भारतीय संवस्तर के 11वे चंद्रमास और दसवें सौरमास को माघ कहा जाता है. इस मास में मघा नक्षत्र युक्त पूर्णिमा होने के कारण इसे माघ कहा जाता है. धार्मिक दृष्टिकोण से माघ मास का बहुत महत्व होता है. माघ मास में पवित्र नदी में स्नान करने वाले व्यक्ति के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और वह स्वर्ग लोक प्राप्त होता है
प्रदोष का अर्थ
प्रदोष का अर्थ है "भारी दोष"| चन्द्रमा को श्रेय रोग होने के कारण चंद्र देव अंतिम साँसे गिन रहे थे| तभी भगवान् शंकर ने चन्द्रमा को पुनर्जीवन देकर मस्तक पर धारण किया| चंद्र मृत्यु के निकट जाकर भी भगवान् शिव की कृपा से जीवित रहे और पूरनमाशी के दिन तक पूर्णता स्वस्थ होक प्रकट हुए|
पोंगल का त्यौहार पूरी तरह से किसानों का पर्व है और यह गोवर्धन पूजा, दिवाली और मकर संक्रांति का एक मिलाजुला सा रुप है। पोंगल एक महत्वपूर्ण त्यौहार है और यह तमिलनाडु में बहुत ही जोर-शोर से मनाया जाता है । नए साल में पोंगल की शुरुआत काफी शुभ माना जाता है और इस दिन पहली बार नए फसल वाले अनाज को पकाया जाता है।
गंगा सागर स्नान को 'गंगा सागर मेला' या 'गंगा सागर यात्रा' के नाम से पूरे भारत में विशेष रुप से जाना जाता है। 'मकर संक्रांति' के शुभ समय के दौरान हिंदू तीर्थयात्री गंगा स्नान को बहुत ही पवित्र मानते हैं। गंगा सागर स्नान के लिये भक्त देश के कोने-कोने से यहां आत हैं और इसीलिये यहां बड़े मेले को आयोजन भी किया जाता है। गंगा सागर मेला संक्राति से कुछ दिन पहले शुरु होता है और संक्राति के बाद खत्म हो जाता है।
उत्तरायण जैसा कि नाम से ही प्रतीत होता है कि यह दो अलग-अलग संस्कृत शब्दों "उत्तारा" (उत्तर) और "अयन" (आंदोलन) से बना है। उत्तरायण को दक्षिणायन से सदैव श्रेष्ठ माना गया है । सूर्य का उतराय़ण का अर्थ है कि प्राणहारी ठड समाप्त हो जाती है और वसंत शूरु हो जाता है।
मकरविलक्कु एक बहुत ही महत्वपूर्ण त्यौहार है जिसे केरल के सबरीमाला मंदिर में बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है। हजारों की संख्या में भगवान अय्प्पा के श्रद्धालु दुनियाभर से इस मंदिर में मकरविलक्कु को देखने के लिये इकट्ठा होते है। मंदिर मे प्रजवल्लित दीपों के साथ इसकी सुंदरता देखते ही बनती है।
शिशिर ऋतु को ही शरद ऋतु के नाम से जाना जाता है और इस दौरान कड़ाके की ठंड पड़ती है। शिशिर ऋतु का अपना बहुत ही अधिक महत्व है।
थाई अमावस्या को पहली अमावस्या भी कहा जाता है जो कि उत्तरायण काल में आती है । हिंदु धर्म में इसका बहुत ही अधिक महत्व है। इस दिन विभिन्न पूर्वजों के प्रति किये गये अनुष्ठानों का एक विशेष महत्व है और इसीलिये बहुत ही श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। इस शुभ दिन पर दिवंगत आत्माओं का आशीर्वाद लेने से एक विशेष प्रकार का सुख भी मिलता है।
श्री लक्ष्मी पंचमी को हिंदु धर्म में बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। इस व्रत का लक्ष्मी प्राप्ति के संबंध में भी बहुत ही विशेष स्थान है।श्री पचंमी का त्यौहार पूरी श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है । यह त्यौहार विद्या, ज्ञान, कला और संगीत की देवी मां सरस्वती जी को पूरी तरह समर्पित है।
नवग्रहों में सूर्य को प्रधान ग्रह देव माना जाता है. बिना सूर्य के जीवन की कल्पना करना मुश्किल है. सूर्य ही जीवन तत्व को अग्रसर करके उसे चैतन्य बनाता है और हमें प्रकाश प्रदान करता है. हिंदू धर्म में सूर्य को देवता माना जाता है और अलग-अलग अवसरों पर सूर्य भगवान की पूजा उपासना करने का नियम है. बहुत सारे लोग नियमित रूप से सूर्य को अर्ध्य देते हैं और उनकी उपासना करते हैं. मकर संक्रांति का समय सूर्य भगवान की उपासना करने के लिए सबसे श्रेष्ठ माना जाता है. मकर संक्रांति मात्र एक ऐसा भारतीय पर्व है जो हर साल एक निश्चित तिथि पर आता है.
