुछ दिनों में। कार्तिक महीने में मनायी जाने वाली इस पूजा में देवी जगद्धात्री चार हाथों में नाना शस्त्र लिए होती हैं। शेर पर सवार इस देवी की भव्य मूर्तियाँ जगह-जगह पंडाल की शोभा बढ़ा रही होती हैं।


कंस वध | Kans Vadh on 20 Nov 2026

बुराई पर अच्छाई की जीत का जश्न कंस वध के उत्सव को दर्शाता है। इस विशेष दिन, भगवान श्रीकृष्ण ने ‘कंस’ की हत्या करके राजा उग्रसेन को भारत के मुख्य शासक बनाया था। कंस वध’ का त्यौहार बुराई के अंत और ब्रह्मांड में भलाई के स्थायित्व को दर्शाता है और इसे अधर्म पर धर्म की जीत के रूप में मनाया जाता है।


भीष्म पंचक आरम्भ | Bheeshm Panchak on 20 Nov 2026

भीष्म पंचक का हिंदू धर्म में बड़ा ही महत्त्व है। पुराणों तथा हिंदू धर्म ग्रंथों में कार्तिक माह में ‘भीष्म पंचक’ व्रत का विशेष महत्त्व कहा गया है। भीष्म पंचक को ‘पंच भीखू’ के नाम से भी जाना जाता है। धर्म ग्रंथों में कार्तिक स्नान को बहुत महत्त्व दिया गया है। अतः कार्तिक स्नान करने वाले सभी लोग इस व्रत को करते हैं। भीष्म पितामह ने इस व्रत को किया था इसलिए यह ‘भीष्म पंचक’ नाम से प्रसिद्ध हुआ।


देवउठनी या देव प्रबोधिनी एकादशी | Devuthani Ekadashi on 21 Nov 2026

  • हिंदू धर्म में कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को अलग अलग नामों से जाना जाता है. इसे हरि प्रबोधिनी एकादशी, देवोत्थान एकादशी, देवउठनी एकादशी या देव प्रबोधिनी एकादशी भी कहा जाता है|
  • देव प्रबोधिनी एकादशी के दिन तुलसी विवाह किया जाता है. एकादशी के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी के साथ साथ तुलसी पूजन का भी विशेष महत्व होता है.


तुलसी विवाह | Tulsi Vivah on 20 Nov 2026

तुलसी विवाह एक प्रमुख हिंदू पर्व है जिसमें घर या मंदिर में तुलसी (जिसे वृंदा भी कहा जाता है) का विवाह भगवान विष्णु के शालिग्राम रूप से विधिवत संपन्न किया जाता है। यह पवित्र आयोजन कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष में, देवउठनी या प्रबोधिनी एकादशी के बाद मनाया जाता है, जब शुभ कार्यों की शुरुआत होती है। धार्मिक मान्यता है कि तुलसी विवाह करने से घर में सुख-शांति, समृद्धि और सौभाग्य का आगमन होता है। 
कार्तिक शुक्ल पक्ष के पारण के दिन को प्रबोधत्सव मनाया जाता है और इसी दिन या अगली चार तिथि ( द्वादशी,त्रयोदशी, चतुर्दशी और पूर्णिमा ) के दिन तुलसी विवाह किया जाता है।  इस बार प्रबोधत्सव रविवार को है और रविवार को तुलसी को स्पर्श करना वर्जित है इस लिए इस वर्ष तुलसी विवाह 1 नवंबर को मनाया जायेगा।  या 3, 4, 5 नवंबर को भी मनाया जा सकता है । 


शनि प्रदोष व्रत विधि व कथा on 12 Dec 2020

शनि प्रदोष व्रत विधि

1.         व्रत रखने वाले व्यक्ति को व्रत के दिन सूर्य उदय होने से पहले उठना चाहिये।

2.         स्नान आदिकर भगवान् शिव का नाम जपते रहना चाहिए|

3.         सुबह नहाने के बाद साफ और आसमानी वस्त्र पहनें।


ईद ए मिलाद on 10 Nov 2019

इस्लाम में इस दिन का खास महत्व है। कुरान के मुताबिक ईद-ए-मिलाद को मौलिद मावलिद के नाम से भी जाना जाता है जिसका अर्थ होता है पैगंबर के जन्म का दिन। इसकी तारीख दुनियाभर में अलग-अलग है क्योंकि यह चंद्र कैलेंडर पर आधारित होता है।


वैकुंठ चतुर्दशी | Vaikunth Chaturdashi on 23 Nov 2026

वैकुंठ चतुर्दशी का महत्व


अकाल बोधन/कल्पारम्भा | Akaal Bodhan on 16 Oct 2026

अकाल बोधन/कल्पारम्भा षष्टी तिथि को मनाया जाता है।  दुर्गा पूजा की शुरुआत आश्विन मास में शुक्ल पक्ष से की जाती है।  इसी दिन सबसे पहले माँ के मुख से पर्दा हटा के उनके दर्शन करे जाते है।  महा षष्टी तिथि के दिन माँ के पट खुल जाते है।  दुर्गा पूजा का आयोजन तीन दिन तक किया जाता है, महासप्तमी, महाष्टमी, महानवमी।  पूजा में मन्त्र,आरती, जाप का अधिक महत्व है।  दुर्गा पूजा को दुर्गोत्सव के नाम से भी जाना जाता है।  


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