जानिए क्या है भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा का रहस्य
आषाढ़ मास की द्वितीय तिथि के दिन भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा का उत्सव बहुत ही धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है. उड़ीसा के पूरी में भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा बहुत ही धूमधाम के साथ निकाली जाती है. भगवान जगन्नाथ की यात्रा के दौरान वर्ष में एक बार भगवान जगन्नाथ को उनके गर्भ गृह से बाहर निकालकर यात्रा कराई जाती है. भगवान जगन्नाथ के साथ भगवान कृष्ण और उनके बड़े भाई बलराम और बहन सुभद्रा भी रथ में बैठकर यात्रा करते हैं. भगवान जगन्नाथ की यात्रा का यह उत्सव पूरे 9 दिनों तक बहुत ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है. मान्यताओं के अनुसार इस यात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ अपनी गर्भ गृह से बाहर आकर प्रजा के सुख दुख हो स्वयं देखते हैं.
जया पार्वती व्रत को विजया व्रत भी कहा जाता है. यह व्रत मुख्य रूप से गुजरात में मनाया जाता है. जया पार्वती का व्रत विवाहित और कुंवारी कन्याएं रखती हैं. जया पार्वती व्रत में माता पार्वती और शिव की पूजा की जाती है. यह व्रत बहुत ही कठिन होता है और लगातार पांच दिनों तक चलता है. सभी विवाहित महिलाएं अपने वैवाहिक जीवन को सुखमय बनाने के लिए जया पार्वती व्रत करती हैं, और कुंवारी कन्या अच्छे वर की प्राप्ति के लिए पूरी श्रद्धा के साथ जया पार्वती व्रत को करती हैं.
वासुदेव द्वादशी
वासुदेव द्वादशी का व्रत भगवान कृष्ण को समर्पित है. वसुदेव द्वादशी का व्रत देव शयनी एकादशी के 1 दिन पश्चात मनाया जाता है. आषाढ़ मास और चातुर्मास के आरंभ में वासुदेव द्वादशी का व्रत किया जाता है. वासुदेव द्वादशी के दिन भगवान श्री कृष्ण के साथ भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा भी की जाती है. जो भी मनुष्य वासुदेव द्वादशी का व्रत करता है उसे मृत्यु के पश्चात मोक्ष की प्राप्ति होती है. वासुदेव द्वादशी के दिन भगवान वासुदेव के अलग-अलग नाम और उनके व्यूहों के साथ साथ पैर से लेकर सिर तक सभी अंगों की पूजा की जाती है.
भाद्रपद महीने की महानता और इससे जुडी विशेष बातें भाद्रपद महीने में हिन्दू धर्म के बहुत सारे त्यौहार आते हैं. इस महीने में पड़ने वाले त्योहारों में जन्माष्टमी व गणेशोत्सव सबसे मुख्य त्यौहार हैं. भाद्रपद महीने को भादो का महीना भी कहा जाता है. जो भी व्यक्ति इस माह में स्नान, दान और व्रत करता है उसके सभी पापों का नाश होता है. भाद्रपद के महीने को शून्य मास भी कहा जाता है, क्यों कि इस माह में लोक व्यवहार के कार्य वर्जित होते हैं.