हिन्दू धर्म में भोलेनाथ की पूजा को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है. ऐसा माना जाता है की जो भी भक्त सच्चे मन और आस्था से भोलेनाथ की पूजा अर्चना करता है उसके जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं. हर वह मनुष्य जो भगवान् शिव का ध्यान पूजा उपासना करता है उसके जीवन की कठिनाई दूर होने लगती है साथ ही कठिनाईयों से बहार निकलने की हिम्मत मिलती है| हर माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मासिक शिवरात्रि मनाई जाती है| महाशिवरात्रि के अलावा भी साल में 12 शिवरात्रि और भी आती हैं, जिन का अलग-अलग महत्व होता है. ऐसा माना जाता है कि मासिक शिवरात्रि के दिन भोलेनाथ स्वयं शिव लिंग रूप में प्रकट होते हैं.
गणेश जयंती का एक बहुत ही विशेष महत्व है। ऐसी मान्यता है कि इसी दिन मां पार्वती और भगवान शिव शंकर जी के पुत्र गणेश जी का जन्म हुआ था। ऐसा कहा जाता है कि माघ महीने में गणेश जयंती का व्रत करने से आपके सभी प्रकार के कष्ट दूर होते हैं।
वरद-तिल-कुंड चतुर्थी को तिलकूट चतुर्थी को व्रत किया जाता है और इस दिन भगवान श्री गणेश जी का पूजा पूरी श्रद्धा के साथ की जाती है। हिंदु पुराणों में इस चतुर्थी को बहुत ही विशेष महत्व बताया गया है। ऐसा माना जाता है कि यह व्रत महिलाओं के लिए बहुत ही उपयोगी सिद्ध होता है
हिन्दू धर्म के अनुसार विवाह, वर व् वधु दोनों के लिए एक दूसरे जन्म के समान है| विवाह के पश्चात दोनों की ही परिवार व् एक दूसरे के प्रति जिम्मेदारियां बढ़ जातीं हैं| विवाह के बाद वर वधु दोनों ही एकदूसरे के साथ अपना पूरा जीवन व्यतीत करने की प्रतिज्ञा करते हैं| हर वैवाहिक जोड़ा यही चाहता है की विवाह के पश्चात उनका जीवन सुखद हो| अग्नि के सात फेरे लेकर वर व् वधु तन मन तथा आत्मा से एक पवित्र बंधन में बंध जाते हैं| कभी कभी ऐसा होता है की व्यक्ति के तमाम प्रयासों के बाद भी या तो विवाह हो नहीं पता है या विवाह में विलम्भ होता है या विवाह होने के बाद विवाह में लगातार उतार चढ़ाव आता रहता है| इन्ही सब समस्याओं को दूर करने के लिए मनुष्य बहुत से तमाम तरह के उपाय, टोटके आदि करता है, परन्तु एक बहुत ही साधारण व् सरल उपाय करना नहीं जानता, देवों के देव महादेव व् माँ गौरी की उपासना, जो की शुक्ल पक्ष की गौरी तृतीया को करनी चाहिए।